क्या आप भी करती हैं मेनोपॉज़ मिथक पर यकीन?
मेनोपॉज़ एक नेचुरल प्रक्रिया हैं। इस दौरान और इसके बाद अपना अच्छे से ख्याल रख कर आप स्वस्थ जीवनशैली अपना सकती हैं।
Menopause Stress: मेनोपॉज़ हर महिला के जीवन का वो समय है जब उसकी मेंस्ट्रुअल साइकिल पूरी तरह से बंद होने वाली होती है। ज़्यादातर महिलाओं में इसकी शुरुआत 45 से 50 के बीच में होती है।हर महिला के मन में इसे लेकर ढेरों सवाल और चिंता होती है। उन्हें लगता है ये काफी खतरनाक स्थिति होगी और उनके लिए जीवन और मुश्किल हो जाएगा। दरअसल ऐसा कुछ भी नहीं होता है।
ये एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे होकर हर महिला को गुजरना पड़ता है। ये प्रक्रिया हमारे हॉर्मोनंस से जुडी होती है, इसलिए थोड़ा बहुत परेशानी तो होती ही है, लेकिन ऐसा भी नहीं है जैसा हमने इसे समझ लिया है। इसके बारे में सही जानकारी होना बहुत जरुरी है।
जब कभी आपकी किसी दोस्त,बहन या किसी करीबी को इस दौर से होकर गुजरना हो, तो आप उन्हें भी समझा सकें और इसके बारे में सोचकर होने वाली चिंताओं से उन्हें आजाद कर सकें। तनाव लेकर हम मेनोपॉज़ की परेशानियों को और बढ़ा देते हैं। जब महिलाओं को मेनोपॉज़ होता है, तो उनकी ओवरी अंडे रिलीज़ करना पूरी तरह से बंद कर देती है। कुछ हॉर्मोन जैसे एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन और प्रोजेस्ट्रोन इन सबका स्तर कम होने लगता है। इनका सीधा मतलब है रिप्रोडक्शन प्रोसेस का बंद होना। इस समय जब महिला इतने सारे बदलाव से गुजर रही होती है, तो वो पहले से ही काफी तनाव में होती है। ऐसे में अगर उनके दिमाग में गलत चीज़ें आएंगी। उनके लिए इस स्थिति से उबरना और भी मुश्किल हो जाएगा।
मेनोपॉज़ एक नेचुरल प्रक्रिया हैं। इस दौरान और इसके बाद अपना अच्छे से ख्याल रख कर आप स्वस्थ जीवनशैली अपना सकती हैं। विशेष रूप से आपको अपने आहार और शरीर के बदलाव पर ध्यान देना होगा। बेकार के मिथक से बचें। इस दौरान किसी भी तरह कि परेशानी होने पर सीधे अपने डॉक्टर से संपर्क करें। उनके द्वारा दी गयी सलाह से आप काफी सहज महसूस करेंगी। इस तरह आप मेनोपॉज़ में होने वाले बेकार के तनाव से बची रहेंगी और आपको पता रहेगा इस स्थिति में कैसे अपने आपको मजबूत बनाये रखना है। आइये जानते हैं क्या हैं वो ग़लतफ़हमियां जिनसे हमें बचकर रहना हैं।
पीरियड्स अचानक से रुक जाना
हमारे दिमाग में ये बात रहती है कि हमारे पीरियड्स अचानक से एक दिन रुक जाएंगे और यही मेनोपॉज़ की प्रक्रिया है। ऐसा नहीं है कि एक दिन आप सो कर उठे और आपके पीरियड्स बंद हो जाएंगे।

ये धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया है। पहले आपके पीरियड्स अनियमित होंगे। कभी आएंगे कभी नहीं, इस तरह आपको समझना होगा अब आप मेनोपॉज़ कि तरफ बढ़ रही हैं। ऐसीकुछ ही महिलाएं होती हैं जिनके पीरियड्स अचानक से रुक जाते हैं। मेनोपॉज़ के बाद शरीर में कैल्शियम की कमी होने लगती हैं। इसकी भरपाई करना जरुरी हैं। इसके लिए आप अपने डॉक्टर कि सलाह से सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर सकती हैं।
इलाज़ होना जरुरी है
हमें सबसे पहले ये समझना चाहिए मेनोपॉज़ हमारे शरीर के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है, जिस तरह पीरियड्स का शुरू होना एक सामान्य बात है ठीक उसी तरह बंद होना भी प्राकृतिक है। ये किसी तरह कि बीमारी नहीं है, जिसका इलाज़ किया जाए।

अलग-अलग तरह के लक्षणों को देखते हुए अगर किसी को ज़्यादा तकलीफ है, तब उपचार की जरुरत पड़ती है। आप चाहें तो योगा कर सकती हैं। स्वस्थ जीवन शैली के लिए आपको संतुलित आहार लेना चाहिए। हल्का शाकाहारी भोजन लें। उस भोजन को ज़्यादा महत्त्व दें, जिसमे फाइबर की मात्रा अधिक हो।
सेक्स ड्राइव ख़त्म हो जाना
मेनोपॉज़ के बाद कई महिलाओं की सेक्स ड्राइव में कमी आती है। इसकी वजह है हमारी बॉडी में एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन का बनना बंद हो जाना। कुछ महिलाओं में इसका प्रभाव बिल्कुल नहीं होता है। वो पहले की तरह ही अपनी सेक्स लाइफ को एन्जॉय करती हैं। जिन महिलाओं में लो सेक्स ड्राइव की परेशानी आती है, उन्हें डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इस समस्या के लिए उन्हें एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन कि दवाइयां दी जाती हैं, जिस से वो फिर से अपनी पहले वाली सेक्स लाइफ एन्जॉय कर पाती हैं। योगा और प्राणायाम को अपनी जीवन शैली का जरुरी हिस्सा बना लें।
अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखें। नारियल पानी, सूप, रसम, फाइबर युक्त फल, पानी आदि का सेवन समय-समय पर करती रहें।
प्रेग्नेंसी नहीं हो सकती
इस दौरान महिला मेनोपॉज़ के लक्षणों को महसूल करती है, उस स्थति को पेरिमेनोपॉज कहते हैं।इस स्थिति में भी महिला प्रेग्नेंट हो सकती है। अगर आप या आपके पार्टनर ओवुलेशन के दौरान इंटिमेट होते हैं, तो इस दौरान गर्भ धारण की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस दौरान आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल काफी अनियमित हो जाती है। इस स्थिति में आपके लिए ये जान पाना काफी मुश्किल होता है कि आप फर्टाइल हैं या नहीं। ये सोच कर ना चलें कि अब आप मेनोपॉज़ के नजदीक हैं या उस दौर से गुजर रहीं हैं, तो आप प्रेग्नेंट नहीं हो सकती हैं।

मेनोपॉज़ के बाद खुद को व्यस्त रखने कि कोशिश करें। तनाव मुक्त रहने के लिए अपनी पसंद का काम करें।
इसके बाद आपका वज़न बढ़ने कि संभावना ज़्यादा हो जाती हैं। नियमित रूप से व्यायाम करें। एक दिन में कम से कम 40 से 50 मिनट तक टहलें। इससे आपकी हड्डियां मजबूत बनी रहेंगी और जोड़ों से जुडी कोई समस्या नहीं होगी।
