Funny Stories for Kids: रात को निक्का छत पर सोने लगा, तो उसकी निगाह आसमान में चाँदी की तरह चम-चम चमकते चाँद और तारों पर पड़ी । वह खुश होकर देर तक उन्हें देखता रहा । फिर मम्मी से बोला, “मम्मी -मम्मी , देखो कितना अच्छा चाँद । कि तने प्यारे तारे ।…कि तने अच्छे लग रहे हैं । बिल्कुल मोती जैसे । एकदम उजले । हैं ना मम्मी !” मम्मी बोलीं, “निक्का , तूने आज देखा ?…चाँद और तारे तो बच्चों के सबसे पुराने दोस्त हैं । जब मैं बच्ची थी, तब भी ये ऐसे ही थे । तब तेरी नानी बिल्कुल छोटी बच्ची रही होंगी, तब भी ऐसे ही थे । हजारों सालों से ये ऐसे ही हैं और हमेशा रहेंगे ।…दुनिया बदल जाती है, मगर बच्चों से इनका प्यार और दोस्ती कम नहीं होती ।” “क्यों मम्मी , ऐसा क्यों ?” निक्का को बड़ी हैरानी हुई । “इसलिए कि चाँद और तारों का प्यार सच्चा है । बच्चों को वे दिल से प्यार
करते हैं । और इसीलिए बच्चों की भी उनसे खूब दोस्ती हो जाती है । सुनो, मैं तुम्हें चाँद की कवि ता सुनाती हूँ, जो मुझे तेरी नानी ने सुनाई थी । बस, मैंने उसमें तुम्हारा नाम जोड़ दिया है ।” कहकर मम्मी गाने लगीं –
चंदा मामा दूर के
पूए पकाए गुड़ के,
आप खाएँ थाली में
निक्का को दें प्याली में ।
प्याली, प्याली, प्याली में,
थाली, थाली, थाली में,
आओ सारे मिलकर देखो,
किरणों वाली जाली में ।
चंदा मामा पूए खाएँ,
चाँदी वाली थाली में
साथ-साथ निक्का भी खाए
छोटी-सी एक प्याली में…!
सुनकर निक्का को बड़ा मजा आया । वह भी जोर-जोर से गाने लगा, “चंदा मामा दूर के, पूए पकाए गुड़ के, आप खाएँ थाली में, निक्का को दें प्याली में…!”
गाते-गाते न जाने कब उसकी आँख लग गई । थोड़ी देर बाद निक्का को सपना आया । सपने में चंदा मामा । निक्का को लगा, चंदा मामा खूब जोर से हँसते हुए, दोनों हाथ हिला-हि लाकर उसे बुला रहे हैं ।
“लेकिन …मैं कैसे आऊँ, चंदा मामा ? आप तो वहाँ हैं, आसमान में । बहुत ऊँचे, बहुत ऊँचे ।” निक्का ने उलझन में पड़कर कहा । “ओहो, तो यह बात है !” चंदा मामा फि र से हो-हो, हो-हो करके हँसे । बोले,
“जरा ठहर निक्का , मैं आता हूँ । अभी तुझे लेने आता हूँ । तू बिल्कुल चिंता न कर ।” और सच्ची -मुच्ची थोड़ी ही देर में चंदा मामा किरणों के सफेद चम-चम करते उड़न-खटोले पर बैठकर सचमुच नीचे उतर आए । झकाझक सफेद कुरता-पाजामा पहने हुए गोल-मटोल चंदा मामा । आहा,
कि तने संदुर लग रहे थे । प्यारे-प्यारे । निक्का को लगा, “अरे, ये तो हसँ रहे हैं क्या हमेशा यों ही हँसते रहते हैं चंदा मामा ?” चंदा मामा समझ गए निक्का के मन की बात । बोले, “मैं हँसता हूँ, तभी
तो सबको इतना अच्छा लगता है । सारी दुनिया के बच्चे मुझे हँसने वाला चंदा मामा कहते हैं, और खूब प्यार करते हैं ।”
सुनकर निक्का ने गरदन हि ला दी । बोला, “हाँ मामा, हाँ । आप हरदम हँसते रहते हो, इसीलि ए तो मुझे भी बड़े प्या रे लगते हो ।”
“तो फिर आओ, चलते हैं ।” कहकर चंदा मामा ने हाथ बढ़ा या और बड़े प्यार से निक्का को अपने उड़न-खटोले पर बैठाकर आसमान में उड़ चले । उस उड़न-खटोले के आगे और पीछे दो-दो सफेद हंस बने थे । बड़े उजले-उजले हंस । वे मिलकर कोई मीठा गाना गा रहे थे । उसमें बार-बार निक्का का नाम आ रहा था । निक्का ने ध्यान से सुना, तो गाने के बोल समझ में आ गए ।
चारों हंस मिलकर गा रहे थे –
आओ नि क्का , तुम्हें घुमाएँ
आसमान की घाटी में,
जि समें चंदा, जि समें तारे
खूब रुपहली माटी में ।
तुम्हें देखकर सब खुश होंगे,
आओ नि क्का , आओ ना,
आज खुशी की वेला आई
गाओ नि क्का , गाओ ना ।
निक्का को उड़न-खटोले में बने हंसों का गाना बड़ा पसंद आया । वह भी साथ-साथ गाने लगा –
आओ निक्का , तुम्हें घुमाएँ
आसमान की घाटी में,
जिसमें चंदा, जिसमें तारे
खूब रुपहली माटी में…!
थोड़ी देर में ही निक्का चंदा मामा के साथ-साथ आसमान में घूम रहा था । यहाँ से वहाँ, वहाँ से वहाँ, वहाँ से वहाँ । उसे बहुत मजा आ रहा था । अभी तक तो आसमान को उसने बहुत दूर से देखा था । अब वह खुद आसमान की सैर कर रहा था । धीरे-धीरे एक-एक तारे से उसकी दोस्ती हो गई । वह हर कि सी से हाथ मिलाकर हाल-चाल पूछ रहा था । हर तारे की अलग कहानी थी । एकदम अनजानी । निक्का सुनता तो हैरान हो जाता । सोचता, ‘आसमान के तारों की दुनिया कि तनी बड़ी है ! सचमुच अनंत । मुझे तो अभी तक कुछ पता ही नहीं था ।’
*
थोड़ी देर में चंदा मामा ने निक्का के लि ए बहुत बड़ी दावत का इंतजाम किया । उसमें सारे तारे सफे द रेशम की संदुर-संदुर चम-चम पोशाकें और जरीदार टोपियाँ लगाकर आए । सब निक्का से हाथ मि लाकर “हैलो निक्का !” कहकर खुशी प्रकट कर रहे थे और आसमानी दुनिया की सैर पर आने के लिए उसे ढेर सारी बधाइयाँ दे रहे थे ।
कुछ तारों ने निक्का को रेशम की डिब्बी में संदुर उपहार भी दिए । निक्का ने सबको थैंक्यू कहा, और प्या र से सारे उपहारों को सहेजकर रख लिया । चंदा मामा की उस दावत में तरह-तरह के पकवान थे । रसगुल्ले, चमचम, सोहन हलवा, इमरती और बर्फी की बहार थी । खुद तारे ही चाँदी की प्यालियों में उन्हें परोस रहे थे । बार-बार कहते, “निक्का , तुम्हारे लिए हमने ये खास मिठाइयाँ बनवाई हैं । तुम्हें पसंद हैं न ! शरमाओ मत । खूब अच्छी तरह खाना ।” निक्का ने खूब सारे रसगुल्ले खाए । फिर बर्फी , चमचम और सोहन हलवा खाया । गरम-गरम इमरतियाँ खाई । समोसे और खस्ता कचौड़ियाँ भी ।
“आहा ! इतना स्वाद तो पहले कभी नहीं आया था !” निक्का ने कहा । एक छोटा-सा तारा, जिसका नाम टुनटुन था, निक्का का बड़ा अच्छा दोस्त बन गया था । उसने निक्का को बताया, “यहाँ खाने-पीने की सारी चीजें एकदम शुद्ध मिलती हैं न । कहीं कोई मिलावट नहीं है । इसीलि ए इन मिठाइयों का स्वाद निराला है ।”
टुनटुन की छोटी बहन टिनटिन बड़ी चंचल थी । उसने हँसते हुए कहा, “फिर तुम तो आज के खास मेहमान हो निक्का । इसलिए चंदा मामा ने अपनी निगरानी में सारी मिठाइयाँ, समोसे और खस्ता कचौड़ि याँ बनवाई हैं । उन्होंने हम सबको बुलाकर कहा कि देखना, कोई कसर न रह जाए । बहुत दिनों बाद प्यारा निक्का मुझसे मिलने आया है । उसे मैं एक से एक अच्छी चीजें खिलाना चाहता हूँ ।”
अभी ये बातें चल ही रही थीं कि तभी आसमान के सब तारों ने मिलकर डांस करना शुरू कर दिया । वे हँस-हँसकर नाच रहे थे । झूम-झूमकर नाच रहे थे । घूम-घूमकर नाच रहे थे । नाचते समय उनके पैर ऐसे थिरकते, जैसे बिजली कौंध रही हो । निक्का को लगा, ‘अरे, ये तो एकदम मेरे स्कूल के बच्चों की तरह नाच रहे हैं । तब तो मैं भी इनके साथ नाच सकता हूँ ।’ निक्का ने आसमान के तारों के साथ नाचना शुरू कि या तो उसे इतना मजा आया कि उसका जी ही नहीं भर रहा था । टाँगें थक गई थीं, पर दिल कह रहा था, ‘अभी और नाँचू और…!’ पता नहीं, कि तनी देर तक नाच चला । सब तारे, तारिकाएँ नाच और थिरक रहे थे । पूरा आसमान ही छमाछम नाच रहा था । बड़ा अद्भुत दृश्य था । जैसा आसमान में कभी-कभार ही देखने को मिलता था ।
कुछ देर बाद निक्का थोड़ा सुस्ताने के लि ए बैठ गया । तभी चंदा मामा उसके पास आए । “अच्छा , अब सो जाओ प्या रे निक्का । तुम थक गए होगे ।” चंदा मामा ने निक्का के माथे पर हाथ फेरते हुए कहा ।
निक्का को माथे पर चंदा मामा के कोमल-कोमल हाथों का स्पर्श अच्छा लग रहा था । सामने नीली झिलमिल-झिलमिल टोपियाँ पहने नाचते हुए बेशुमार तारे । उसने उन्हें छूकर देखना चाहा । तभी अचानक उनकी नींद खुल गई ।… उसने देखा, उसके हाथ में मम्मी का हाथ है और मम्मी प्यार से उसका माथा थपथपाते हुए कह रही हैं, “उठ निक्का बेटा, क्या स्कूल नहीं जाना ?” “हाँ, मम्मी , उठता हूँ । पर चंदा मामा कहाँ हैं और वे हँस-हँसकर नाचते हुए तारे…? जरीदार टोपि याँ । चमचम, रसगुल्ले, बर्फी , सोहन हलवा…?” मम्मी को हँसी आ गई । बोलीं, “निक्का , तू जरूर कोई सपना देख रहा
था ।”
“ओहो !…हाँ, वह सपना ही होगा ।” निक्का को शर्म आई, पर अच्छा भी लग रहा था । चलो, इसी बहाने सपने में ही सही, वह चाँद पर तो हो आया ।
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
