Summary: झूठी प्रोफ़ाइल, सच्चा प्यार: नम्रता–निशांत की मैट्रिमोनियल मुलाक़ात की अनोखी कहानी
नम्रता और निशांत की मैट्रिमोनियल साइट पर बनी झूठी प्रोफ़ाइलें धीरे-धीरे उनके सच्चे दिलों का रास्ता खोल देती हैं। बार-बार मिलने वाली किस्मत, छुपे सच और मासूम भावनाओं के बीच उनकी कहानी एक खूबसूरत प्यार में बदल जाती है।
Short Hindi Story: दिल्ली की रौनक में एक लड़की रोज़ दिखाई देती थी, नाम था नम्रता। वो मन ही मन एक लड़के को पसंद करती थी। हल्की दाढ़ी और शांत आँखों वाला निशांत उसे अक्सर दिखाई दे जाता था। उसे देखकर नम्रता हर बार एक ही बात सोचती थी, बस एक बार कैसे भी इससे अपने दिल की बात कह दूँ। लेकिन किस्मत भी जैसे आँख-मिचौली का खेल खेल रही थी। दोनों एक ही शहर में रहते थे,कई बार मेट्रो, कैफ़े, मॉल और लोकल मार्केट में आमने-सामने आ ही जाते थे। हर बार नम्रता उसे पहचान लेती, लेकिन निशांत को जरा भी अहसास नहीं होता था की नम्रता उसे हर बार जी भर कर निहारती है।
नम्रता और निशांत में कुछ एक जैसा था या नहीं ये तो उनके एक दूसरे को जान लेने पर ही पता चलता, लेकिन हाँ उनके घर वालो में एक बात ऐसी थी जिसके लिए दोनों बेचैन थे। नम्रता की माँ हर थोड़े दिन में उसे मैट्रिमोनियल साइट पर प्रोफ़ाइल बनाने की सलाह देती थी। ठीक इसी तरह निशांत के पापा भी कहते, तुमने लड़की ढूंढने में बहुत देर कर दी है, अब कम से कम मैट्रिमोनियल साइट पर ही अपनी प्रोफाइल बना लो, हो सकता है लडकियां ही तुम्हें खुद तलाश लें।
दोनों अपने घरवालों के तानों से परेशान हो कर अपनी प्रोफाइल बना डालते हैं, लेकिन दोनों ने अपनी–अपनी पसंद और फोटो झूठी डाल दी। नम्रता जो काफी ज्यादा शर्मीले स्वभाव की थी , उसने अपनी प्रोफाइल में लिखा, पूरी तरह मस्तमौला, बेहद मिलनसार, पार्टी पसंद के साथ नाइटलाइफ़ पसंद करने वाली लड़की। अपनी जगह दोस्त की कजिन की फोटो लगा दी।
निशांत जो शांत, साधारण और कविता-कहानी लिखने का शौक़ीन था , उसने प्रोफाइल पर लिखा, फिटनेस का दीवाना , मैराथन दौड़ने वाला, पार्टी पसंद शख्स , अपनी प्रोफाइल पर उसने जिम वाले दोस्त की फोटो लगा दी थी।
कुछ समय बाद नम्रता ने उसकी प्रोफाइल देखी और सोचा , नहीं ये मेरे टाइप का नहीं है, वही निशांत ने सोचा, अरे ये तो कुछ ज्यादा ही तेज़ लगती है, लेकिन परिवार के दबाव में आकर दोनों ने एक दूसरे की प्रोफाइल पर हैलो लिख कर भेज दिया।

कई महीनों की बातों के बाद धीरे-धीरे असलियत खुलने लगी। एक दिन नम्रता ने कहा , पता है मैं आज पार्टी में गई थी, पर 20 मिनट ही वहां टिक पाई, कानों में दर्द होने लगा था। निशांत ने हंसने का इमोजी बना कर लिखा , तुम मेरी ही तरह हो मुझे भी तेज़ आवाज़ बिलकुल पसंद नहीं है।
निशांत ने लिखा पता है आज मैंने 5 किलोमीटर वॉक की, उधर से नम्रता ने तपाक से कहा, पांच किलोमीटर या पांच मिनट?
अरे तुमने तो मेरी पोल ही खोल दी कहकर निशांत खूब हँसा।
धीरे-धीरे ये बातें किसी और ही दुनिया में चली गई। जहाँ झूठी प्रोफाइल पिक्चर की नहीं,सच्चे दिल की पहचान हो रही थी। लगभग चार महीने बीत गए। यूँ ही अचानक निशांत ने कहा, मुझे लगता है हमें अब मिलना चाहिए, ये शब्द पढ़ कर नम्रता का दिल जोर से धड़का। कहीं ये मेरी सोच से बिल्कुल अलग निकला मैं क्या करूगी, घर पर क्या जवाब दूंगी। बातों- बातों में कैफ़े में मिलना तय हुआ। नम्रता वहां पहुंच कर चारों तरफ देख ही रही थी की उसकी नज़र निशांत पर पड़ी ,और वो उसे देखती ही रह गयी।
निशांत ने उसे देख कर हाथ हिलाया, नम्रता ने सोचा , हे भगवान ये वही है! पर ये मुझे कैसे पहचानता है ? निशांत को सामने देख कर नम्रता भूल गयी थी की उन दोनों ने मिलने से पहले एक दूसरे के कपडे का रंग तय कर लिया था और कैफ़े में बैठने की जगह भी।

निशांत उसकी ओर बढ़ा और बोला, नम्रता आप ही हो ना, हमने मिल कर तय किया था यहीं मिलेंगे। दोनों को एक साथ एहसास हुआ प्रोफाइल पिक्चर तो दोनों की ही असली नहीं है। फिर दोनों ने बैठते ही सच्चाई सामने रख दी तो पता चला बायो झूठ, प्रोफाइल पिक्चर झूठ यहाँ तक की लाइफस्टाइल भी झूठ, लेकिन दिल दोनों का ही पूरी तरह सच्चा था।
नम्रता धीरे से बोली, निशांत हम पहले भी मिल चुके हैं कई बार। मेट्रो, कैफ़े, मॉल और लोकल मार्केट में भी और मैं तब से ही तुम्हे बहुत पसंद करती हूँ। निशांत की आँखें फैल गईं, क्या तुम मुझे पहले से जानती थीं? नम्रता ने हाँ में सिर हिलाया। निशांत ने कुछ पल चुप रहकर झट से उसका हाथ थाम लिया। उसने कहा अगर मैं तुम्हे पहले देख लेता तो शायद ये हाथ पहले ही पकड़ लेता।
नम्रता के गाल गुलाबी हो गए वो मुस्कुराई और कहने लगी , प्रोफाइल पिक्चर ने धोखा दिया पर दिल ने तो तुम्हें पहचान ही लिया। दोनों हँस पड़े और साथ में बोले, किस्मत की टाइमिंग भी कमाल की थी और दोनों हाथ पकडे कैफ़े से बाहर चल दिए।
