summary: भाभी माँ: एक रिश्ते में छुपी ममता की अनमोल कहानी
यह भावुक कहानी सपना की है, जिसने बचपन में माँ को खो दिया, लेकिन अपनी भाभी कमला में उसे माँ का सच्चा रूप मिल गया।
Hindi Kahani: सपनों को समझने की अभी उसकी उम्र भी नहीं आई थी, तभी एक नन्ही-सी बच्ची सपना की दुनिया उजड़ गई थी। । वह सिर्फ छह महीने की थी, जब उसकी माँ इस दुनिया को छोड़कर चली गई। उस दिन के बाद घर में बस तीन ही लोग रह गए पिता, बड़ा भाई सतीश और नन्ही सपना। दिन भर सपना और सतीश घर के अंदर ताले में बंद रहते। पिता रोज़ी-रोटी के लिए सुबह निकल जाते और शाम को लौटते। जैसे ही दरवाज़े की कुंडी खड़कती, दोनों बच्चों का दिल खुशी से झूम उठता। उनके लिए वही पल पूरे दिन का सबसे खूबसूरत समय होता था। पिता थके होते, पर बच्चों को देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती। मगर सपना के दिल में एक खालीपन था, जो हर दिन थोड़ा और गहरा हो जाता। जब वह गली में दूसरी माँओं को अपने बच्चों को गोद में उठाकर दुलारते देखती,
उनके लिए खिलौने लाते देखती, कभी प्यार से समझाते तो कभी हल्की-सी डांट लगाते देखती तो उसकी आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगती। वह मन ही मन सोचती काश, मेरी भी माँ होती, मैं भी उनसे जिद करती फिर वो मुझे मनातीं, दुलारतीं, और डांटकर समझातीं। हालाँकि उसके पिता और भाई उसका पूरा ख्याल रखते थे, पर माँ का स्पर्श कुछ और ही होता है। सतीश बहुत समझदार था। वह छोटी-सी उम्र में ही बहन के चेहरे के भाव पढ़ लेता। जब भी सपना उदास होती, वह उसे कहानियाँ सुनाता, कागज़ के खिलौने बनाकर देता और कहता मैं हूँ ना तेरे साथ।
समय बीतता गया। कुछ सालों बाद पिता ने सतीश की शादी कर दी। जब सपना ने यह सुना, तो उसके मन में डर बैठ गया। अब मैं भाभी के लिए बोझ बन जाऊँगी, यह सोचकर वह कई रातें रोई। लेकिन उसकी सोच गलत साबित हुई।
उसकी भाभी कमला सच में लाखों में एक थी। घर में कदम रखते ही उसने सपना को गले लगा लिया। उस गले मिलने में अपनापन था, ममता थी, और एक अनकहा वादा भी कि अब उसे माँ की कमी नहीं खलेगी। कमला सपना को बेटी की तरह प्यार करती। उसके साथ बैठकर घंटों बातें करती, समझाती, हँसती। दोनों साथ बाज़ार जातीं, साथ खाना बनातीं, और छोटे-छोटे राज़ साझा करतीं।

धीरे-धीरे सपना के दिल का खालीपन भरने लगा। अब जब वह किसी माँ को अपने बच्चे को दुलारते देखती, तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती, क्योंकि उसे पता था उसकी ज़िंदगी में भी एक माँ है। कुछ समय बाद घर में नन्ही किलकारियाँ गूँजने लगीं। सतीश और कमला के बच्चे हुए। सपना ने उन बच्चों पर वही प्यार लुटाया, जो उसे अपनी भाभी से मिला था। बच्चे भी अपनी बुआ को बहुत मानते थे। उनके लिए बुआ ही सबसे अच्छी दोस्त थी। कमला के बच्चे उसे कई बार मज़ाक में माँ कह देते, और वह हँस देती।
समय पंख लगाकर उड़ता रहा। अब सपना की शादी तय हो चुकी थी। घर में खुशियों और हल्की-सी उदासी का माहौल था। विदाई का दिन आया। आँखें नम थीं, दिल भारी था। सबसे पहले सपना ने अपनी भाभी को गले लगाया।

वह गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़ी। फिर उसने धीरे से उनके कान में पहली बार एक शब्द कहा भाभी माँ आप अपना ख्याल रखना और मुझे हमेशा याद करते रहना।
कमला के बच्चे उसे हमेशा माँ कहकर ही बुलाते थे, लेकिन आज जब सपना ने उन्हें माँ कहा, तो कमला का दिल भर आया। आँखों से आँसू थम ही नहीं रहे थे। उस एक शब्द में वर्षों की कमी, तड़प, प्यार और अपनापन समाया था।
कमला ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए मन ही मन दुआ की हे भगवान, मेरी इस बेटी को उसके ससुराल में भी माँ का भरपूर प्यार मिले।
डोली आगे बढ़ गई, लेकिन पीछे रह गया एक रिश्ता जो खून का नहीं था, पर दिल से बना था, और सच तो यह है, माँ हमेशा जन्म देने वाली ही नहीं होती। कभी-कभी माँ वह होती है, जो टूटे दिल को सहला कर फिर से जीना सिखा दे।
