Hindi Funny Story: बात लगभग 51-52 वर्ष पुरानी है। तब मेरी उम्र 7 या 8 वर्ष रही होगी। खुर्जा उत्तर प्रदेश में बुआ की ननद की शादी में हम लोग सपरिवार गए हुए थे।
शादी हवेलीनुमा धर्मशाला में थी,जिसकी तीन मंजिल थी। शादी की सभी रस्में बहुत हर्षौल्लास से हो रही थीं। जूता चुराई के लिए कोई छोटी बहन नहीं थी,इसलिए शायद वर पक्ष लापरवाह था और जूते खुले में उतार दिए थे। मैंने जूते उठाकर तीसरी मंजिल के एक खुले दिखे कमरे में रख दिए ।मन में चुराई से मिले पैसों का इतना लोभ नहीं था,बस क्रेज था जूते चुराए।
खैर,शादी संपन्न हुई, विदाई की बेला आई तो दूल्हे के जूतों की खोज हुई। मैंने कहा जूता चुराई नेग मिले तो जूते मिले।थोड़ी सी तकरार के बाद मामला सैट हो गया। नेग लेकर जिस विश्वास के साथ ऊपर गई उतनी ही मायूसी से लौट आई। उस कमरे में तो ताला लगा था।पूछने पर पता चला कि वहां तो कॉलेज के बच्चे किराए से रहते हैं वह लड़का तीन दिन की छुट्टी है सो अपने गांव बुलंदशहर चला गया। उस वक्त फोन की सुविधा तो थी नहीं। बेचारे दूल्हे को किसी और की चप्पल पहनकर विदा होना पड़ा,इस वादे के साथ कि लड़के के आते ही जूते भिजवा दिए जाएंगे।
सारे बारातियों के सामने मम्मी ने गुस्से में पिटाई करते हुए कहा, “किसने कहा था दादी बनने को?” मतलब इज्जत का पूरा फालूदा ।तब से कान पकड़ लिए कभी दादी नहीं बनूंगी, किसी की शादी में जूते नहीं चुराऊंगी।
