An actress dressed as Goddess Ganga, wearing a white traditional outfit with heavy jewelry, long flowing hair, and a maang tikka, seen on set.
Kirti Choudhary enters Ganesh Kartikey as Ganga

Summary: कीर्ति चौधरी बनीं गंगा: गणेश कार्तिकेय में त्याग और प्रेम की दिल छू लेने वाली कहानी

गंगा का निस्वार्थ प्रेम और त्याग इस कहानी को गहराई से भावुक बना देता है, जहां वह अपनी चाहत से ऊपर उठकर बहन की नियति को चुनती हैं। इसी बीच पार्वती अपने दिव्य मिलन की ओर बढ़ती हैं, जबकि तारकासुर उनकी भक्ति और साहस की परीक्षा लेता रहता है।

Ganesh Kartikeya Serial: सोनी सब का शो गणेश कार्तिकेय भक्ति, परिवार और दिव्य रिश्तों की अनमोल कहानियों को शिव परिवार की यात्रा के ज़रिए जीवंत करता है। मौजूदा ट्रैक में कहानी देवी पार्वती (श्रेनु पारिख) पर केंद्रित है, जो अपनी असली पहचान – देवी सती के पुनर्जन्म – को जानती हैं और महादेव (अविनेश रेखी) के साथ अपने नियति-निर्धारित मिलन की ओर बढ़ती हैं। इसी बीच तारकासुर (आमिर दलवी) लगातार उनके मार्ग में बाधाएँ डालता है और उनकी भक्ति व शक्ति की परीक्षा लेता है। इस भावनात्मक सफर में एक नया रंग जोड़ती हैं गंगा, देवी पार्वती की बड़ी बहन, जिनका किरदार निभा रही हैं कीर्ति चौधरी। गंगा के निजी भाव महादेव के प्रति हैं, जो कहानी में दिल को छू लेने वाला संघर्ष लेकर आते हैं।

देवी पार्वती की बड़ी बहन के रूप में गंगा को बेहद सजीली, करुणामयी और गहरी भक्ति से भरी हुई दिखाया गया है। वह महादेव से विवाह का सपना देखती हैं, लेकिन जब उन्हें पार्वती के पिछले जन्म और उनके दिव्य संबंध के बारे में पता चलता है, तो उनकी दुनिया बदल जाती है। गंगा अपने मन की चाहत से ऊपर उठकर प्रेम को चुनती हैं और अपनी बहन की नियति के लिए चुपचाप पीछे हट जाती हैं। त्याग और आत्मबल से भरी यह यात्रा दर्शकों को भावुक कर देती है। इसी दौरान तारकासुर पार्वती के मार्ग में रुकावटें डालता रहता है और उनके साहस व भक्ति की परीक्षा लेता है, जबकि पार्वती महादेव के साथ अपने मिलन के और करीब आती हैं।

अपने किरदार के बारे में बात करते हुए कीर्ति चौधरी ने कहा, “मुझे याद है पहला सीन जब गंगा को एहसास होता है कि देवी पार्वती और भगवान शिव एक-दूसरे के लिए बने हैं। उस पल में उसे अपने सारे भाव दबाने पड़ते हैं। वह दिन मेरे लिए खास था क्योंकि यह सीन ज़्यादा नाटकीय अभिव्यक्ति का नहीं था, बल्कि उन भावनाओं का था जिन्हें आप कह नहीं पाते। हमने कई टेक किए और हर बार मेरे गले में एक अटकन सी महसूस हुई, सोचकर कि किसी ऐसी चीज़ को छोड़ना कितना कठिन होता है जिसे आप सच्चे दिल से चाहते हैं। गंगा का प्रेम पवित्र है, लेकिन उसकी ताकत इस बात में है कि वह गरिमा के साथ पीछे हट जाती है। यही भावनात्मक संतुलन इस सफर को मेरे लिए खास बना गया।”

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सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...