Tiger crossing a dirt road during safari with a jeep and tourists watching from behind in the forest.
Tiger crossing a dirt road during safari with a jeep and tourists watching from behind in the forest.

Summary: विंध्य और अरावली पहाड़ियों में देखिए जैवविविधता

विंध्य और अरावली पहाड़ियों की तलहटी में बसे रणथंभौर को यहाँ मौजूद बाघों, वनस्पतियों और जीवों की विविधता के लिए जाना-जाता है।

Ranthambore National Park: राजस्थान में स्थित रणथंभौर नेशनल पार्क देश के सबसे अच्छे बाघ अभ्यारण्यों में से एक है जिसकी वजह से इस जगह पर हर दिन हज़ारों सैलानी आते हैं और रणथंभौर की समृद्ध विरासत को देखना पसंद करते हैं। विंध्य और अरावली पहाड़ियों की तलहटी में बसे रणथंभौर को यहाँ मौजूद बाघों, वनस्पतियों और जीवों की विविधता के लिए जाना-जाता है। कहा जाता है कि इस अभ्यारण में बाघ को देखने की संभावना भारत के दूसरे बाघ अभ्यारण्यों की तुलना में काफी ज्यादा होती है। रणथंभौर नेशनल पार्क की जैव विविधता का कोई जवाब नहीं। 

रणथंभौर किले और आसपास की पहाड़ियों व घाटियों के साथ मिलकर जो दृश्य उत्पन्न होता है वह रणथंभौर उद्यान को एक समृद्ध पर्यटन स्थल बनाने का का कार्य करता है। 392 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह नेशनल पार्क विभिन्न सैकड़ों देशी विदेशी प्रजातियों के लिए एक प्राकृतिक आवास की जगह है। सैलानी इस पार्क की सैर के दौरान यहाँ मौजूद जीव-जंतुओं और उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। 

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान का इतिहास 

रणथंभौर नेशनल पार्क का इतिहास 1955 से शुरू होता है जब इसे भारत सरकार ने सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था। अठारह साल बाद यानि कि 1973 में इस पार्क को ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ रिजर्व घोषित किया गया और 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान बनाया गया। फिर साल 1991 यह पार्क केलादेवी अभयारण्य और सवाई मान सिंह अभयारण्य राष्ट्रीय उद्यान का हिस्सा बन गया। रणथंभौर नेशनल पार्क का नाम देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में शामिल है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान का नाम रणथंभौर किले के नाम पर रखा गया है और यह उत्तर में बनास नदी और दक्षिण में चंबल नदी से घिरा हुआ है।

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में वनस्पति 

Tourists booking a safari online on a laptop and phone near the Ranthambore safari office with jeeps in the background.
Tourists booking a safari online on a laptop and phone near the Ranthambore safari office with jeeps in the background.

एक वन्यजीव प्रेमी के रूप में रणथंभौर नेशनल पार्क की यात्रा करना आपको रोमांच से भर देगा और आपकी यह यात्रा हमेशा हमेशा के लिए यादगार बन जाएगी। इस पार्क में भारी संख्या में वन्यजीव पाए जाते हैं। इस पार्क में जानवरों, पक्षियों, सरीसृपों, उभयचरों, वनस्पतियों और जीवों की कई विदेशी प्रजातियों के साथ दिव्य बाघों की प्रजाति भी पाई जाती है। इस पार्क में सरीसृपों, स्तनधारियों और पक्षियों की बड़ी संख्या पाई जाती हैं। इस जगह पर बर्ड वाचिंग के लिए लोग दूर दूर से आते हैं। बाघों के अलावा रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में तेंदुए, कैराकल, मछली पकड़ने वाली बिल्लियां और जंगली बिल्लियां पायी जाती हैं।

रणथंभौर नेशनल पार्क में जंगल सफारी 

रणथंभौर नेशनल पार्क में सफ़ारी करने का भी विकल्प मौजूद है। यदि आप एक अपनी यात्रा को मस्ती से भरी एडवेंचर यात्रा बनाने चाहते हैं तो आपको रणथंभौर जंगल सफारी करना चाहिये। यह जंगल सफ़ारी आपको इस जगह की विविधता को देखने समझने का भरपूर मौक़ा देगी और आपकी यात्रा को रोमांच से भर देगी। जंगल सफारी के लिए जिप्सी, एसयूवी और कैंटर बुक करने की सुविधा यहाँ पर मौजूद है। सफारी के दौरान हर वाहन में ड्राईवर के अलावा एक गाइड होता है जो आपको इस जगह के बारे में जानकारी देता है। 

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान सफारी बुकिंग 

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान की सैर करने के दौरान अगर आपकी जंगल सफारी करने की चाह है तो आपको पहले से इसे ऑनलाइन बुक कर लेना चाहिए। इससे यात्रा के दौरान आपका समय बचेगा और आप होने वाली परेशानी से भी बच जाएँगे। अगर किसी वजह से ऑनलाइन नहीं बुकिंग हो पाती है तो जिस जगह पर आप रुके हुए हैं वहाँ के होटेल से आप सम्पर्क कर सकते हैं। यह होटेल भी बुकिंग करने में आपकी मदद कर देते हैं। ऐसा भी नहीं हो तो एक दो घंटे पहले बुकिंग कार्यालय पहुंच जायें। 

राजीव गांधी राष्ट्रीय संग्रहालय

राजीव गांधी राष्ट्रीय संग्रहालय रणथंभौर की सबसे ख़ास जगहों में शुमार की जाती है। यह भारत के प्राकृतिक इतिहास का चौथा क्षेत्रीय संग्रहालय है। इस लिहाज़ से इस जगह का महत्व का बढ़ जाता है। संग्रहालय का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण को लेकर जागरूकता पैदा करना है। इस संग्रहालय में कई दुर्लभ पौधों, जानवरों और भूविज्ञान से जुड़ी चीज़ों को प्रदर्शित किया गया है। इस संग्रहालय के कुछ सीमित हिस्सों तक ही पर्यटकों को जाने की अनुमति है। इस जगह पर राजस्थान की जैव विविधता की प्रदर्शिनी लगी हुई है जिसमें यहाँ के वनों और वन्यजीवों को आप देख सकते हैं।

रणथंभौर में घूमने की जगहें 

रणथंभौर देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। इस जगह पर घूमने और देखने के लिए काफ़ी कुछ है। बावजूद इसके कई जगहें बेहद ही ख़ास हैं, जहां आपको जाना ही जाना चाहिये। जैसे की रणथंभौर किला, गणेश त्रिनेत्र मंदिर, जोगी महल, पदम झील और सुरवल झील आदि। यह सभी पर्यटन स्थल बहुत ही अच्छे हैं और आपको सुखद अहसास करायेंगे। इन सब जगहों पर जाकर आपको इस जगह के सांस्कृतिक, एतिहासिक और प्राकृतिक महत्व को समझने में आसानी होगी। 

Tiger resting near a safari jeep by a lake with Ranthambore Fort at sunset in Ranthambore National Park, Rajasthan.
Tiger resting near a safari jeep by a lake with Ranthambore Fort at sunset in Ranthambore National Park, Rajasthan.

यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय 

हर पार्क की तरह रणथंभौर नेशनल पार्क भी अक्टूबर से लेकर जून तक खुला रहता है। इस जगह पर जाने का सबसे अच्छा समय सर्दियों का माना जाता है और अक्टूबर से दिसंबर महीने में सबसे ज़्यादा लोग यात्रा करते हैं। आपके लिए रणथंभौर की यात्रा अक्टूबर से अप्रैल तक अनुकूल रहेगी। गर्मी के मौसम में वातावरण काफी गर्म होता है जिसकी वजह से लोग कम आते हैं लेकिन इस दौरान बाघों के स्पॉटिंग की संभावना बढ़ जाती है। मानसून के के मौसम में यह जगह और भी ख़ूबसूरत हो जाती है पर इस दौरान यह पार्क बंद रहता है।

रणथंभौर नेशनल पार्क कैसे पहुंचे 

रणथंभौर जाने के लिए सभी तरह के परिवहन की सुविधा मौजूद है। अगर आप हवाई जहाज से रणथंभौर नेशनल पार्क की यात्रा करना चाहते हैं तो बता दें कि इसका निकटतम हवाई अड्डा जयपुर है जो पार्क से सिर्फ 180 किमी दूर स्थित है। रेल द्वारा रणथंभौर नेशनल पार्क की यात्रा करने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर है जो पार्क से बिल्कुल ही पास है। अगर आप सड़क मार्ग से रणथंभौर नेशनल पार्क जाने की योजना बना रहे हैं तो बता दे कि देश की सभी महत्वपूर्ण मार्गों से जुड़ा हुआ है और सवाई माधोपुर से सिर्फ 11 किमी की दूरी पर स्थित है। 

रणथंभौर में ठहरने की सुविधा 

रणथंभौर में ठहरने के लिए आपको हर तरह की सुविधा मिल जायेगी। आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार होटेल, रिज़ॉर्ट आदि बुक कर सकते हैं। सामान्यतौर पर होटेल का किराया यहाँ पर एक हज़ार से शुरू हो जाता है। खानपान के लिए इस जगह पर आपको रेस्टोरेंट आदि की भी सुविधा आसानी से मिल जाती है। घूमने के साथ साथ राजस्थानी खानपान आपकी यात्रा के स्वाद को और भी ज़्यादा बढ़ा देगा। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...

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