Wealth and Prosperity: हमारे यहां कई ऐसी वस्तुएं प्रचलित हैं, जिनका प्रयोग घर में सुख-समृद्धि बढ़ाने के लिए किया जाता है। इन वस्तुओं के प्रयोग से आप कई समस्याओं का भी निवारण कर सकते हैं। आइये, जानते हैं कुछ ऐसी ही उपयोगी वस्तुओं के बारे में।
पारद शिवलिंग
सैकड़ों गऊओं के दान, हजारों स्वर्ण मुद्राओं के दान तथा काशी तीर्थों के स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह फल मनुष्य को इसके दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। शास्त्रकारों ने इसे साक्षात्ï शिव माना है। भगवान शंकर स्वयं भगवती से कहते हैं कि जो मनुष्य पारद शिवलिंग का नित्य पूजन करते हैं उनके घर में कभी दरिद्रता नहीं आती और न ही जीवन में उसे मृत्यु का भय रहता है। वह जीवन में यश, सम्मान, पद, प्रतिष्ठा, पुत्र, विद्या आदि में पूर्णता प्राप्त करते हुए अंत में मुक्ति को प्राप्त होता है।
पारद गोली
उन लोगों के लिए जो भूत-प्रेत बाधा के कारण परेशान हैं, जिन्हें बुरी आत्माएं तंग करती हैं। उन्हें यह गले में लॉकेट की तरह धारण करना चाहिए। जोड़ों आदि के दर्द निवारण के लिए भी यह उपयोगी है।
नवरत्न
इसे किसी भी राशि वाला धारण कर सकता है। जिन व्यक्तियों के पास जन्म कुंडली नहीं है या जिनके लिए रत्नों का निर्धारण करना कठिन होता है, उसके लिए नवरत्न अंगूठी, माला, पैंडल, बाजूबंद या कड़ा धारण करना श्रेयस्कर होता है। इससे नवग्रह शांत होकर शुभ फल देते हैं व धारक को सुख-सम्पदा, यश, मान, प्रतिष्ठïा, धन, सौभाग्य, पारिवारिक सुख व मानसिक शांति प्रदान करते हैं। अनिष्टïों का अंत होता है, रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही नवरत्न इकट्ïठे धारण करने से नीलम आदि रत्न भी अपना दुष्प्रभाव न दिखाकर धारक को लाभ ही प्रदान करते हैं।
श्री यंत्र
श्री का अर्थ है लक्ष्मी। ऐसी मान्यता है कि श्री यंत्र को घर, दुकान, पूजा-स्थान, तिजोरी, गल्ले आदि में रखकर इसकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को धन-धान्य की कमी नहीं रहती, बल्कि धन-धान्य, सुख-सम्पत्ति आदि हर वस्तु में कई गुना की वृद्धि होती है।
मेरु श्री यंत्र
अष्ट धातु या स्फटिक शिला पर खोदकर बारीकी से काटकर बनाए गए मेरु आकार (कछुए की पीठ पर) में श्री यंत्र गृहस्थ के लिए धन संबंधी भाग्योदय के लिए सबसे उत्तम व श्रेष्ठ माना गया है।
रत्नों का पेड़
रत्नों के पेड़ घर या ऑफिस में रखने से वे उन्हें नकारात्मक ऊर्जा से बचाकर सकारात्मक ऊर्जा से भरते हैं। वहां की सुख-समृद्धि व शांति में वृद्धि करते हैं। ये नजर, जादू-टोना, भूत-प्रेत इत्यादि दुष्प्रभावों से बचाता है।
स्फटिक शिवलिंग

भगवान राम ने रामेश्वर धाम में इसकी स्थापना की थी। इसके पूजन से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामना पूर्ण करते हैं।
पिरामिड

पिरामिड अत्यधिक प्रभावशाली ऊर्जा स्रोत माने जाते हैं। स्फटिक व अष्टïधातु से निर्मित पिरामिड को घर, ऑफिस, फैक्टरी आदि में स्थापित करने से ये वहां की सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ाते हैं, जिससे मानसिक कार्यक्षमता में कई गुना वृद्धि होती है। ये वहां की शांति, धन, धान्य, सुख-समृद्धि बढ़ाते हैं। आधुनिक समय में 65 प्रतिशत भवनों में वास्तु दोष व्याप्त है, जिससे व्यक्ति के जीवन में रोग, क्लेश, तनाव, दरिद्रता व शत्रुता उत्पन्न होती है। पिरामिडों को वास्तु दोष निवारण का अचूक उपाय माना जाता है।
श्री शालीग्राम जी
इसमें भगवान विष्णु के चक्र के विभिन्न चिह्ïन पाए जाते हैं। यह स्वयं भगवान नारायण की प्रतीक शिला मानी जाती है। इसके पूजन से सुख-समृद्धि व मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इसकी प्रतिदिन पूजा करने से मनुष्य सीधा बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है। सत्यनारायण भगवान की कथा व पूजन इसके बिना अधूरी मानी जाती है। नव विवाहित जोड़े को यदि शालीग्राम भेंट किया जाए और वह उसकी पूजा करे तो वैवाहिक जीवन सुख-शांति पूर्वक व्यतीत होता है।
वामवर्ती शंख
यह ध्वनि करने के काम आते हैं। शंख ध्वनि के बिना कोई पूजा संपन्न नहीं मानी जाती। जहां तक शंख की आवाज जाती है वहां तक भूत-पिशाच आदि का भय नहीं रहता, वातावरण नव चेतना से भर जाता है। इससे फेफड़ों व श्वास का व्यायाम होता है जिससे शरीर निरोग रहता है व हृदय रोग कभी नहीं होता। यह ओज, तेज व शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है।
दक्षिणावर्ती शंख
इसे लक्ष्मी जी का भाई माना जाता है। ये शंख निश्चय ही धन प्रदाय व समृद्धिकारी होते हैं। ये पूजा के काम आते हैं। इनमें जल भरकर सूर्यादि देवताओं को अर्घ्य दिया जाता है। जिस घर में इनकी पूजा की जाती है वहां लक्ष्मी का सदा वास रहता है। जो लोग दरिद्रता के कारण दु:खी हैं उन्हें इसे अवश्य प्राप्त कर लेना चाहिए।
हाथी जोड़ी
यह बहुत ही शक्तिशाली व प्रभावशाली वस्तु है। यह एक जंगली पौधे की जड़ होती है। मुकदमा, शत्रु संघर्ष, दरिद्रता व दुर्घटना आदि के निवारण में इस जितनी चमत्कारिक वस्तु आज तक देखने में नहीं आई। इसमें वशीकरण की भी अद्भुत शक्ति है। इससे भूत-प्रेत आदि का भय नहीं रहता। यदि इसे तांत्रिक विधि से सिद्ध कर दिया जाए तो साधक निश्चित रूप से चामुंडा देवी का कृपा पात्र हो जाता है। ये जिसके पास होती है उसे हर कार्य में सफलता मिलती है। धन-संपत्ति देने में यह बहुत चमत्कारी साबित हुई है। तांत्रिक वस्तुओं में यह महत्त्वपूर्ण है।
शनि का छल्ला
यह शनिदेव के प्रकोप को शांत करने व उनकी कृपा दृष्टिï पाने के लिए मध्यमा उंगली में शनिवार को धारण किया जाता है।
मोतीशंख
यह एक दुर्लभ व अत्यंत महत्त्वपूर्ण चमत्कारिक शंख है। इसे दरिद्रता निवारक भी कहा जाता है। इसे दुकान के गल्ले में रखने से व्यापार में बेतहाशा वृद्धि होती है।

