Hindi Funny Story: एक दिन स्कूल में “स्पीच प्रतियोगिता” थी। मैं पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच पर पहुँची। हाथ में क्यू कार्ड, चेहरे पर मुस्कान और दिल में जोश। मैंने सोचा – आज तो सबको अपने शब्दों से मंत्रमुग्ध कर दूँगी।
जैसे ही मैंने बोलना शुरू किया, सामने बैठे बच्चों ने तालियाँ बजाईं। मैं और भी उत्साहित हो गई। लेकिन तभी अचानक मेरी जुबान फिसल गई। मैंने “भारत माता की जय” बोलना चाहा, पर निकला – “भारत मटर की जय!”
पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। बच्चे हँसते-हँसते कुर्सियों से गिरने लगे, और अध्यापक भी मुस्कान दबा नहीं पाए। मैं वहीं खड़ी थी, माइक पकड़े, और महसूस कर रही थी कि मेरे गाल टमाटर जैसे लाल हो गए हैं।
मैंने सोचा कि अब तो माहौल संभालना पड़ेगा। तो मैंने तुरंत कहा -“वैसे मटर भी कमाल की चीज़ है, बिना मटर की सब्ज़ी तो जैसे बिना तालियों की स्पीच!”
अब तो बच्चे और भी जोर से हँसने लगे। मैंने फिर कोशिश की – “भारत माता की जय!” लेकिन सामने से एक बच्चा चिल्लाया – “मैडम, मटर की सब्ज़ी फ्री में मिलेगी क्या?” पूरा हॉल हँसी से गूंज उठा।
स्पीच खत्म होने पर प्रिंसिपल ने कहा – “आज से हमारी स्कूल कैंटीन का नया नारा होगा – ‘भारत मटर की जय, और आलू की भी जय!'” अब तो अध्यापक भी हँसी रोक नहीं पाए।
बाद में जब मैं क्लास में गई, तो बच्चों ने मुझे नया नाम दे दिया – “मटर मैडम”। और सोचिए, जब भी कोई बच्चा मटर की सब्ज़ी लंच में लाता, वो मुझे गर्व से दिखाता – “मैडम, देखिए, आपके नाम की सब्ज़ी!”
अब तो माहौल ऐसा हो गया कि मेरी स्पीच से ज़्यादा मज़ा बच्चों को मेरी गलती में आने लगा। उस समय मुझे लगा था कि अगर ज़मीन फट जाए तो मैं उसमें समा जाऊँ। लेकिन साथ ही दिल में ये भी था कि आज मैंने सबको हँसाया है।
आज भी जब कोई “मटर” का ज़िक्र करता है, तो मुझे वही मंच, वही तालियाँ और वही लाल गाल याद आ जाते हैं। और मैं सोचती हूँ – हाय, मैं शर्म से लाल हुई… लेकिन कितना प्यारा और मजेदार पल था वो!
भारत मटर की जय—हाय मैं शर्म से लाल हुई
