ये किस्सा है बरसाने का, जहां की सिर्फ राधा रानी ही प्रसिद्ध नही हैं, इस गांव का तो बच्चा बच्चा तक ऊधम और शैतानी की पोटली लेकर पैदा होता है और बढ़ते-बढ़ते पोटली इतनी बड़ी हो जाती है कि इंसान तो क्या हाथी भी छोटा लगे। असल बात तो ये है कि इस गांव की आबोहवा में ही राधा-कृष्ण की शरारतों की महक बसी है, सो यहां के बूढ़े, बच्चे, औरतें सब एक से बढ़कर एक हैं।
अब सोचो, ऐसे बरसाने में यदि बारात आएगी तो क्या होगा? जब हमारा बरसाना खास है तो वहां बारात की खातिरदारी भी खास ही होगी और ऐसे में बारात में कोई चौधरी आ जाये तो उसका जो हाल होगा, वो तो हम और आप सोच भी नहीं सकते। अब आप लोग ये मत समझ लेना कि मैं अपने ताऊ वाले चौधरी की बात कर रही हूं… ना भाई, मेरी क्या मजाल लट्ठ से पिटना है क्या? वैसे भी ताऊ के लट्ठ और बरसाने की औरतों के लट्ठ से तो भगवान बचाऐ।
हां तो मैं चौधरी की बात कर रही थी। अरे, वही वाले जिनका काम हर बात में मीनमेख निकालने का होता है और हम गुस्से में कहते हैं ‘तू ज्यादा चौधरी बन रहा है? कहीं-कहीं इनको उंगली बाज भी कहते हैं पर हमारे बृज में तो इनको बबरपंच कहते हैं? इनका वही हाल है जिनको घर में नहीं है मान वो कुरता पहन के बन जाएं श्रीमान, भले ही खुद के घर में इनकी कानी कौड़ी इज्जत ना हो, पर बाहर चाहे किसी की मौत हो या शादी ये अपना ज्ञान बघारने से बिलकुल भी नही चूकते ‘साफा ऐसे नहीं बंधेगा… तिलक ऐसे लगेगा… कुर्ता का ये रंग कौन लाया? आदि आदि… ये हर काम में ऐसी चौधराहट दिखाते हैं कि थोड़ी देर में ही घर वाले भी बाहर वाले से लगने लगते हैं।
हमारी ये बारात दिल्ली से आई थी सो चौधरी के तेवर में अंग्रेजियत की बू भी आ रही थी जैसे ही द्वारचार की रस्म शुरू हुई, चौधरी साब ने अपने रंग दिखाने शुरू किये, हर बात में कमी निकालना और टांग अड़ाना शुरू कर दिया। लड़के के पिता ने चुप कराने की कोशिश की तो और तन गए ‘अजी साब आपके तो पहलौठी के लड़के की शादी है, हम तो अनगिनत करा चुके हैं, हमारे बराबर समझ नही हैं तुममे, तुम तो चुप ही रहो?
खैर, जैसे तैसे वहां से अन्दर गए तो पत्तल पर खाना देख कर बिदक गए ‘ये क्या गंवारु सा इंतजाम किया है, आजकल सब बफे भोज करवाते हैं और तुम लोगों से एक ढंग की बारात भी नहीं खिलाई जा रही। जैसे तैसे सबने मिलकर उन्हें मना मनु के खाने को राजी किया तो बाकी व्यवस्था की कमियां खोजने लगे। ये अपने कमी निकालने और ज्ञान बांटने के कार्यक्रम में दिलोजान से लगे हुए थे और आखिर उस जगह जा पहुंचे जहां शादी की रस्में चल रही थी।
अपनी आदत के अनुसार वहां भी चौधराहट दिखाने लगे, ये तो अपनी आदत से मजबूर थे पर इतना दिमाग नहीं लगाया कि बृज की शादियों में औरतें आदमियों की क्या गत बनाती हैं? और बरसाने की औरतें तो ऐसा हाल करती हैं कि अच्छे अच्छों की टें बोल जाए और अब ये उन सब खुराफाती औरतों के निशाने पर आ चुके थे। ये अपनी चौधराहट छांटने में लगे थे और किसी ने इनके पीछे कुरते से पूड़ी लटका दी। अब चौधरी साब जिधर जाएं, सब इन्हें छेडऩे लगे, औरतें गीत और गालियां गाने लगी और हंसी उड़ाने लगी, ‘क्यों पेट ना भरो का जो पूरी चुरानी पड़ी अरे पूड़ी पीछे क्यों लटका राखी है। कहो तो खाना लाकर पेट से बांध दें।और सब जोर जोर से हंसने लगी।
बेचारे चौधरी साब को समझ आया तो पूडी निकाल कर चुपचाप एक जगह बैठ गए। बैठ तो गए पर दुल्हे के जूते भी खुद ही संभाल के बैठ गए वो भी एकदम चौकन्ने होकर। सारी लड़कियां परेशान हो गयी… आपस में कहने लगीं, ‘अब जा बबरपंच कौ क्या करें? जूता कैसे चुरामें। जा खडूस की वजह से जूता चुराई कौ नेग भी मारो जायगा। फिर सबकी सब मिलकर यही शिकायत लेकर अपनी मम्मी चाची के पास गयीं कि वाही कोई युक्ति बताएं, कुछ कानाफूंसी हुई, ऐसे इशारे हुए मानो प्लान चौधरी हराओ तैयार हो गया हो।
चौधरी जी भी पूरी मुस्तैदी से जूतों के ऊपर ही बैठ गए थे। अचानक किसी लुगाई ने हल्दी सने दोनों हाथ पूरी दम लगाकर चौधरी साब की पीठ पे धप्प से छाप दिए…, बेचारे मुंह के बल आगे जाके गिरे… पर ये क्या? बेचारे पूरी तरह संभल कर बैठ भी नहीं पाए, मामले को समझने की कोशिश ही शुरू की थी कि अचानक खूब सारे लड़की लड़कों ने उन्हें ऐसे घेरा मानो चौधरी जी ने मधुमखियों का छत्ता तोड़ दिया हो और गुस्से में सारी मधुमक्खी उनसे चिपट गई हों।किसी ने उनकी टांग पकड़ कर खींची तो किसी ने हाथ और बुरी तरह घसीट डाला। बेचारे की धोती कहीं लंगोटी कहीं वाली स्थिति हो गई थी।
जब तक संभले दूल्हे के तो छोड़ो इनके भी जूते गायब हो चुके थे। पर हमारे चौधरी भी सच्चे सिपाही की तरह तुरंत संभले और दोबारा युद्ध की घोषणा करने को तैयार हो गए। सीधे लड़की के पिता के पास जाकर गुस्से में और ज्यादा कमियां बताने लगे, आखिर आदत से मजबूर जो थे, ‘बताओ ये कोई इंतजाम है? यहां तौ नाच गाने का भी कुछ इंतजाम नही किया ये शादी का घर है मातम का? जो गाने तक नहीं बज रहे और आपके यहां और ऐसे शैतान बच्चे हैं, हमारी इतनी बेइज्जती कर दी। अब हम नहीं रुकेंगे हम तो जा रहे हैं। वो चलने लगे शादी घर में हंगामा सा हो गया था, आखिर वो दूल्हे के फूफा जो थे, वो रूठ गए तो सब गड़बड़ हो जायगा, ये सोचकर सब मिलकर उन्हें मनाने लगे हाथ जोड़े माफियां मांगी, तब कहीं जाकर बड़ी मुश्किल से माने। सब बच्चों पर डांट पड़ी सो अलग। सब उदास थे और चौधरी साब विजयी मुस्कान लिए और चौड़े होकर बैठ गए।
सब लोग समझ गए कि ये सब नाटक अपनी अहमियत दिखाने को किया गया था। खैर आगे की रस्में शुरू भई, चौधरी साब अकड़ के भले ही बैठे थे, पर इस बात से अनभिज्ञ थे कि सारी औरतें अब घायल शेरनी सी लग रही थीं। आखिर इनकी वजह से उनके बच्चों पर डांट जो पड़ी थी। उनके दिमाग में नई तरकीबें चल रही थी। थोड़ी देर तक माहौल एकदम शांत रहा ऐसा लगा मानो तूफान से पहले की शांति हो।
अब चौधरी साब की खातिरदारी का विशेष ध्यान रखा जाने लगा। उनको खूब मनुहार कर करके खूब खिलाया पिलाया जा रहा था, जिसका असर थोड़ी ही देर में ही हो गया। अचानक चौधरी साब के पेट में गुडगुड टाइप आवाजें आने लगी… उन्होंने बाथरूम का रास्ता पूछा? एक बच्चा उनको घर के पीछे थोड़ी दूर खेत की तरफ सन्नाटे में ले गया। जहां एक कमरे के अन्दर जाकर दरवाजे की तरफ इशारा कर दिया। अब जैसे ही चौधरी साब अन्दर गए… बच्चा आगे से कुण्डी बंद करके भाग गया। बेचारे चौधरी साहब जो करने आये वो भूल भाल कर परेशान हो गए… नई जगह चारों तरफ अंधेरा… चिल्लाने से भी कोई सुनेगा नहीं, खुद ही तो जोर-जोर से डेक पर गाने चलवा कर आये थे। जैसे तैसे अंधेरे में अपना काम निपटाया और बाहर निकलने का रास्ता सोचने लगे। थोड़ी देर ही बीती थी कि कुण्डी खुलने की आवाज आई और किसी ने हाथ पकड़ कर उन्हें बाहर खींच लिया। किसी ने लाईट जलाई रौशनी हुई तो चौधरी साब ने एक कमरे में खुद को औरतों और बच्चों से घिरा पाया।
अभी कुछ समझ पाते…, तब तक तीन चार औरतों ने पकड़ कर उनका श्रृंगार करना शुरू कर दिया, आंखों में कजरा… माथे पर बिंदिया, लिपस्टिक और लहंगा ओढनी, बेचारे चौधरी जी सारी चौधराहट भूल कर अपनी जान बचाने के कमरे में इधर-उधर भाग रहे थे पर जाते कहां, बच्चे और औरतों ने चारों तरफ से घेर रखा था और सब जोर-जोर से हंस रहे और बोल रहे थे ‘बड़ो चौधरी बनबे कौ शौक है नाए, अब हम बतांगे कैसे चौधराहट दिखामें। बेचारे चौधरी जी हाथ जोड़ रहे कि ‘हमें जाने दो। पर आज तौ बेचारे की शामत आ गई थी… जाने कौन से मुहूर्त में घर से निकले, जो ये दशा हो गई थी। अभी अपनी हालत से परेशान होकर मा$फी ही मांग रहे, तभी एक लड़के ने गाना चला दिया ‘कजरारे कजरारे मेरे कारे कारे नैना। और बाकी लोग ताली बजाने लगे और चौधरी साब के सामने शर्त रख दी गयी कि जब तक नाच कर उनका मनोरंजन नहीं करेंगे उन्हें आजादी नहीं मिलेगी।
बेचारे चौधरी जी मरते क्या नहीं करते की हालत में मजबूर होकर अजीबोगरीब मुद्राओं में नाचने लगे और बाकी सब मजा लूट रहे थे और कह रहे थे ‘क्यों भाई अब बढिय़ा इंतजाम है गयो ना ‘कैसी लगी हमारी ऐश्वर्या राय… अब तौ खुश हो ना नाच गाने को भी इंतजाम है गयो, जे शहर बारे याद रखेंगे ना हमारे इंतजाम कुं, जोर के ठहाके से माहौल गुंजायमान हो रहा था और बेचारे चौधरी जी आंसू बहा रहे थे।
थोड़ी देर नाच गाने के बाद चौधरी साब को आजाद करके मुंह हाथ धुलवा दिए और आराम से बैठने की सलाह दी गई… जैसे ही बाहर आकर सब चलने को हुए… चौधरी साब बोल पड़े, तुम सबकी करतूत वहां चलके बताऊंगा रुको… मैं भी देखता हूं अब लड़की की विदाई कैसे होती है? पर ये क्या डरने बजाय सब हंस रहे थे?
‘कोई बात नहीं जी, बता देना, हम भी चलकर जे वीडियो सबको दिखा देंगे और आपका असली रूप भी और सब अलग ढंग से ताली पीटने लगे। अपनी ही वीडियो देख के बेचारे चौधरी साब का मन रोने का सा हो आया था, बेटा चौधरी हमें पता थी कि तू तो कुत्ता पूंछ की तरह टेड़ा है, जो कभी सीधी ना हो सकती पर हम भी बरसाने की लुगाई हैं, तेरी भी अम्मा हैं। एक महिला ने बड़े ह्रश्वयार से छेड़ते हुए कहा बाकी सब फिर ठहाका लगा कर हंसने लगे।
आज तक उनकी ऐसी दशा कहीं भी नहीं हुई थी। बेचारे सबके सामने गिडगिडाने लगे कि ये वीडियो किसी को मत दिखाना, जो सशर्त मान लिया गया और आगे की पूरी शादी शांतिपूर्वक तरीके से हो गई। लड़की की विदाई होने तक चौधरी साब ने एक भी सलाह तो क्या एक भी शब्द तक मुंह से नहीं निकाला। उनकी चुह्रश्वपी की वजह से सब उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करते रहे। विजयी मुस्कान औरतों और बच्चों के चेहरों पर थी। बेचारे चौधरी साब जल्दी से जल्दी घर जाना चाहते थे… क्यों ‘अब इसका कारण तो वो ही जाने या जाने हमारे बरसाने बारी।
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