Hindi Vyangya: मेरे मित्र ने पारिवारिक सदस्यों के दबाव में आकर चारपहिया वाहन खरीद लिया। शुरुआत में तो दो-तीन माह इनके पांव जमी पर नहीं पड़ रहे थे। खूब कार का मजा लिया। अब स्थिति यह आ गई की बैटरी न बैठ जाए इसलिए 10-15 दिन में एक चक्कर घर के आस-पास लगा लेते थे। […]
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नेटबंदी
इंटरनेट के इस युग में नेटबंदी किसी आपातकाल की स्थिति से कम नहीं है। ऑक्सीजन की तरह काम करता ये नेट जब बंद होने की कगार पर आ जाता है तो लोगों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में ये व्यंग्य नेटबंदी के जरिए मौजूदा दौर की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों पर कटाक्ष है।
व्यंग्य: आधुनिकता की आड़ में…
आधुनिकता की दौड़ का तकाज़ा है कि बस भागो-भागो। अब चाहे इस दौड़ में अपना ही वजूद क्यों न पिछड़ जाए। एक शानदार कटाक्ष-
बरसाने की बारात में चौधरी – गृहलक्ष्मी कहानियां
भले ही खुद के घर में इनकी कौड़ी इज्जत ना हो पर बाहर किसी की मौत हो या शादी, ये अपना ज्ञान बघारने से बिलकुल भी नही चूकते। ऐसी चौधराहट दिखाते हैं कि घर वाले भी बाहर वाले लगने लगते हैं।
