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फिजूलखर्ची: Hindi Vyangya
Fizulkharzi

Hindi Vyangya: मेरे मित्र ने पारिवारिक सदस्यों के दबाव में आकर चारपहिया वाहन खरीद लिया। शुरुआत में तो दो-तीन माह इनके पांव जमी पर नहीं पड़ रहे थे। खूब कार का मजा लिया। अब स्थिति यह आ गई की बैटरी न बैठ जाए इसलिए 10-15 दिन में एक चक्कर घर के आस-पास लगा लेते थे। कभी तो सिर्फ स्टार्ट करके गाड़ी पर कवर चढ़ा कर रख देते हैं। मित्र के दोनों बेटे उच्च शिक्षा लेेने में व्यस्त थे। छोटा बेेटा शहर में ही पढ़ाई में व्यस्त था तो बड़ा बेटा हैदराबाद में पढ़ रहा था। ऐसे में कार कौन चलाए? मित्र को कार चलाना नहीं आता न ही उसने कोशिश की क्योंकि वह इसे फिजूलखर्ची मान रहा था। मित्र के बड़े बेटे को एक बड़ी विदेषी कंपनी में अच्छे पैकेज की नौकरी लग गई। दिवाली के समय वह घर आया तो अपने पिता से कहने लगा-‘पापा जी, अपनी इस कार को 3 साल हो गये हैं इसे निकाल देते है और एक शानदार बड़ी कार खरीद लेते हैं।
मेरे मित्र ने अपने बेेटे से कहा, ‘अभी इस कार को खरीदे 3 साल ही तो हुए हैं फिर क्यो बेचना और नई कार खरीदने की फिजूलखर्ची क्यों कर रहे हो, इस कार में पांच लोग बैठते हैं और तुम जो बड़ी कार खरीदोगे उसमें भी पांच ही लोग बैठ सकते हैं। बेटा कहने लगा, ‘मेरे सब मित्रों के पास बड़ी कार ही है और बड़ी कार का मजा ही कुछ और है। मेरे मित्र ने बेटे को बहुत समझाया कि ये फिजूलखर्ची मत करो पर वह नहीं माना। तीन साल पुरानी कुछ ही किलोमीटर चली कार एजेंसी वालों को औने-पौने दाम में बेच दी और नई बड़ी कार खरीद लाया।
फिजूलखर्ची यानी अनावश्यक खरीदी में पैसे खर्च करना। अपने विवेक का उपयोग किये बिना ही पैसा खर्च करना कहां की समझदारी है। किसी के कहने पर कुछ भी खरीद लेना जिसका उपयोग ही बहुत कम होगा या बाद में होगा ही नहीं। खरीदी किया गया सामान कबाड़ में रखा जाएगा या शोपीस बनकर शोकेस में रखा जाएगा।
एक बार मैं अपने एक ऐसे मित्र के यहां गया जो फिजूलखर्ची का आदी है। हमारी मित्र मंडली को कुछ न कुछ सामान खरीदने के लिए उकसाता रहता है। मैंने उससे पूछ लिया, ‘मुझे याद आ रहा है तुमने वैक्यूम क्लिनर खरीदा था न? करीब 10-15 साल हो गये होगे।
मित्र कहने लगा, ‘हां इतना ही समय हुआ होगा फिर मैंने उस पर सवालों की झड़ी लगा दी। वेक्यूम क्लिनर अभी आखरी बार कब निकाला होगा यानी उपयोग किया होगा तो कहने लगा, ‘शायद 3 साल पहले लड़की की शादी के समय निकाला था।
मैंने पूछा, ‘अब कहां रखा है? तो कहने लगा, ‘शायद लॉफ्ट के ऊपर रखा होगा। इसे ही मालूम होगा।
फिर मैंने पूछा, ‘हमेशाा वैक्यूम क्लीनर से घर साफ नहीं करते क्या?
तो कहने लगा, ‘इसका उपयोग करना बड़ा झंझट का काम है। उससे अच्छा झाड़ू मार लो और पोछा लगा लो।
मैंने पूछा, ‘तो फिर लिया क्यों?
तो कहने लगा, ‘इसकी एक पक्की सहेली ने ही वेक्यूम क्लीनर बेचने वाले सेल्समैन को हमारे यहां भेज दिया। और कहने लगी इससे जाले वगैरे अच्छे निकल जाते है। तो हमने खरीद लिया। जब लिया था तो शुरुआत में बच्चे झगड़े थे चलाने में अब उनका उत्साह चला गया। अब ये मुझे वेक्यूम क्लिनर लगाकर जाले साफ करने के लिए कहती है। अगर मैं उसे कहता हूं तुम ही लगा लो तो वह कहती है ये पुरुषों का काम है। लो! ले देकर बात अपने ऊपर ही आ गई। मैं तो स्टूल पर चढ़कर जाले साफ करने में आसानी समझता हूं। और मैं वही करता हूं।
मैंने शोकेस में रखे क्रॉकरी सेट की तरफ इशारा करते हुए पूछ लिया, ‘बहुत अच्छा है, कब खरीदा था और कब उपयोग किया था?
तो कहने लगा, ‘बहुत साल पहले खरीदा था। एक बार उपयोग किया था तो कामवाली बाई ने एक बाउल फोड़ दिया, 24 पीस थे अब 23 ही बचे।
मैंने कहा, ‘फिर दूसरा बाउल लाना चाहिए न मित्र की पत्नी की पीछे से आवाज आई, ‘अरे वैसा ही मिलेगा नहीं और कामवाली बाई के जमाने में तो मैं इसका उपयोग नहीं करूंगी। मेरे मायके वाले आएंगे तो इस क्राकरी का उपयोग करूंगी।
मेरा मित्र धीरे से मुझसे कहता है, ‘ये इस क्राकरी का उपयोग कभी नहीं करेंगी क्यों कि इसे ही क्राकरी धोना पड़ती है। फिजूलखर्ची कर के महंगा क्राकरी सेट खरीदा और अब शो केस में पड़ा धूल खा रहा है।
बालकनी में रखी एक्सरसाइज करने वाली साइकिल की तरफ इशारा करते हुए मैंने मित्र से पूछ लिया, ‘इस साइकिल पर आप रोज एक्सरसाइज करते हो क्या?
तो कहने लगा, ‘कहां इस पर तो मैं रोज अपनी अंडरवियर, बनियान और टॉवल सुखाता हूं, जिसके कारण इस पर जंग भी लग रही है। लड़के के लिए खरीदी थी बस 15-20 दिन एक्सरसाइज की होगी फिर उसे आलस आ गया, मैंने सोचा चलों मैं ही एक्सरसाइज किया करूंगा, ये भी बोल रही थी कि मैं भी एक्सरसाइज करूंगी।
मैंने कहा, ‘चलो इसे चलाकर देखते हैं। तो मित्र कहने लगा, ‘अरे इसकी चेन टूट गई है ठिक करवानी है।
अरे ये फूड प्रोसेसर कब ले लिया, इसका उपयोग कैसे करते हैं?
मित्र ने बताया कि, ‘इस फूड प्रोसेसर से आटा गूंधा जाता है, ककड़ी, गाजर, मूली आदि की सलाद बनाने के अलावा और भी बहुत काम होता है।
मैंने कहा, ‘तब तो भाभी जी का किचन का काम बहुत आसान हो गया होगा।
तो कहने लगा, ‘शुरू में जब फूड प्रोसेसर खरीद कर लाए थे तो ये खूब उपयोग किया करती थी, पर बाद में कहने लगी इसे धोने में आलस आता है। उससे अच्छा हाथ से ही आटा गूंधना आसान है। थोड़ा हाथों में दर्द जरूर होता है पर मिक्सर का पॉट ब्लेड धोने से अच्छा है।
मैंने कहा, ‘लेते समय समझ में नहीं आया तो कहने लगा, ‘इसकी छोटी बहन ने फूड प्रोसेसर की बहुत तारीफ की तो हमने भी खरीद लिया।
अरे ये इतना बड़ा मोबाइल कब खरीदा? ये तो बड़ी नामी कंपनी का कीमती मोबाइल है और इसमें तो ढेर सारे फंक्शन है, क्या इनका उपयोग करते हो? कहने लगा, ‘मैं तो बस कॉल करने, कॉल सुनने के अलावा कभी-कभी फेसबुक और व्हाट्सएप चला लेता हूं। बाकी, इसमें का मुझे कुछ नहीं आता।
मैंने कहा, ‘फिर क्यों ले लिया तो बताया कि, ‘पड़ोसी ने खरीदा तो उसकी पत्नी बार-बार इसे कहती थी भाई साहब कब से वही पुराना मोबाइल यूज कर रहे हैं। नया खरीदने के लिए क्यों नहीं कहती। फिर क्या था मुझे भी ये 40 हजार का नया मोबाइल खरीदना पड़ा।
इसके अलावा तुमने और भाभी जी ने कौन से और नए-नए सामान खरीदे हैं। तो कहने लगा, ‘खाना बनाने में आसानी हो और नए-नए पकवान बनाने के लिए हम दोनों ने सैंडविच मेकर, इलेक्ट्रिक कैटल, पॉप-अप टोस्टर, हैंड ब्लेंडर, रोटी बेलने की मशीन और गैस खत्म हो जाए तो इंडक्शन, इलेक्ट्रिक कुकर और ओवन, कॉफी मशीन ये है, ये ही नहीं हमारे यहां सुईंग मशीन भी है।
माता-पिता जितने फिजूलखर्ची होते हैं, बच्चे भी उतने ही फिजूलखर्ची हो जाते हैं। यह सब दिखावे के कारण होता है। आस पड़ोस के लोगों को देखकर लोग भी अनावश्यक सामान खरीदने लगते हैं। बच्चे स्कूल कॉलेज में जाते हैं तो उन्हें दूसरे बच्चों के पास जो सामान है, वैसा ही इन्हें भी चाहिए होता है। माता-पिता इनकी मांग पूरी करते हैं और एक समय ऐसा आता है कि इनकी आर्थिक स्थिति गड़बड़ाने लग जाती है, तो ये हर तरफ से कर्ज लेना शुरू कर देते हैं। माता-पिता जब फिजूलखर्ची करने के लिए बच्चों को टोकते है तो बच्चे मानसिक पीड़ा का अनुभव करते हैं और परिवार से दूर होने लगते हैं।
इसलिए तो कहते है फिजूलखर्ची अच्छी नहीं होती। आजकल शादियों में हो रही फिजूलखर्ची को रोकने के लिए सरकार कानून लाने वाली है। इस कानून का पालन न करने वालो पर कड़ी सजा के प्रावधान भी रखने वाली है।

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