Hindi Vyangya: नकी दुनिया में बहू पर शक, सास पर अविश्वास, पर बाबामौलाना पर पूर्ण विश्वास की वारंटी होती है, जो ‘पाप और दु:ख दूर’ करने के नाम पर पर्स से पैसा दूर कर देते हैं। अतरंगी स्त्रियों का भी अपना एक अनोखा देश-दुनिया होता है। इन्हें ससुर, पति, जेठ, देवर याननदोई से कभी कोई […]
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सेल्फी का बुखार – व्यंग्य
Hindi Vyangya: डिजिटल दुनिया में सबसे कीमती चीज आपकी फोटो नहीं आपकी इज्जत है। और इज्जत एक बार जाने के बाद, उसे वापस लाने के लिए कोई एआई टूल नहीं बना है! जरा सोचिए वो दृश्य, आपने अभी-अभी एक सेल्फी ली है, बाल बिखरे हैं, पीछे कूलर पर कपड़े टंगेहैं, और चेहरे पर चमक है, […]
पर-उपदेश कुशल बहुतेरे – व्यंग्य
Hindi Vyangya: उपदेशकों को कौन रोक सकता है, वे अपनी सलाहगिरी का एकालाप जारी रखेंगे और आपको भुगतनी होगी उनकी शातिराना सलाह। सही कहा है, दूसरों को उपदेश देने वाले एक से एक नायाब माहिर लोग मिल जायेंगे। दूसरों को बैंगन परहेज में बतायेंगे और खुद रोज उसका भुर्ता बना कर खायेंगे। मुझे उपदेश दिया […]
मैं आपकी चटनी बना दूंगी – व्यंग्य
Hindi Vyangya: आज के जमाने के युवा नारी के कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं। वे उनका पग-पग पर साथ देते हैं। व्यक्ति की नाक का उसके गुस्से से क्या लेना-देना हो सकता है भला? ऐसा होना भी नहीं चाहिए। भई नाक अपनी जगह है और गुस्सा अपनी जगह। नाक, नाक है और गुस्सा, […]
हाय मैं हिंदी भाषी क्यों न हुआ…? – व्यंग्य
Hindi Vyangya: आपको एक बात बताऊं…? किसी को भी मत बताइएगा, दीवारों को भी नहीं क्योंकि उनके भी कान होते हैं और कान का होना बेवजह साहित्यिक तकरार को जन्म देना है। लिहाजा रहस्य की बात यह है कि हिंदी प्रांत में रहने वाले मूल निवासी जन्मजात साहित्यकार होता है। भले ही उसे अपने घर […]
पति है या हसबेंड (एक इच्छाधारी प्राणी) -व्यंग्य
Hindi Vyangya: पति नामक जीव को ये दिन रोज के दिनों जैसे सामान्य लगते हैं। पत्नी बेचारी लाख कोशिश कर ले समझाने की, मगर इनके सिर में जूं तो होती नहीं जो कान पर रेंग जाए। आप सोच रहे होंगे कि भला यह क्या बात हुई। पति कहो या हसबेंड कहो, बात तो एक ही […]
सैयां भयो कोतवाल – अब डर काहे का…! – व्यंग्य
Hindi Vyangya: खिलंदड जी की समस्या बड़ी विकराल थी। लुकमान के पास जा कर इसके ईलाज की खोज के लिए समय चाहिए था। अभी पौ फटी ही नहीं थी कि मित्र खिलंदड जी का मेरे घर बदहवाश हो आना हुआ। कुछ अनमने से ही सही, उनके स्वागत का नाटक करते मैंने पूछ ही लिया, ‘क्या […]
हाय! मैं शरम से टमाटर हुई – व्यंग्य
Hindi Vyangya: कुलमिलाकर शरम ने गुलामी के कपड़े उतार कर बेशरमाई का चोला अंगीकार कर लिया है। युवाओं की शरम भी, आधुनिकता की दौड़ में संस्कार की वर्जनाओं को तोड़ते हुए बेशरम हो चली है। बहुत प्यारा नजारा है। श्रीमती जी सोफे पर लेटीं हुई हैं। नजरें उनकी पत्रिका पर टिकी हैं। पढ़ते हुएमंद-मंद मुस्कुरा […]
वेइंग मशीन की करामात-व्यंग्य
Hindi Vyangya: महिमा ने मशीन में आए वजन का फोटो खींचा और उसे अपने दोस्तों के ग्रुप में भेज दिया। कुछ दिनों से सोये पड़े ग्रुप के सदस्य तुरंत जागृत हो गए। सबका बारी-बारी से जवाब आया। दो दिन से सर्दी और जुकाम से परेशान महिमा ने अंकिता से कहा, ‘बेटा तुम दादी और दादाजी […]
डर के आगे जीत है – व्यंग्य
Hindi Vyangya: बच्चे तो लगता है कि इस दुनिया में आने से ही डर रहे हैं इसीलिए नार्मल डिलीवरी कम ही होती है। अक्सर सुना है कि ‘डर के आगे जीत है पर क्या सही में ऐसा है। चलो देखते है क्योंकि यह भी सुनने में आता है कि डर के आगे एक और डर […]
