गृहलक्ष्मी की कहानियां : अक्सर जब किताबों में कोई प्रेम कहानी पढ़ती थी, तब मन में एक उधेड़बुन पैदा हो जाती है। मन में आता कि क्या ये सब असल जिंदगी में होता होगा, क्या कोई लड़का ऐसा भी होगा जो किसी लड़की के लिए अपनी जान दे दे। मुझे उस वक्त कहां पता था […]
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गृहलक्ष्मी की कहानियां : एक अनोखा बंधन
अविनाश को ऑफिस से छुट्टी नहीं मिली थी। इसलिए हम शादी में सिर्फ दो दिन पहले ही पहुंचे। ऑटो से उतरते ही कई जोड़ी आंखें हमारी ओर उठ गईं । उन आंखों ने हमें, खासकर मुझे देखकर आपस में खुसर-फुसर शुरु कर दी।
सितारों की दुनिया
प्रभास का खेल इन दिनों आसमान छू रहा था। तभी एक शूट के दौरान उसकी मुलाकात नेहा से हो गयी। नेहा एक मशहूर फिल्मी स्टार थी। दोनों एक दूसरे-से फिर से मिले और फिर मिलते ही गये। कुछ दिनों बाद दोनों ने अपना रिश्ता दुनिया के सामने कबूल भी कर लिया। एक साल के बाद प्रभास […]
रिश्तों की उलझन
मेजर प्रभास अपने बडे भाई वीर के शादी के लिए घर पर छुट्टियां लेकर आये थे। घर में बहुत ही खुशी का माहौल था। वीर बैंगलोर में किसी कंपनी में इंजीनियर था। अच्छा खासा कमा लेता था। इसी वजह से दुल्हन बनी दीया को सभी लोग खुशनसीब समझ रहे थे। अग्निहोत्री फैमिली में दीया तीनों […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां – एक दिन अचानक
गृहलक्ष्मी की कहानियां – रचना को आमतौर पर सिरदर्द रहता था। उसे लगता था कि शायद थकान के कारण उसे सिरदर्द हो रहा है और वह एक दर्द की गोली खा लेती थी, जिससे उसे कुछ आराम मिल जाता था और वह फिर से अपने कार्य में लग जाती थी। रचना एक विद्यालय में अध्यापिका […]
गृहलक्ष्मी की कहानियां – खुशनुमा जिंदगी
गृहलक्ष्मी की कहानियां – जिंदगी बहुत ही हसीन थी। आज नेहा का मेडीकल कॉलेज का थर्ड इयर का आखिरी दिन था। नेहा को जल्द से जल्द पेपर देकर अपने चचेरी बहन की शादी अटेंड करने जाना था। वो बहुत ही खुश थी, उसकी ट्रेन रात को बारह बजे होशियारपुर पहुंचने वाली थी। घर में सब […]
पुरस्कार
नीता एक मध्यवर्गीय परिवार की बहू है, घर में पति नीलेश, सास-ससुर और अपने दो बच्चों के साथ मगन रहती, नीलेश एक सरकारी कार्यालय में अधिकारी हैं एवं अपने सामान्य से जीवन से बेहद संतुष्ट हैं। यूं तो नीता को भी किसी से कोई शिकायत नहीं बस कभी-कभी पति नीलेश का अपने प्रति उदासीन रवैया […]
आओ, हम ही श्रीगणेश करें
“मम्मी गर्मी से मैं जला जा रहा हूं, मुझे बचा लो” मां ने रोते हुए बच्चे को सीने से लगाकर कहा,” मत रो बेटे, इस गर्मी से तो पूरा संसार ही जला जा रहा है. आदमी स्वार्थ में अंधा हो कर बेहिसाब पेड़ काट रहा है इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है अब ये सब कष्ट […]
कवि सम्मेलन के अध्यक्ष की योग्यता
क्या अध्यक्षता बेवकूफ ही करते हैं- नहीं, बुद्धिमान भी करते हैं- पत्नी जी रहस्यमय ढंग से मुस्करा रही थीं, वे सामने विराजमान रंगीनी देखकर वाह-वाह करते हैं।
ग्रहलक्ष्मी की कहानियां-पांच के सिक्के
जया, मेरी वाइफ नहीं है। लेकिन वो मेरे अब तक कुंवारे होने का कारण जरूर है। क्या कहूं, कोई मिली नहीं उसके जैसी या कहूं कि ढूंढा ही नहीं।
