chitthi aayi hai author views
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Author Views: गृहलक्ष्मी पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ाएं, जीवन में हर पल खुशियां ही खुशियां पाएं। रोचक और मनोरंजक कहानियां होती है इसमें, पढ़कर गुणवान होने की बढ़ती क्षमता सबमें, लेखों में समाहित जानकारियां सबको भाती। नए जमाने के संग हमेशा कदम बढ़ाती, व्यंजन लजीज बनाने की विधियां भी इसमें रहती। स्वस्थ जीवन जीने की यह बात हमेशा कहती। सुख, सुकून उपलब्धि जीवन में पा जाएं। गृहलक्ष्मी पत्रिका प्रति माह घर लाएं।

  • कमलेश पांडेय ‘पुष्प’, नई दिल्ली

तुमसे मुलाकात हुई पहली बार आठवीं कक्षा में, एक दिन अखबार के साथ तुम भी सुबह मेरे घर आई। मां से पूछा ये क्या हैं? मां बोली गृहलक्ष्मी मैगजीन, इसमें नई स्वेटर की डिजाइन आई हैं, मैंने पूछा मैं भी देख लूं इसे, मां ने हां कह दिया। फिर क्या पन्ने पलटे, मिली इसमें कहानियां, किस्से, रंग- बिरंगे चित्र, खाने की नई रेसिपी और मेरा पसंदीदा कार्नर था फिल्मी दुनियां की खबर। फिर क्या हर महीने की शुरुआत में रहता था तुम्हारे आने का इंतजार, मिलती पढ़ने को कहानियां और मजेदार किस्से और फिल्मी दुनियां की खबरें। इस तरह तुम बन गई मेरे जीवन का हिस्सा और बचपन का प्यारा-सा एक किस्सा।

  • स्मृति श्रीवास्तव

संत वेलेंटाइन का प्रेम एवं विवाह को समर्पित उनका जीवन-बलिदान हमारे नमन और सम्मान के योग्य है। उसी स्मृति में वेलेंटाइन डे मनाया जाता है। आज कंपनियो की मार्केटिंग ने वेलेंटाइन डे को एक वैश्विक त्यौहार का रूप दे दिया है। इसी त्यौहार को समर्पित लव एंड रोमांस स्पेशल ‘गृहलक्ष्मी’
अंक प्रकाशित हुआ। परंतु 14 फरवरी 2019 को पुलवामा आत्मघाती हमले में हमारी सेना के 40 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनके सम्मान में 14 फरवरी को हमारे देश में काला दिवस भी मनाया जाता है। उन वीर शहीदों के लिए श्रद्धांजलि की एक पंक्ति तो अवश्य बनती है। आज न तो कोई संत वेलेंटाइन को याद रखता है और न ही पुलवामा के उन वीर सैनिकों को, जो हमारे
सुख और शांति के लिए अपने प्राणों की आहुति दे गए। ‘गृहलक्ष्मी’ की बाकी सभी कहानियां व स्तंभ पत्रिका को पूर्णता प्रदान करते हैं।

मनिकना मुखर्जी, झांसी

लव एंड रोमांस विशेषांक का उपयोगी आलेख शरीर से पहले मन का जुड़ना क्यों जरूरी होता है मन को छू लेने वाला आलेख है। एक पत्नी की यह स्वीकारोक्ति कि मेरे पति द्वारा मन को छुए बिना मेरे तन को छूना मुझे बलात्कार का एहसास कराता है, इस बात की पुष्टि करता है। कानून भी इसीलिए तो लिव इन को मान्यता दे रहा है, क्योंकि वहां तन से पहले मन का जुड़ाव है। सहर्ष साथ रहना या सहमति से संबंध बनाना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। लेकिन मन को छुए बिना तन को छूना तुरंत घरेलू हिंसा की श्रेणी में आ जाता है। प्रसिद्ध मूवी पिंक का डायलॉग नो मीन्स नो भी इसी कथन की पुष्टि करता है। सीधे और सच्चे शब्दों में कहूं तो मन के जुड़ाव को तन के जुड़ाव से ऊपर रखना समाज में स्त्रियों का कद ऊपर उठाने में एक सशक्त और कारगर कदम है। पर वैसे यही अधिकार पुरुषों का भी है। उनकी इच्छा और पसंद के बिना किसी महिला को स्वयं को उन पर लादकर अपने महिला होने का नाजायज फायदा उठाना कदापि स्वीकार्य नहीं है, अति सर्वत्र वर्जयेत।

  • संगीता, जोधपुर (राजस्थान)

गृहलक्ष्मी का 2026 फरवरी अंक ‘लव एंड रोमांस’ हाथ में आया तो मन में बस यही आया कि पहले विवाह उसके पश्चात तीन से चार महीने प्यार मनुहार फिर चूल्हा- चौका के साथ भागंभाग भरी जिंदगी और प्यार का बैलून तो फट ही जाता है। और रात के रोमांस के रोमांटिक पल तब समाप्त हो जाते हैं, जब बीवियां शौहर को सास के साथ हुई पूरे दिन की खटपट बताती है। अपने जीवन साथी पर अगर आपका भरोसा है और अब सच्चे दिल से उन्हें चाहते हैं, आपके अंदर जो फीलिंग है वो उनके अंदर भी है तो मन का ये जुड़ाव ताउम्र आपको वो खुशबू देता है जो आपकी जिंदगी को महकाए रखती है। अंत में ये ही कहना चाहूंगी कि काम की थकान को हावी नहीं होने देना है, खुलकर बातचीत करें चाहे दस मिनट की हो। मुझे गृहलक्ष्मी में इस बार न्यूट्रीशनिस्ट की डायरी में ‘दिल की
सेहत के लिए पोषण और स्वस्थ आदतें’ अपनाएं में कई ऐसे कारगर उपाय बताए जिनसे हमारा हार्ट ज्यादा स्वस्थ रहे और वो स्वस्थ होगा तो हम खुशहाल होंगे। सरोकार में रट्टामार पढ़ाई का अंत, अब
समझ और योग्यता की बारी मुझे बहुत अच्छा लगा। मुझे अपना हाईस्कूल याद आ गया जिसमें ज्यादा से ज्यादा मेहनत करने पर भी बहुत डर लगता था कि कहीं कोई कमी न रह जाए।

कविता गुप्ता, प्रयागराज (उ.प्र.)

गृहलक्ष्मी पत्रिका में मुझे जीवन का हर रंग नजर आता है। इसमें प्रेम, दुख, श्रृंगार जैसे सभी 9 रस शामिल होते हैं। इसमें प्रकाशित प्रत्येक लेख वास्तविक जीवन से प्रेरित होता है। मुझे लगता है आज के समय में मनुष्य में हमारे जो 9 रस हैं उनका लोप होता जा रहा है। लोगों में मेलजोल की भावना का फिर से उत्पन्न होना जरूरी है।

  • शकुंतला, (नई दिल्ली)

कमलेश पांडेय ‘पुष्प’, नई दिल्ली