“मम्मी गर्मी से मैं जला जा रहा हूं, मुझे बचा लो” मां ने रोते हुए बच्चे को सीने से लगाकर कहा,” मत रो बेटे, इस गर्मी से तो पूरा संसार ही जला जा रहा है. आदमी स्वार्थ में अंधा हो कर बेहिसाब पेड़ काट रहा है इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है अब ये सब कष्ट तो झेलना ही पड़ेगा।”
“तो मम्मी ये ठीक कैसे होगा?
“पूरी दुनिया को खुश रखने के लिए सिर्फ हर इन्सान अपने को बदल ले तो सब ठीक हो जाएगा, दूसरों को दोष देने के बजाय खुद को सुधारना आसान और अच्छा है, थोड़ा सा अतिरिक्त समय देश के लिए निकालें, यही सोच के साथ सही काम करें बस, चारों तरफ गंदगी के ढेर लगे हैं। शुध्द भोजन, जल और वायु के अभाव में सांस लेना भी दूभर है। इस स्थिति वहीं की वहीं तो क्यों न कुछ बुनियादी ज़रुरी काम हम खुद करें। चलो बेटा इस काम का श्रीगणेश हम करें”
मां ने फावड़ा उठाया और बेटे ने टोकरी जहां कचरे के ढेर पड़े थे वहाँ से थोड़ी दूर एक बड़ा गड्ढा खोदकर उसमें जितना कचरा बना भर दिया उसके उपर मिट्टी के ढेर से छोटे-छोटे पहाड़ बना दिए। उन पहाड़ों पर सुन्दर फूलों की बेलें लगा दी। कुछ समय पश्चात वहां सुन्दरता दिखाई देने लगी। उसके बाद दोनों सड़्क के गड्ढों की ओर बढ़ गए। अभी उन्हें शिक्षा नीति, स्वास्थ्य आदि पर भी काम करना था। देखते ही देखते और लोग भी आ जुटे।
यह भी पढ़ें –सजा से मुक्ति – गृहलक्ष्मी कहानियां
-आपको यह कहानी कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही आप अपनी कहानियां भी हमें ई-मेल कर सकते हैं-Editor@grehlakshmi.com
-डायमंड पॉकेट बुक्स की अन्य रोचक कहानियों और प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं को खरीदने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://bit.ly/39Vn1ji
