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गृहलक्ष्मी

गृहलक्ष्मी की कहानियां- सोनल, ओ सोनल कहां है?  जरा शिकंजी तो बना दे पापा जी के लिए, अभी बाहर से आए हैं।बहुत गर्मी है आजकल ! जी मम्मी जी अभी आई, लीजिये पापा जी आप की शिकंजी।ले बेटा यह सब्जियां भी धोके रख ले नहीं तो सब पड़ी-पड़ी सूख जाएंगी।  बहुत ही गर्मी है इंसान तो इंसान क्या जानवर और क्या यह फल सब्जी सबका बुरा हाल हो गया है। बस एक कोरोना को ही कुछ फर्क नहीं पड़ रहा है।, जी पापा जी अभी मेरी मीटिंग है उसके बाद रख देती हूं।  ठीक है बेटा।
थोड़ी देर बाद दोपहर में आवाज ई ,’ सोनल बेटा जल्दी से गरम गरम रोटी फेंक दें और खाना लगा दे मैं तब तक गुड़िया को संभाल  लूंगी।ले बेटा अब तो गुड़िया को ले ले और खाना भी खिला दे तब तक मैं भी खाना खा लेती हूं और तेरे पापा जी और सूरज को भी परोस देती हूँ । फिर तू भी खा लेना।आजा गुड़िया खाना खा लिया है मैंने,  तेरी मम्मी को भी खाना खाने दे।अब दादी और गुड़िया दोनों खेलेंगे, तेरी मम्मी को तो काम करना है ऑफिस का।’खाना खाने के बाद सोनल जल्दी से सब कुछ समेट कर जाने लगती है। तभी सूरज कहता है अरे सोना,  पापा जी के लिए फल काट के रख दो शाम को खाने के लिए चाहिए होते हैं।फिर तुम्हें बार-बार नहीं उठाना पड़ेगा।सूरज अभी मुझे जाना होगा 1 घंटे का लंच होता है और डेढ़ घंटा हो गया है।  मैं बीच में कर दूंगी आप चिंता मत करें।

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अब जाने के बाद सोनल काम में फंस गई।  सोनल ने जैसे ही अपना लैपटॉप बंद किया और घड़ी में समय देखा तो 8:00 बज गए थे। जल्दी से उठ कर हाथ मुंह धो कर किचन में चली गई ।और खाने की तैयारी करने लगी, अब सूरज भी किचन में आ जाता है और सोनल से कहता है, अगर तुम्हें पापा जी के लिए फल नहीं काटने थे ,  तो तुम मुझे मना कर देती मैं ही कर देता ।सूरज आप समझिए मुझे बिल्कुल समय नहीं मिला और मैं भूल गई  थी काम की वजह से, मैंने तो पानी तक  अभी आकर पीया है।  और फल तो मम्मी जी भी काट ही सकती  हैं।सोनम तुम्हें दिखता नहीं है मम्मी दिनभर गुड़िया को लिए रहती हैं। तभी तो तुम काम कर पाती हो नहीं तो कैसे कर पाओगी।हां ! सूरज मुझे पता है मम्मी गुड़िया को संभालती हैं इसीलिए मैं काम कर पा रही हूं।पर वर्क फ्रॉम होम की वजह से काम भी बढ़ गया है और बार -बार बीच मे उठने की वजह से काम नहीं हो पा रहा है।में सोच रही हूं जॉब ही  छोड़ देती हूँ। अब मुझसे सब कुछ मैनेज नहीं हो पा रहा है। और तो और मैं कितना भी कर लूं कुछ न कुछ छूट ही जाता है।अरे नहीं सोनल ऐसे कैसे चलेगा! मेरी सैलेरी से सब कुछ कैसे हो पायेगा , तुम्हे तो सब पता है घर  और गाड़ी की ईएमआई और भी कितने सारे खर्चे हैं मैं अकेले नही कर पाऊंगा।  सोनल तुम जॉब नही छोड़ सकती हो!

अच्छा सूरज तुम घर के खर्चे अकेले नही उठा सकते हो और मैं घर का काम अकेले कर सकती हूँ।अगर कुछ गलती से रह जाता है तो तुम मुझसे जबाब मांग रहे हो तो यही मेरा जबाब है। अब से मैं या तो जॉब छोड़ दूँगी या फिर तुम भी मेरी घर के काम में मदद करोगे।न कि मुझसे सवाल।कभी सोचा है तुमने घर का काम और आफिस कैसे मैनेज कर रही हूँ, इतने दिनों से!सुबह उठो, सबकी चाय नाश्ता, फिर घर की सफाई कर के 10 बजे अपना काम स्टार्ट करती हूं।बीच मे कभी कभी तुम लोगों की फरमाइश चाय -शर्बत वो भी करती हूँ। फिर दोपहर में लंच गरम गरम रोटी, फिर जल्दी से खाकर सब समेट के फिर काम मैं लग जाती हूं। शाम में पापाजी के फल और सबकी  चाय भी मैं ही बनाती हूँ। और रात का खाना भी।सूरज को ऐसे जबाब की उम्मीद नहीं थी।वो सोनल से वादा करता है अब से सब लोग घर के काम मिल के करेंगे।   जब घर सबका है तो फिर काम भी सबके हैं।रात के खाने के बाद सूरज मम्मी से बोलता है। अब से हम सब लोग घर के काम मिल बाट के करेंगे। सोनल सब कुछ अकेले नही कर सकती है।जैसे पहले दिन में आप और पापा जी सब मैनेज करते थे वैसे ही करेंगे।ताकि सोनल अपना आफिस का काम अच्छे से कर सके। और खाना बनाने में मैं सोनल की मदद करूँगा।सूरज की बात सुन के मम्मी को भी महसूस होता है।और वो सोनल से माफी मांगती हैं। बेटा मैंने कभी तुम्हारे काम के बारे में नही सोचा। अब से हम सब मिलकर घर संभालेंगे।

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