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grehlakshmi ki kahani

गृहलक्ष्मी की कहानियां: शिखा! तुम्हारे लिए नाश्ता रख दिया है, जल्दी से कर लो। फिर तुम्हे दवा भी लेनी होगी।
मम्मी जी आज फिर केसर वाला दूध औऱ ये नारियल! आज ये खाने का मन नहीं है मम्मी जी, कुछ चटपटा खाने का मन कर रहा है, जैसे पोहा या नमकीन चावल।
प्लीज कुछ अच्छा सा बना दीजिए।
अभी तो तुम्हें यही खाना होगा शिखा।मैं दोपहर में कुछ तुम्हारे मन का बना दूँगी। ये सब खाओगी तभी तो आने वाला बच्चा गोरा होगा।ये मैं अपने लिए थोड़ी ही कर रही हूं!
शिखा के घर आजकल रोज ही ऐसा माहौल रहता है। शिखा का 9वां महीना चल रहा है तो उसके सास-ससुर आ गए हैं। वैसे उसके ससुराल में सभी बहुत अच्छे हैं।
बस रंग को लेकर सब लोग परेशान हैं क्योंकि शिखा के सास-ससुर दोनों का ही रंग थोड़ा सांवला है और उनके दोनों बच्चों शिखा के पति रवि और उनकी बहिन का भी।
शिखा की चाची सास गोरी हैं और उनके बच्चे भी। तो सबकी चाहत है कि आने वाला बच्चा भी शिखा की तरह गोरा हो।
शिखा ये सब जानती है पर ऐसे समय में बार-बार ऐसी बातों को सुनकर बहुत परेशान हो जाती है। पहले तो जब अकेली थी तो सासुमां फोन पर बताया करती थीं तो सुन लेती थी और जब मन करता था खा लेती थी।


लेकिन जब से सासुमां आईं हैं तब से उन्होंने रोज का नियम बना लिया है शिखा को ऐसी चीज़ें खिलाने का,जिससे आने वाला बच्चा गोरा हो। शुरू-शुरू में तो शिखा खा लेती थी। अब तो खाते ही उल्टियां होने लगती है। पर सासुमां तब भी मानती नही हैं, कभी प्यार से तो कभी डांट कर उसे खिलाती रहती हैं।
15 दिन से इसी तरह के माहौल में रहकर शिखा डिप्रेस होती जा रही है। वैसे भी इस समय उल्टे—सीधे ख्याल व सपने ज्यादा आते रहते हैं। शिखा ने इस बारे में अपने पति का विचार भी जानना चाहा तो उन्होंने भी
बातों—बातों में कह दिया कि तुम गोरी हो इसीलिए तो तुमसे शादी की है। कम से कम आने वाला बच्चा तो गोरा होगा।
ये क्या! शिखा को लेबर पेन शुरू हो गया। सब लोग उसे जल्दी से हॉस्पिटल ले गए हैं। शिखा को लेबर रूम में ले गए हैं। थोड़ी देर में डॉक्टर आकर सबको बधाई दे रहे हैं।आपके यहां लड़का हुआ है, जल्दी से मिठाई खिलाइए ,दादाजी बन गए हैं आप! और बच्चे को दादी के हाथ मे देते हैं।
ये क्या! बच्चा तो एकदम काला है। देखते ही सबके चेहरे का रंग उड़ गया। कोई भी खुश नहीं था।

अगले दिन शिखा को हॉस्पिटल से घर ले जाया गया। घर पहुंचते ही शिखा को बच्चे के साथ ही घर से बाहर निकाल दिया। जाओ यहां से । निकल जाओ। जब बच्चा ही गोरा न हुआ तो क्या फायदा हुआ तुमसे रवि की शादी कराने का। रवि और उनके माता पिता सब खड़े हैं। शिखा गिड़गिड़ा रही है प्लीज मुझे घर से मत निकालो!
शिखा उठो! क्या हुआ ये तुम क्या बड़बड़ा रही हो ? तुम्हे घर से कौन निकाल रहा है! तुम ठीक हो न?
शिखा रवि को सारी बात बताती है अपने सपने वाली!
रवि सुन​कर के पहले बहुत हंसता हैं फिर अपने मम्मी-पापा को भी बताता है।सब लोग शिखा का खूब मजाक उड़ाते हैं।
फिर उसकी सासुमां उसे समझाती हैं,’हम ये चाहते हैं कि आने वाला बच्चा गोरा हो पर ऐसा नहीं है कि अगर गोरा नहीं होगा तो हम तुम्हे या उसे कम प्यार करेंगे।
वो कैसा भी हो गोरा या काला होगा तो हमारा पोता ही!
हम उतनी ही खुशी मनाएंगे और तुम्हे घर से तो बिल्कुल नही निकालेंगे।
फिर से इतनी गोरी बहू कहाँ से लाएंगे!अब से तुम वही खाना शिखा जो तुम्हारा मन करे,पर ऐसे सपने मत देखना तुम!
सब लोग फिर से हँसने लगते हैं और इस बार उनके साथ शिखा भी।

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