Overview: फाल्गुन अमावस्या की तारीख और तिथि
इस वर्ष फाल्गुन माह की अमावस्या 16 फरवरी के दिन 05 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 17 फरवरी को शाम को 05 बजकर 30 मिनट पर होगा।
Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या हिन्दू कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिवस को विशेष रूप से भारत में होली के पूर्वाभास के रूप में मनाया जाता है। फाल्गुन अमावस्या हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की अमावस्या को कहते हैं। इसे विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस अवसर पर तीर्थ स्थलों पर स्नान, मंदिरों में पूजा-अर्चना और दान देने की परंपरा है। यह दिवस फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन स्नान, मंदिरों में पूजा-अर्चना समेत सूर्य और पितृ पूजा की भी परंपरा है। सोमवार को आने वाली अमावस्या को ‘सोमवती अमावस्या’ कहा जाता है।
इसके साथ शनिवार को ‘शनि अमावस्या’ और मंगलवार को ‘भौमवती अमावस्या’ कहा जाता है। फाल्गुन अमावस्या को अपने पूर्वाभास के रूप में भगवान शिव के उत्सव के रूप में मनाने के लिए भी जाना जाता है। यह त्योहार होली के पूर्वाभास के रूप में मनाया जाता है, जो बाद में होली के रूप में मनाया जाता है।
फाल्गुन अमावस्या की तारीख और तिथि

इस वर्ष फाल्गुन माह की अमावस्या 16 फरवरी के दिन 05 बजकर 34 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 17 फरवरी को शाम को 05 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या मनाई जाएगी। यह त्यौहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
फाल्गुन अमावस्या पर धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम:
फाल्गुन अमावस्या को विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है और इसे देश भर में अलग-अलग तरीकों से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है। यहां कुछ प्रमुख विधि-विधान दिए गए हैं:
पूजा और अर्चना: फाल्गुन अमावस्या के अवसर पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है, जिसमें शिवलिंग का अभिषेक, धूप, दीप, और नैवेद्य यानी प्रसाद की विधानसम्मत पूजा कि जाती है।
तीर्थ स्नान: फाल्गुन अमावस्या के दिन तीर्थों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। अधिकांश लोग गंगा, यमुना, और अन्य स्थलों में स्नान करने जाते है। माना जाता है कि पवित्र नदियों में स्नान करने से भूतकाल के सभी पाप मिट जाते है।
ध्यान और मंत्र जप: यह एक ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास का अच्छा अवसर होता है। लोग अपने मन को शुद्ध करने और भगवान के ध्यान में लगाने के लिए मंत्रों का जाप करते हैं।
समाजिक कार्यक्रम: फाल्गुन अमावस्या के दिन समाज में सामूहिक रूप से पानी के धारा, मंदिरों की सफाई, दान-धर्म, और अन्य सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही इस दिन जरुरतमंदो को दान देना काफी अच्छा माना जाता है।
होली के पूर्वाभास: फाल्गुन अमावस्या को होली के पूर्वाभास के रूप में भी मनाया जाता है, जिसमें लोग रंगों से खेलते हैं और आनंद मनाते हैं। यह अमावस्या होली त्यौहार आने का एक प्रतिक भी है।
इन तरीकों से फाल्गुन अमावस्या को मनाकर लोग भगवान की कृपा, ध्यान, और आध्यात्मिक उत्थान का आनंद लेते हैं।
