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फाल्गुन अमावस्या के दिन कुछ उपाय करके आप पितृदोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पा सकते हैं। क्योंकि यह दिन न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का है, बल्कि जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक शांति पाने के लिए भी शुभ माना जाता है।
Falgun Amavasya 2025 Date: अगर आप पितृदोष और कालसर्प दोष से परेशान हैं और जीवन से परेशानियां दूर ही नहीं हो रही हैं तो फाल्गुन मास की अमावस्या का दिन आपके लिए बेहद खास हो सकता है। क्योंकि इस दिन कुछ उपाय करके आप पितृदोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पा सकते हैं। क्योंकि यह दिन न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने का है, बल्कि जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक शांति पाने के लिए भी शुभ माना जाता है। फाल्गुन अमावस्या के दिन किए गए कुछ उपाय आपको पितृदोष और कालसर्प दोष से हमेशा के लिए मुक्ति दिला सकते हैं। आइए जानते हैं कब है फाल्गुन अमावस्या और कैसे दूर कर सकते हैं आप अपने दोष।
फाल्गुन अमावस्या 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष फाल्गुन मास की अमावस्या 27 फरवरी, 2025 को सुबह 8 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 28 फरवरी 2025 को सुबह 6 बजकर 14 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार फाल्गुन अमावस्या का व्रत 27 फरवरी को किया जाएगा। फाल्गुन अमावस्या का स्नान, पूजन और दान का श्रेष्ठ मुहूर्त 27 फरवरी को सुबह 5:09 से 5:59 बजे के बीच का रहेगा। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:12 से 12:58 बजे तक रहेगा। इस दौरान साधक विशेष पूजा और अनुष्ठान कर सकते हैं।
फाल्गुन अमावस्या पर जरूर करें ये काम

फाल्गुन अमावस्या बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह आपको कई दोषों से मुक्त करवाने की ताकत रखती है। इस दिन कुछ आसान से उपाय करके आप जीवन में सुख समृद्धि और शांति ला सकते हैं।
गंगा स्नान करने का है महत्व
फाल्गुन अमावस्या के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। गंगा स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। यदि गंगा नदी में स्नान करना संभव नहीं हो, तो आप गंगाजल लेकर उसे स्नान के पानी में डाल सकते हैं और उसी से स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से आपको गंगा स्नान जितना ही पुण्य मिलेगा।
पितृदोष और कालसर्प दोष से पाएं मुक्ति
फाल्गुन अमावस्या के दिन पितृदोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। पितृदोष से मुक्ति के लिए तर्पण और दान करना जरूरी होता है। आप पितरों के प्रति श्रद्धा दिखाते हुए तर्पण करें और ताजा जल, फूल या तिल चढ़ाकर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और काले तिल चढ़ाएं। मान्यता है कि इस उपाय से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति आती है।
ऐसे मिलेगी शनि देव की कृपा
माना जाता है कि जिन लोगों पर शनि देव की कृपा होती है, उनके जीवन में कोई दुख नहीं आता। सारी परेशानियां अपने आप दूर हो जाती हैं। ऐसे में फाल्गुन अमावस्या के दिन शनिदेव की पूजा करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अमावस्या का दिन शनि देव को समर्पित होता है। इस दिन शनि देव को नीले फूल अर्पित करें और उन्हें काले तिल, उड़द दाल आदि अर्पित करें। ऐसा करने से शनि देव की कृपा आप पर बनी रहती है और जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
ऐसे मिलेगा पितरों का आशीर्वाद
जिन लोगों पर पितरों की कृपा होती है, उनके जीवन में हमेशा खुशहाली रहती है। फाल्गुन अमावस्या के दिन आप अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं। इसके लिए पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाने के बाद पीपल वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें और अपने पितरों का स्मरण करें। यह उपाय पितृ दोष से मुक्ति पाने और पितरों के आशीर्वाद को आकर्षित करने में मदद करता है। इसी के साथ इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार अनाज, कपड़े, मिठाइयां आदि दान करें। इससे पितर भी खुश होंगे और जीवन में सकारात्मकता भी आएगी।
