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वी फोर (हम चार)-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: राघव के प्रमोशन की पार्टी थी। आज उसे कंपनी का हेड बना दिया गया था। बहुत ही कम उम्र में वह इस ऊंचाई तक पहुंच गया था। इसी पद को पाने के लिए वह लगातार तीन सालों से मेहनत कर रहा था। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और वह उसे वह पद मिल […]

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दस तारीख की सुबह- गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: सुबह के सात बज रहे थे, तनु हड़बड़ा कर उठी और उसकी आँखों में आंसू भरे हुए थे। आज सपने में उसने कुछ ऐसा देखा था जो वो कभी भूल नहीं सकती थी। उसने बालकनी का दरवाजा खोला और कुर्सी पर जा कर बैठ गयी। घर के आँगन में रखी 19 साल […]

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काली रात—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: हां बड़े संभ्रांत घर की बेटी ही तो थी वो…जिसकी आज ये हालत अपनी ही वजह से हो गई है। ये सोच सोच कर आज हर्षिता अपने आप को कोस रही थी कि कैसी काली रात थी वो जो उसने कुछ न सोचा ना समझा और ऐसा गलत कदम उठा लिया , परिवार की इज्जत, […]

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21वीं मंजिल का नरक-नए दौर की कहनियाँ

यह कहानी आधुनिक समाज की संवेदनहीनता और बंद दरवाजों के पीछे छिपे डर को उजागर करती है, जहाँ एक लड़की की चीखें अपनों के बीच भी अनसुनी रह जाती हैं।

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खामोश मोहब्बत की गूँज-नए दौर की कहानी

शादी के पच्चीस साल बाद क्या प्यार खत्म हो जाता है? या वह बस अपना रूप बदल लेता है? अक्सर हम प्यार को बड़े उपहारों, रोमांटिक तारीखों या मीठी बातों में ढूंढते हैं। लेकिन असल प्यार तो उन खामोश पलों में छिपा होता है जहाँ एक साथी दूसरे की तकलीफ बिना कहे समझ लेता है। यह कहानी है माधव और मृदुला की, जिनके रिश्ते का असली इम्तिहान तब हुआ जब शब्द कम पड़ गए।

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पीरियड्स पर चुप्पी क्यों-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: पंद्रह साल की अनुष्का स्कूल से लौटकर जैसे ही अपने कमरे में कपड़े बदलने गई, अचानक उसकी नज़र अपने कपड़ों पर पड़े लाल दाग़ पर गयी । एक पल को वह सन्न रह गई। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। हाथ काँपने लगे और आँखों में डर साफ़ झलक रहा था। वो […]

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“अपने जब बोझ बन जाएं”-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: सुधा: सत्यानाश! हो, अब क्या तोड़ दिया! मैं तो तंग आ गई हूं ये रोज रोज की तोड़ा ताड़ी की आवाजों से।पिता: बहु वो मैं बस एक कप चाय बनाने आया था, हाथ से कप छूटकर गिर गया।सुधा: आपका बेटा कमाता रहे और आप नुकसान पर नुकसान करते रहो, यही आपकी आदत हो […]

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कहानी जो आदत बन गई-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Short Story in Hindi: सुबह का अलार्म, जल्दी-जल्दी तैयार होना, लैपटॉप बैग के साथ टिफ़िन संभालना, ट्रैफिक में फँसना और दिनभर की  मीटिंग्स, तान्या की ज़िंदगी एक वर्किंग माँ की रोज़मर्रा की दौड़ थी। हर शाम घर लौटते समय उसके मन में एक ही विचार होता, आज भी नैतिक को पूरा समय नहीं दे पाई।नैतिक […]

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अपमान के घूंट—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: “सोमा हम आज ही यहां से चले जाएंगे। तुम सामान पैक कर लो और बच्चों को भी बता दो अब वो यहां इस घर में नहीं आएं। मुझसे अब और जिल्लत बर्दास्त नहीं होती।” अमन के दोनों बेटे दूसरे शहर में रहकर पढ़ाई कर रहें हैं और वो अपनी पत्नी सोमा के साथ […]

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पगली – नए दौर की कहानी

Hindi Kahani: नयी दुल्हन भागवंती,केतली से कप में चाय उड़ेल ही रही थी तभी  भैया सुखी आशीर्वाद  डोली से उसे ,गाँव आयी बुआ का कर्कश स्वर सुनाई दिया ,वो  “ बहू के पांव अच्छे नहीं हैं.गाँव गाँव से खबर आई है कि दुधारू गाय मर गई. फसल भी खराब हो गई.मैं तो शुरू से ही […]

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