We for (Hum Chaar)
We for (Hum Chaar)

Hindi Kahani: राघव के प्रमोशन की पार्टी थी। आज उसे कंपनी का हेड बना दिया गया था। बहुत ही कम उम्र में वह इस ऊंचाई तक पहुंच गया था। इसी पद को पाने के लिए वह लगातार तीन सालों से मेहनत कर रहा था। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और वह उसे वह पद मिल गया जिसके लिए उसने हजारों सपने देखे थे और कड़ी मेहनत कर रहा था।

कंपनी ने ग्रैंड पार्टी का आयोजन किया था जिसमें उसके दोस्त भी वहां आए हुए थे। नील, चिराग और रवीना ।
ये चारों बचपन से ही दोस्त थे। सब के सब अति महत्वाकांक्षी और उतने ही मेहनती।चारों ही अपने मुकाम की ऊंचाई पर पहुंचे हुए थे।

अपने दोस्तों के साथ पार्टी इंजॉय करते हुए राघव बहुत खुश था।

“ इसी दिन का इंतजार था और वह मुझे मिल गया!बस…अब कुछ और नहीं चाहिए।”
“हम्म! राघव इज द बेस्ट!हम सबमें हमेशा ये ही बाजी मारता था सबसे पहले,आज भी इसने सेंचुरी मार दिया है।”
राघव के सभी दोस्त उसकी खुशी में साथ खड़े थे।

कंपनी ने राघव के नाम एक आलीशान फ्लैट कर दिया था। महंगी गाड़ी से वह अब रोज ऑफिस आया जाया करता था।

अब उसका स्टेटस पहले वाला नहीं रह गया था। एक बहुत ही बड़े मल्टीनेशनल कंपनी में इस पद पर होना कोई मामूली बात नहीं थी। राघव ने वह कर दिखाया था जो हर किसी के वश में नहीं था।
अब उसकी जिंदगी बदल गई थी। 6 महीने बीत गए थे, राघव अपनी कामयाबी का जश्न मनाते हुए थक गया था। अब कंपनी की जिम्मेदारी उसके सिर आ गई थी।उसकी जिंदगी से सुकून शब्द गायब होने लगा था। भाग दौड़, काम का टेंशन और घर परिवार,सब उसके बनाए हुए स्टेटस और दिखावे में खो गए थे।
उसकी यही दुनिया रह गई थी जिसमें पति-पत्नी का प्यार कहीं खो गया था। बच्चे भी शो ऑफ करने में लगे रहते थे। पढ़ाई और मेहनत से दूर हो रहे थे और इन सबके बीच राघव छटपटाते हुए रह गया था।
“क्या सचमुच मुझे यही चाहिए था!”

जेन जी के इस युग में लगभग सभी युवा इसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो राघव भी उनसे अलग नहीं था।

कुछ समय बाद नया साल आने वाला था।
दस दिन पहले से कंपनी में न्यू ईयर का जश्न शुरू हो गया था।
पहले क्रिसमस पार्टी और उसके बाद न्यू ईयर का विशाल सेलिब्रेशन।

अब वह कंपनी का मुख्य एंप्लॉय हो चुका था। पार्टी का ऑर्गेनाइजेशन उसके हाथ में था।
उसने एक लक्जरियस पार्टी रखा था।डीजे, म्यूजिक, डांस, खाना पीना , सबकुछ।

पार्टी अपने शवाब पर थी। नए साल की पार्टी थी। सब लोग सज-संवरकर अपना हुस्न बिखेर रहे थे।
ज्यादातर लड़कियां अपने आप को इंप्रेस करने के लिए मॉडर्न टाइप कपड़े पहनकर आई हुई थी और पार्टी से ज्यादा राघव के साथ डांस करने में इंटरेस्ट भी ले रही थी।

पूरी रात पार्टी की धूम मस्ती चलती रही। पूरी रात नाच गाना करते हुए थक हार कर राघव अपने दोस्तों के साथ बाहर आकर बैठ गया।

उसके सभी उसी की तरह थे, कुछ खोए हुए …कुछ नशे में।
“ अब शराब भी मुझे नशीला नहीं करती!”नील थका हुआ अपने आप को स्ट्रेच करते हुए बोला।

“शराब में भी वह नशा नहीं रह गया जो पहले था।पहले मैं दो चार पेग लेकर सब कुछ भूल जाता था। “

“सच में ऐसा लगता है कि सब कुछ पाकर भी हमने कुछ खो दिया …या फिर हम हमें जो चाहिए था वह नहीं मिल पाया!”

“ ठीक कह रहा है तू! हम कुछ ज्यादा ही चमक ढूंढने में लग गए मगर हमारे हाथ सिर्फ राख ही आया है!”
“सही कह रहा है तू नील! अब यह सब अच्छा नहीं लगता लेकिन अब हम क्या करें हम तो गले तक डूब चुके हैं…! हमारी सोच, हमारी मानसिकता ने हमारे परिवार को भी ग्रस लिया है।”राघव गिलास हाथ में लेते हुए बोला।

“ बचपन से ही हमें यही सुनने को मिला तुम्हें यह करना है, तुम्हें वह करना है! आखिरकार हमने वह मुकाम हासिल कर भी लिया फिर भी हम कहीं खो गए हैं! क्या करें ,यह चमक-दमक और ये स्टेटस सब बहुत ही फीका लगता है! ऐसा लगता है कि जैसे हमारा गला घोंट दिया गया हो।
रवीना ने थके हारे हुए स्वर में बोली, पहले जब हम लोग गांव जाते थे तो दादी मां भजन गाती थी अपने साथ हम बच्चों को भी बैठा लेती थी। सच में बड़ा सुकून मिलता था। रामायण की चौपाइयां गाते हुए। उनके ही जिद पर मुझे संगीत सिखाया भी गया था।”

“यह तो तुमने बिलकुल सही कहा ।जब तक दादाजी जिंदा थे तब तक घर में घंटी और भजन की धुन सुबह-सुबह कानों में आती थी। उस समय हमने ध्यान भी नहीं दिया लेकिन अब पुरानी बातें सच में बहुत याद आती है।”
नील थोड़ा रुक कर फिर राघव से पुरानी बातें याद कर पूछा
“राघव भी तो बहुत अच्छा गाना गाता था। तुमने तो म्यूजिक का कोर्स भी किया है ना!”

“ वह दिन तो पुराने हो गए। स्कूल के समय में 12वीं तक मैं ने म्यूजिक लिया था। वह भी दादाजी के कहने पर और तुम्हें विश्वास होगा कि म्यूजिक में मैंने हाईएस्ट नंबर स्कोर भी किया था। मगर फिर बाद में धीरे-धीरे छूट गया। मैंने तो डीजे और शादीयों में,कई तरह की पार्टियों में गाया भी है।”
“अरे वाह…!रवीना खुशी से हंसी, मैं भी आकाशवाणी और लोकल टीवी चैनल पर अपना प्रोग्राम दी हूं।पर सिर्फ भजन ही गाती थी क्योंकि दादी मां को यही पसंद था और मुझे इतनी ही छूट मिली थी।”
चारों दोस्त पुरानी बातें ताजा कर रहे थे।

“सबकुछ पीछे छूट गया!”राघव अफसोस जताते हुए बोला।

“नहीं कुछ भी नहीं छूटा।हम फिर से अपने आप को बदल डालेंगे।ऐसा करते हैं हम चारों मिलकर एक भजन क्लब बनाते हैं और भजन शुरू करते हैं।
हमने अपनी दुनिया देख लिया ।अपने बच्चों के लिए उनका भविष्य भी तो तैयार करना है।”चिराग ने अपनी बात रखी।

“तुम ठीक कहते हो। ऐसा करते हैं कि हम अपने सोसाइटी की न्यू ईयर की पार्टी में भजन इवनिंग रखते हैं!”

“ बिल्कुल सही कह रहे हो मगर कोई तैयार नहीं होगा ! मैनेजमेंट नकार देगी।सबको डांस,डीजे , शोर-शराबा यही पसंद है!”

“कोई बात नहीं, एक बार शुरू तो करना ही पड़ेगा। कई बातें जो पहली बार होती है उसके पॉजिटिव और निगेटिव दोनों ही प्वाइंट होते हैं ।

पर हमें इस बात को सीरियसली लेना होगा कि हमें न्यू ईयर को यादगार बनाना है।”

“यस…!यस…!”सबके चेहरे खुशी से भर गए।
शराब की खाली पड़ी हुई गिलास उन चारों को जितना एनर्जेटिक नहीं बनाया था जितना कि इन पुरानी बातों ने उन लोगों को एनर्जी से भर दिया था।

काफी देर तक चारों इसी बात पर अपना प्लान बनाते रहे।

“ यह सब सुनकर अपने अंदर का गायक जाग गया है!”राघव हंसते हुए बोला।

“मेरे अंदर भी गायिका जाग गई है।”रवीना मुस्कुराते हुए बोली।

“मगर रवीना तुम्हारा सोसायटी तो अलग है? तुम आ पाओगी?”

“ बिल्कुल आ जाऊंगी ।तुम चिंता मत करो।”वह पहले की तरह मुस्कुराती रही।

राघव ,चिराग और नील एक ही सोसाइटी में रहते थे लेकिन रवीना इन तीनों से काफी दूर रहती थी।

बातचीत में यह तय हो गया कि रवीना एक शाम पहले ही उसके घर आ जाएगी और नए साल का सेलिब्रेशन करने के बाद ही वापस जाएगी।

राघव, नील और चिराग वापस घर लौटने के बाद उन्होंने सोसाइटी के मैनेजमेंट में जाकर अपना प्रोग्राम बता दिया ।
उन लोगों को भी यह प्रोग्राम थोड़ा अलग सा लगा। अब सब कुछ फिक्स हो गया था।

एक दिन समय निकालकर राघव अपने घर जाकर अपना पुराना तबला ले आया था और उस पर प्रैक्टिस शुरू भी कर दिया था। थोड़ी मेहनत के बाद उसे तबले के ताल और सारे भजन याद आ गए थे।

रवीना भी अपना हारमोनियम खोलकर उसे ठीक करने के लिए भेज दी थी।

कुछ दिन बाद 31 दिसंबर की रात आ गई थी।
उन चारों ने डीजे से भी कॉन्ट्रैक्ट कर लिया था ।उम्मीद के विपरीत पूरे सोसाइटी के बल्कि अगल-बगल के लोग भी आ गए थे।

हनुमान चालीसा, शिव तांडव स्रोत के साथ देवी भजन का नया संगम डीजे की धुन में सुनते हुए लोग झूमने लगे। पूरी रात जश्न में भक्ति से भीग गई थी।
काफी ही अच्छा प्रोग्राम रहा। सभी लोग इन चारों दोस्तों के इस क्लब की तारीफ करने लगे।
बड़े बुजुर्ग तो उन्हें आशीर्वाद देते थक नहीं रहे थे। नए युवा भी जोश में भरकर उन लोगों के पास आकर कहने लगे
“हमें भी अपने क्लब में रख लीजिए।”
नए युवा लड़के लड़कियों के जोश देखकर फिर राघव और उसके दोस्त खुशी से भर गए।

“ हम ऐसा करते हैं कि हम एक भक्ति क्लब बनाते हैं। हमारा काम ही यही रहेगा। हम इधर-उधर घूमेंगे वीकेंड में ,सोसाइटी में, किसी फंक्शन में ।
हम चैरिटी शो करेंगे और लोगों को जोड़ेंगे हमारा उद्देश्य रहेगा हमारे यंग जनरेशन को जोड़ने का‌, उन्हें भक्ति मार्ग में लाने का ताकि वह अपने नए युग को सही तरह से जी सकें ।
हमारी तरह नहीं। हमारे पास जो दौलत थी हमने उन्हें पीछे छोड़ दिया, गंवा दिया।
हम फिर से उन्हें अर्जित करेंगे और सबको बताएंगे ये भौतिक सुख, चमक-दमक सब कुछ माया है! ऐसा ना हो ना माया मिली ना राम।
उससे अच्छा होगा कि हम अपना भविष्य संवारें और उसे सही दिशा में ले जाएं।”

“ बिल्कुल सही, तुमने मेरे मुंह की बात छीन ली !”
रवीना राघव का कंधा थपथपाते हुऐ बोली।
“हम्म…! यू आर राइट पर हम अपने क्लब का नाम क्या रखेंगे नील मुस्कुराते हुए बोला चारों दोस्त एक दूसरे को देखकर बोले
“वी फोर!”
यह नाम सुनकर सब एक साथ जोर से हंस पड़े।