Hindi Motivational Story: “ये क्या बेवकूफी कर रही हो रैना। आखिर कितना कुछ किया है राघव और उसके परिवार ने हमारे लिए। कैसे भूल गई तुम कि आज उन्हीं की बदौलत तुम जिंदा हो और तुमने एक बार भी नहीं सोचा कि तुम्हारे इस व्यवहार से उनको कितना बुरा लगेगा।”
“मुझे कुछ नहीं सुनना उन लोगों के बारे में। वो हमारे यहां काम करता है। उसने और उसके मां बाप ने हम पर कोई एहसान तो नहीं किया था। घर में आग लग गई और मैं अकेली थी तो उन्होंने मेरी हेल्प की पर इसका मतलब यह नहीं कि जीवन भर मैं और आप लोग उसके एहसान तले दबे रहें।”
“ऐसा नहीं कहते बिटिया। हमें किसी के उपकार को कभी भूलना नहीं चाहिए। वैसे क्या कर दिया उसने जो तुम इतना हंगामा मचा रही हो उसे नौकरी से निकालने के लिए।”
” वो होता कौन है जो वो बताएगा कि मैं किससे मिलूं और किससे नहीं।क्या खाऊं क्या पीऊं… मुझे रोकने टोकने का उसे किसने अधिकार दिया। रोहन मेरा दोस्त हैं मेरा जब मन करेगा तब उससे मिलूंगी।”
रैना अपनी सहेली माही के जन्मदिन की पार्टी में गई थी वहां राघव जो उसके पापा की दुकान पर काम करता था वो भी उसके साथ गया था क्योंकि लौटते समय रात हो जाती इसलिए उसके पापा ने ही राघव को रैना के साथ भेजा था।
वहां उसके और भी दोस्त और कजिन आए थे जिनमें रोहन भी था जो उसका दूर का रिश्तेदार था। रैना के लिए तो दोस्त से बढ़कर था रोहन। पर वो इस बात से पूरी तरह अंजान थी कि रोहन के मन में क्या चल रहा है। राघव जान गया था कि रोहन रैना के साथ कुछ गलत करने की मंशा रखता है। उसने देख लिया था कि रोहन ने रैना के कोल्डड्रिंक में कुछ मिलाया है । वो रैना के साथ कुछ गलत ना करे इसलिए उसने रैना को कोल्डड्रिंक नहीं पीने दी और उसके हाथ से कोल्डड्रिंक का ग्लास ले कर फेंक दिया। उसे रोहन की सच्चाई बताई तो वो राघव की बात पर विश्वास ही नहीं कर रही थी। उलटे राघव पर ही भड़क गई कि उसने पार्टी का मजा खराब कर दिया।
“तुमको पापा ने मेरे साथ यहां पार्टी में भेजकर सारा मजा किरकिरा कर दिया।”
राघव और रोहन के बीच हाथापाई भी हो गई जब रोहन ने उसका कॉलर पकड़ लिया और गालियां देने लगा। रोहन ने रैना को भी खूब भला बुरा सुनाया । माही को भी बहुत बुरा लगा उसके जन्मदिन की पार्टी में ऐसा कुछ हो जाएगा इसकी कल्पना भी नहीं की थी।
“यार तेरे नौकर ने मेरी पार्टी स्पॉयल कर दी। मेरे दोस्त रोहन पर झूठा आरोप लगाया है। रोहन ऐसा कर ही नहीं सकता है। वो तो तुझे पसंद करता है । यह तेरा नौकर झूठ बोल रहा है।”
रैना ने सबके सामने राघव की बहुत इंसल्ट की । वो आंखों में आंसू लिए वहां से चला गया।
रैना ने राघव पर झूठा आरोप लगाकर अपने पिता को फोन पर उसे काम से निकालने के लिए कहा। वो उसके घर गई और उसके माता-पिता को भी खूब खड़ी खोटी सुनाई।
रैना के पिता को राघव पर बहुत ज्यादा विश्वास था वो उसे अपने बेटे की तरह ही मानते थे। उन्हें रैना की बात पर अंदेशा हुआ कि राघव कभी ऐसा नहीं कर सकता जिससे उसके परिवार की बदनामी हो।
“पापा राघव मुझे माही के घर पार्टी में ना ले जाकर एक सुनसान जगह ले गया और उसने मेरे साथ जबरदस्ती करने की भी कोशिश की। उसकी नियत सही नहीं है वह आपका पूरा बिजनेस भी हथियाना चाहता है। मैं बड़ी मुश्किल से उससे अपनी इज्जत और जान बचाकर भागी वहां से वरना आज तो अनर्थ ही हो जाता मेरे साथ। आपने जिसको मेरी सुरक्षा के लिए मेरे साथ भेजा वही मेरे साथ…”
सहम गए थे उस समय रैना की बात सुनकर उसके पिता ।
राघव जब घर पहुंचा तो उसके माता-पिता भी उसी पर गुस्सा हो रहे थे कि वो अपने मालिक की बेटी के साथ ऐसा कुछ गलत करेगा यह उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।
राघव की सच्चाई पर किसी को विश्वास ही नहीं हुआ।
वो अंदर से टूट गया था जब उसके माता-पिता ही उसे गलत समझने लगे तो वो जी कर क्या करेगा।
इधर रोहन का पूरा प्लान चौपट हो गया था जिस कारण वो बोखलाया हुआ था। अगर राघव को पता न चलता तो आज की रात रैना के साथ वो सारे मजे लूटता जिसका प्लान वो
कई दिनों से बना रहा था। उसने तो अपने कुछ दोस्तो को भी फॉर्म हाउस में बुला लिया था जहां वो बेहोशी की हालत में रैना को ले जाने की योजना बनाएं हुए था।
जब माही को अपने कजिन राघव के इरादों का पता चला तो उसने रैना को फोन पर वो सारी बातें बताई जिसे राघव ने बताने की कोशिश की थी पर उसे उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ था।
“यार रैना मुझे माफ कर दे। मुझे बिल्कुल नहीं पता था कि मेरे कजिन रोहन के मन में ऐसा कुछ चल रहा है। मुझे तो उसे भाई कहते हुए भी शर्म आती है। राघव ने जो किया वो सही किया। तुझे उसका शुक्रिया करना चाहिए। उसको कितना भला बुरा सुनाया हम सबने।”
“ये क्या कह रही है तूं। इसका मतलब राघव सही कह रहा था कि रोहन ने मेरी कोल्डड्रिंक में कुछ मिलाया था। अगर मैं पी लेती तो। हे भगवान मेरे साथ रोहन ना जाने क्या करता।”
रैना को पछतावा हो रहा था। उसने राघव को कितना गलत समझा था जबकि वो तो उसकी भला ही कर रहा था।
पूरी रात रैना को पछतावा होता रहा। वो मन ही मन राघव का शुक्रिया अदा कर रही थी। अगले दिन सुबह उसने अपने पापा को सच्चाई बताई तो बोले हमें तो उस पर पूरा विश्वास था कि वो लड़का कभी कुछ गलत नहीं करेगा। कभी कभी हमको जो दिखता है वो सही नहीं होता।
रैना अपने मम्मी पापा के साथ राघव के घर गई और उसके मम्मी पापा के लिए फल मिठाईयां भी लाई।
“अंकल आंटी मुझे माफ कर दीजिए। मुझे गलतफहमी हो गई थी। राघव कहां है मैं उससे माफी मांगने आईं हूं।”
“बिटिया तुम्हारी बात में आकर हमने अपने बेटे को बहुत डांटा जिस कारण वो रात को घर से बाहर ना जाने कहां रहा।”
“हे भगवान ये मैंने क्या कर दिया।”
“चिंता मत कर बिटिया मैं जानता हूं अभी वो कहां होगा।”
रैना के पिता ने कहा। वो जानते थे कि राघव जब भी उदास और परेशान होता है तो मंदिर में जाकर बैठ जाता है जो उनके घर से थोड़ी दूर में ही है।
उस रात भी राघव पूरी रात मंदिर की सीढ़ियों पर ही बैठा रहा।
रैना ने सबसे माफी मांगी और दौड़ती हुई मंदिर आ गई जहां राघव अभी भी सीढ़ियों पर बैठा हुआ था। वहां जाकर वो भी अपने घुटनों पर बैठकर उससे माफी मांगते हुए बोली…
“राघव मैंने तुम्हें गलत समझा। प्लीज़ माफ कर दो।तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया जो तुमने रोहन के चंगुल में आने से बचाया।”
“ये मेरा कर्तव्य था पर बुरा तो बहुत लगा जब तुमने मेरे बारे में मेरे और अपने घरवालों को झूठ झूठ बोला।”
“बेटा इसे अपने किए का पछतावा है। इसकी तरफ से हम माफी मांगते हैं जिसके कारण तुम्हें इतनी परेशानी हुई।”
राघव ने रैना के मम्मी पापा के पैर छू लिए।
उन्होंने उसे गले लगा लिया।
“रात बीती बात बीती अब घर चलो। तुम्हें दुकान भी तो संभालनी है।” रैना के पिता ने कहा तो एक मुस्कान राघव के चेहरे पर लौट आई।
“ये रात मेरी जिंदगी की सबसे ख़तरनाक हो जाती अगर तुम ना होते तो मैं रोहन का सच नहीं जान पाती।”
“हां बिटिया जो हुआ उसे भूल जाओ और राघव को शुक्रिया तो कहो।”
“शुक्रिया राघव”
