SUMMARY: दस तारीख की सुबह: अधूरी पार्टी और एक वादा
यह कहानी तनु की है, जो हर महीने की दस तारीख को अपने दिवंगत दोस्त रवि की याद में उसके माता-पिता से मिलने जाती है। एक छोटी-सी अधूरी पार्टी का वादा उसे सिखा जाता है कि जिंदगी में कोई भी काम या प्यार भरा रिश्ता कल पर नहीं टालना चाहिए।
Hindi Short Story: सुबह के सात बज रहे थे, तनु हड़बड़ा कर उठी और उसकी आँखों में आंसू भरे हुए थे। आज सपने में उसने कुछ ऐसा देखा था जो वो कभी भूल नहीं सकती थी। उसने बालकनी का दरवाजा खोला और कुर्सी पर जा कर बैठ गयी। घर के आँगन में रखी 19 साल पुरानी स्कूटी को देख कर वो कुछ याद करने लगी। ये तब की बात है जब वो कॉलेज के फर्स्ट ईयर में थी ,अभी स्कूटी खरीदे मुश्किल से 20 दिन ही हुए होंगे, गलती से उसने स्कूटी की डिक्की में चाबी छोड़ दी और परेशान हो गयी। पास ही उसके कॉलेज के दोस्त, रवि , विवेक और नितिन खड़े बातें कर रहे थे। उन्होंने तनु को परेशान देखा तो पूछने लगे क्या हुआ, क्यों रोने जैसा चेहरा बना रखा है तूने।
उसने एक सांस में सारी बात उन्हें बता दी। उन्होंने तनु की तरफ देखा तो बोले, इसमें परेशान होने वाली क्या बात है। अभी स्कूटी को उल्टा कर देते हैं, नीचे कुछ सिस्टम है जिससे स्कूटी की डिक्की खुल जायेगी और तुझे चाभी भी वापस मिल जाएगी।

तनु ने पहले कुछ सोचा, फिर कहा, नहीं, नहीं, मेरी नयी नवेली स्कूटी को तुम लोग उल्टा-पुल्टा कर के उसे गन्दा कर दोगे। देखो कितनी गन्दगी है नीचे तुम मेरी स्कूटी की हालत ख़राब कर दोगे। बिलकुल नहीं, अगर स्कूटी गन्दी हो गयी ना तो पापा मुझे बहुत डांटेंगे।
तुम लोग कुछ ऐसा सोचो जिस से मेरी ये प्रॉब्लम सॉल्व भी हो जाए और स्कूटी गन्दी भी ना हो। कुछ सोच कर नितिन बोला, तनु एक काम कर तू अंदर कॉलेज में जा और दो तीन लोगों से उनकी स्कूटी की चाबी लेकर आना, हो सकता है इसी कंपनी की दूसरी स्कूटी की चाबी से इसका लॉक भी खुल जाए। नितिन की इस बात पर रवि और विवेक मुँह छुपा कर हंसने लगे, पर तनु नितिन को बातों को इतने ध्यान से सुन रही थी की उसका ध्यान उन दोनों पर गया ही नहीं। घबराहट में उसने ये सोचा भी नहीं की नितिन उसे जो आईडिया दे रहा है वो सिर्फ उसे बुद्धू बनाने के लिए है।
तनु के अंदर जाते ही तीनों ने स्कूटी को उल्टा किया और फटाफट जुगाड़ लगा कर चाबी वापस निकाल ली। जब तनु लौट कर आयी तो उसने देखा, रवि के हाथ में उसकी स्कूटी की चाभी थी और वो तीनों खूब हंस रहे थे। रवि ने कहा तनु अब मुझे पार्टी चाहिए देख तेरी स्कूटी को गन्दा किये बिना हमने चाभी निकाल ली।
तनु उस दिन जल्दी में थी साल का आखिरी पेपर था और आज ही उसे अपनी मौसी के घर निकलना था। उसने कहा रवि तेरी पार्टी पक्की , लेकिन महीने भर बाद जब कॉलेज खुलेगा तब। तनु को नहीं पता था की वो रवि को आज आखिरी बार देख रही है। करीब हफ्ते भर बाद उसकी बेस्ट फ्रेंड नीलम का फ़ोन आया और उसने बताया रवि और विवेक का एक्सीडेंट हुआ था और अब रवि नहीं रहा। विवेक को काफी चोट आयी थी और वो हॉस्पिटल में एडमिट था।

तनु के हाथ से खाने की थाली गिर गयी। उसने सुबकना शुरू कर दिया। रवि के आखिरी शब्द तनु के कानों में बार-बार गूंज रहे थे, पार्टी देनी पड़ेगी तनु। तनु ने नहीं सोचा था की वो आखिरी बार रवि से ठीक से बात भी नहीं कर पाएगी। आज उसने एक बहुत प्यारा दोस्त खो दिया था, और हिम्मत भी नहीं जुटा पा रही थी की उसे आखिरी बार जा कर देख पाए। आज उसने एक फैसला किया, कोई काम कल पर नहीं छोड़ेगी, ताकि उसे कभी उस काम के पूरे ना हो पाने का अफ़सोस ना हो। रवि से मिलना तो नहीं हो पाया लेकिन आज सालों बाद भी तनु के कानों में रवि के वही आखिरी शब्द बार-बार गूँज रहे थे।

अचानक तनु को दूर से आती किसी की आवाज सुनाई दी। उसकी सहेली नीलम थी, दोनों को रवि के घर जाना था उसके मम्मी पापा से मिलने के लिए। तनु और नीलम ने तय किया था हर महीने की 10 तारीख वो रवि के मम्मी-पापा से मिलने जाया करेंगे। यह वही तारीख थी जब रवि सबको छोड़ कर अलविदा कह गया था।
