Wo Ladki
Wo Ladki

Hindi Social Story: सोमेश की कंपनी में नया प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, इसलिए अब ज्यादा देर ऑफिस में रहना पडेगा, इस बात से उसका मन खिन्न हो रहा था, दस बजे की मेट्रो से उतरकर वह ऑटो की ओर बढ़ा, जैसे ही वह ऑटो में बैठा वैसे ही एक खुशबू का झोंका उसकी नाक से टकराया, रूको, मुझे भी ले चलो, लगभग हांफते हुए उस लड़की ने कहा था, वो खूबसूरत चेहरा, हिरणी सी आंखें, बाल हवा में बिखरे हुए, साड़ी पहने हुए थी, कहते- कहते ही वह बैठ गई, अरे,, ऐ इन साहब ने ऑटो रूकवाया है तुम किसी और में चली जाओ, ऑटो वाले ने डंपटते हुए कहा, प्लीज मुझे भी ले चलो, आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, उसने बडे़ कोमल स्वर में कहा, ठीक है, मुझे कोई दिक्कत नहीं, सोमेश ने जैसे किसी सम्मोहन में कहा, वो तिरछी नजर से उस लड़की को देख रहा था, जैसे आंखें बगावत कर रही थी कि हम नहीं हटेगें, उसने इतनी सादगी और मासूमियत पहली बार देखी थी, लड़की समझ रही थी, उसने हँसते हुए कहा, तिरछी नजर से देखने से बेहतर है सीधे देख लीजिए, और वह उसकी तरफ़ मुड़ गई, वह हकबका गया, इसके लिए वह तैयार नहीं था वो झेंप गया कि उसकी चोरी पकड़ी गई, नहीं, नहीं, दरअसल वो आप इतनी सुदंर है तो,,, अच्छा, वह मुस्कुराई, क्या मै जान सकता हूँ आपका नाम क्या है, सोमेश ने पूछा, हाँ, मैं सुमन हूँ, उस लड़की ने कहा था, मै सोमेश, नोयडा में जॉब करता हूँ, और आप, क्या जॉब से आ रही हैं इतनी रात तक शिफ्ट चलती है, उसनेपूछा, जी मेरी शिफ्ट रात को ही चलती है, उसने गम्भीर होकर कहा, ओह! लड़कियों के लिए इतनी देर तक काम करना आसान नहीं है, उसने फिक्र से कहा, जी कुछ लड़कियों के लिए दिन का उजाला रात के अंधेरे से ज्यादा कठिन होता है, उसकी आवाज में अजीब सी उदासी थी,
घर पर माँ- पिताजी है , पढ़ने वाला छोटा भाई है, फीस, किराया, खाना, कपड़े जुटाना कठिन है और रात काटना आसान है, दिन की नौकरी आसान हो जाती तो रात कठिन क्यों होती, वो ऑटो से बाहर चेहरा करते हुए बोली, जैसे जिदंगी की कठिनाई को हवा के झोंके से मिटा देना चाहती है,
सोमेश को उससे एक लगाव सा महसूस हुआ, जैसे उसकी आवाज उसके सीने में उतर रही है, ऐसा अहसास उसे पहली बार हुआ था, वो चाहता था यह सफ़र कभी खत्म न हो, भाई रोको! मेरी मंजिल आ गई, उसने खिलखिलाते हुए कहा,ठीक है किराया मै दे दूंगा, उसने लड़की से कहा, न न, आधा किराया मै दूंगी, पैसा बड़ा किमती होता है जनाब, वह फिर हंसी, ठीक है उसके स्वाभिमान के आगे वह झूक गया, उसने अपनी जेब में हाथ डाला, लेकिन यह क्या जेब तो कट गई थी, ओह,, मेरी जेब कट गई, सोमेश ने चिंता से कहा, कोई बात नहीं, मै किराया दे दूंगी, लेकिन अपनी जेब संभाल कर रखो, ये दिल्ली है महाशय, सॉरी मैनें आपको परेशान कर दिया, उसने शर्मसार होते हुए कहा,
‘जिदंगी ने इतनी मेहरबानी की है,
कि परेशानियों से दोस्ती हो गई है’
वह गुनगुनाते हुए चली गई, वह उसे जाते हुए देखता रहा, जैसे उसका दिल उसी के साथ चला गया,रात भर उस लड़की का चेहरा आंखों में घुमता रहा, उसे सोच कर रोमांच हो गया कि शायद उसे प्यार हो गया है, काश! वो फिर मिल जाए, अगले दिन वह मेट्रो से उतरकर सड़क पर आया, उसकी नजरें उसी लड़की को ढूंढ रही थी, लेकिन वह कहीं दिख नही रही थी, उसका मन उदास हो गया, मै भी कितना बेवकूफ हूँ फोन न0 तो ले लेता, उसे अफसोस हो रहा था,अरे, साहब चलोगे क्या? , ऑटो वाले की आवाज आयी, वो बेमन से ऑटो में बैठ गया, अचानक फिर से वही खुशबू उसकी नाक से टकराई, उसने बाहर देखा, गुलाबी सूट पहने वो तेज कदमों से ऑटो की ओर बढ़ रही थी,
रूको, भाई, उसकी सांसे तेज चल रही थी, माथे पर पसीने की बूंदे मोतियों जैसी चमक रही थी, जो उसके चेहरे को और मासूम बना रही थी, उसे न जाने क्यों उस पर प्यार आ रहा था, जैसे वह अपनी उंगलियों से उस पसीने को पौंछ देना चाहता था,

वह लड़की उसे बिना देखे बैठ गई,
अरे, उतरो, ये ऑटो तुम्हारे लिए नहीं है, ऑटो वाला गुस्से से बोला,
मैं तो चलूंगी, उसने हंसते हुए कहा,
सोमेश को ऑटो वाले पर गुस्सा आया, इन्हें बैठने दो, रात का टाइम है महिलाओं की मदद करनी चाहिए, मुझे क्या, वो ऑटो वाला हिकारत से बोला,
ओह, आप आज फिर मिल गए, उस लड़की ने चौंकते हुए कहा,
जी, शायद ईश्वर चाहता है हम मिले, सोमेश ने बड़े प्यार से कहा,
ईश्वर न करे, वह बोली, उसे न जाने क्यों अच्छा नहीं लगा, वह उसे अपने दिल की भावनाएं बताना चाहता था, लेकिन ये सोच कर चुप रह गया कि कल ही तो मिले न जाने उसके बारे में क्या सोचेगी,उसने बात की शुरुआत की, तुम कहाँ जॉब करती हो, उसने पूछा,
मै एक जगह जॉब नहीं करती, उसकी आवाज तीखी थी,
उसे लगा शायद वह बताना नहीं चाहती, उसने आगे कुछ नहीं कहा, उस लड़की ने उसी जगह ऑटो रोका, जहाँ कल की रात रोका था, सोमेश ने उससे कहा आज किराया मै ही दूंगा, कल आपने दिया था, अच्छा, तो तुम मेरा कर्जा उतारना चाहते हो, वो खिलखिला कर हंसते हुए चली गई, वो चाहता था कि उसे पुकारे, प्लीज मत जाओ, लेकिन आवाज गले में अटक गई, क्या साहब, इस औरत को ज्यादा मुंह मत लगाओ, ये धंधे वाली है, इसका तो रोज का काम है, आप शरीफ घर के लगते हो, ऑटो वाले की आवाज उसके कानों में पिघले शीशे की तरह उतर गई, उसे यकीन नहीं हो रहा था, इतनी सौम्य, मासूम चेहरे वाली धंधे वाली कैसे हो सकती है, वो तो कितने सपने देख चुका था, ‘अच्छा तो तुम मेरा कर्जा उतारना चाहते हो|’ उस लड़की के शब्द उसकी अंतरआत्मा में चुभने लगे, उसे क्या पता था कि वो लड़की उसके अहसास और जमीर पर कितना बड़ा कर्जा रख कर चली गई है,