Love Story in Hindi: रीना और राकेश की मुलाकात ऑफिस में हुई थी। यह कोई फिल्मी टकराव नहीं था, न ही पहली नजर में प्यार जैसा कुछ। बस, वही रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक हिस्सा। लंच ब्रेक में हल्की-फुल्की बातें, कभी किसी प्रोजेक्ट पर साथ काम करना, और कभी-कभार कॉफी मशीन के पास मुलाकात।
रीना एक ज़िंदादिल लड़की थी, हमेशा मुस्कुराने वाली, लेकिन अपने दिल की बातें कम ही किसी से कहती थी। राकेश थोड़ा संजीदा था, ज्यादा बोलता नहीं था, लेकिन जो भी कहता, बहुत सोच-समझकर कहता।
सब कुछ ठीक चल रहा था, जब तक कि दोनों को एक बड़े प्रोजेक्ट पर साथ काम करने का मौका नहीं मिला।
इस प्रोजेक्ट की वजह से दोनों को देर रात तक काम करना पड़ता था। कभी-कभी बहस हो जाती, लेकिन फिर हंसी-मजाक में सब ठीक भी हो जाता। इन मुलाकातों के बीच कुछ नया पनपने लगा था-एक अनकहा सा रिश्ता। बॉन्डिंग कुछ अलग थी बाकी सहकर्मियों से। बहुत ही कंफर्ट था।
एक दिन बारिश हो रही थी। दोनों ने साथ में ऑफिस से बाहर कदम रखा। बारिश में भीगने का मज़ा ही अलग होता है, रीना ने कहा।
अगर अगले दिन सर्दी न हो तो, राकेश ने जवाब दिया। रीना हंस पड़ी और राकेश पहली बार उसकी हंसी में खो सा गया। धड़कन भी बढ़ी और एक अजीब एहसास ने घेर लिया जिसके बारे में कभी सोच भी नहीं सकता था।
धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे की ज़िंदगी का हिस्सा बनने लगे। मैसेज पर बातें होने लगीं, लंच अब साथ में होने लगा, और ऑफिस पार्टी में भी दोनों एक-दूसरे का साथ ढूंढने लगे। एक दिन ऑफिस के बाद कॉफी शॉप में बैठे-बैठे रीना ने कहा, मुझे लगता है, मैं तुम्हें बहुत पसंद करने लगी हूं।
राकेश ने उसकी आंखों में देखा, फिर धीरे से कहा, यह तो मुझे पहले से ही पता था।
रीना ने चौंक कर पूछा, कैसे?
क्योंकि मैं भी तुम्हें पसंद करने लगा हूं।
वो पहली बार था जब दोनों ने अपने मन की बात कही थी। सब कुछ खूबसूरत लग रहा था।
लेकिन हर प्रेम कहानी इतनी आसान नहीं होती। कुछ दिनों बाद, एक छोटी-सी बात पर दोनों की बहस हो गई।
राकेश ने नाराज़ होकर कहा, तुम हर चीज़ को अपने हिसाब से क्यों चाहती हो?
रीना भी चुप नहीं रही, क्योंकि मैं चाहती हूं कि सब कुछ सही हो! उस दिन पहली बार दोनों बिना बात किए ऑफिस से निकले।
अब उनके रिश्ते में पहले जैसी बात नहीं रही। बातचीत कम हो गई, मुलाकातें कम हो गईं। राकेश को समझ नहीं आ रहा था कि उसने गलत क्या किया। रीना भी खुद को समझा रही थी कि शायद यह रिश्ता बस इतना ही था।
लेकिन क्या प्यार इतनी आसानी से खत्म हो सकता है?
रीना की उदासी अब उसके चेहरे पर साफ झलकने लगी थी। उसके दोस्त पूछते, लेकिन वह टाल देती। राकेश भी अंदर से टूट रहा था। उसे रीना की हंसी की आदत हो गई थी। अब ऑफिस में उसकी कुर्सी खाली दिखती, तो दिल बैठ जाता।
फिर एक दिन, रीना को ऑफिस से घर जाते वक्त बहुत तेज़ बुखार हो गया। राकेश को जब यह पता चला, तो वह सीधा उसके घर पहुंच गया।
रीना ने दरवाज़ा खोला, और उसे देखकर हैरान रह गई।
तुम यहाँ क्या कर रहे हो?
राकेश ने एक बैग उसकी तरफ बढ़ाया। तुम्हारे लिए सूप लाया हूं।
रीना की आंखें भर आईं। वह कुछ नहीं कह पाई, बस उसे देखती रही।
उस रात दोनों ने घंटों बातें कीं। न कोई ईगो था, न कोई ग़लतफ़हमी। बस, दो लोग थे जो एक-दूसरे से फिर से जुड़ना चाहते थे।
तुमने कभी नहीं बताया कि तुम बिना कहे ही मेरी सारी बातें समझ जाते हो, रीना ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।
राकेश ने धीरे से जवाब दिया, क्योंकि तुम्हारी आंखें सब कुछ कह देती हैं, रीना। तुम्हारी हंसी, तुम्हारी चुप्पी, तुम्हारा गुस्सा-सब पढ़ सकता हूं मैं।
रीना कुछ पल चुप रही, फिर धीरे से बोली, फिर भी जब मैं सबसे ज्यादा टूटी हुई थी, तब तुमने मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया?
राकेश की आंखें झुक गईं। उसने धीरे से रीना का हाथ पकड़ा, मैं कभी तुम्हें छोड़ना नहीं चाहता था, लेकिन मुझे लगा कि तुम मुझसे दूर जाना चाहती हो।
रीना की आंखों में आंसू आ गए, पागल हो तुम! अगर मैं गुस्सा करती हूं, नाराज़ होती हूं, तो इसका मतलब यह नहीं कि मैं दूर जाना चाहती हूं। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि मैं चाहती हूं कि तुम मुझे मनाओ, मुझे समझो, मुझे थाम लो।
राकेश ने उसकी हथेलियों को अपने हाथों में लेते हुए कहा, तो अब मैं जान गया हूं कि मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ सकता, चाहे जितनी भी लड़ाइयां हों, चाहे कितनी भी नाराज़गियां हों।
उसके बाद, दोनों की ज़िंदगी फिर से खिल उठी। प्यार के साथ-साथ तकरार भी जारी थी, लेकिन अब लड़ाइयों का मतलब कुछ और था।
तुम हमेशा चाय पीते वक्त कप के हैंडल को गलत तरफ से पकड़ती हो, राकेश ने हंसते हुए कहा।
और तुम हमेशा फोन पर बातें करते हुए बालों में हाथ फेरते रहते हो! रीना ने चिढ़ाते हुए जवाब दिया।
कभी-कभी रीना घंटों तक बिना किसी वजह के गुस्सा रहती, और राकेश उसे मनाने के लिए नए-नए तरीके ढूंढता।
अगर तुमने बात नहीं की, तो मैं दरवाजे के बाहर बैठ जाऊंगा, चाहे बारिश ही क्यों न हो! राकेश ने एक दिन धमकी दी।
अच्छा? तो बैठो, मैं छाता भी नहीं दूंगी! रीना ने नकली गुस्से से कहा, लेकिन अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थी।
एक दिन, जब दोनों ऑफिस से साथ निकले, तो अचानक बारिश होने लगी।
रीना ने खुशी से अपने हाथ फैला दिए, बारिश में भीगने का मज़ा ही अलग होता है!
राकेश ने हल्की मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखा, अगर अगले दिन सर्दी न हो तो।
रीना हंस पड़ी, और राकेश को वही पहली मुलाकात वाली रीना याद आ गई। वो मासूम हंसी, वो चमकती आंखें।
रीना, क्या हम यूं ही हमेशा रह सकते हैं?
रीना ने उसकी तरफ देखा, और हल्की आवाज़ में कहा, हमेशा! बारिश की बूँदें गिरती रहीं और दोनों उसी बारिश में भीगते रहे-एक-दूसरे की बाहों में, एक-दूसरे की मुस्कानों में और एक-दूसरे की दुनिया में खोए हुए…
