Adhuri Pehchan
Adhuri Pehchan

Hindi Short Story: रीना हमेशा से समझदार और शांत स्वभाव की लड़की थी। नई-नई नौकरी लगी थी, इसलिए ऑफिस के पहले दिन ही उसके मन में घबराहट थी।
सब नए चेहरे, नई जगह — लेकिन तभी उसकी मुलाकात हुई आर्यन से।

आर्यन का स्वभाव हँसमुख था। वह सबको सहज महसूस कराता था।
रीना ने सोचा — “काश मैं भी इसकी तरह आत्मविश्वासी होती।”
धीरे-धीरे वे दोनों काम के सिलसिले में साथ बैठने लगे।
कॉफी ब्रेक में बातें होतीं, कभी हँसी-मज़ाक, कभी छोटी-छोटी बहसें।
पता ही नहीं चला कब दोनों एक-दूसरे की दिनचर्या का हिस्सा बन गए।

अब रीना का दिन तभी पूरा होता जब वह आर्यन से बात कर लेती।
उसकी एक मुस्कान रीना के पूरे दिन की थकान मिटा देती।
लेकिन यह रिश्ता कैसा था, यह दोनों में से किसी ने नहीं सोचा।

एक शाम जब वे ऑफिस से लौट रहे थे, रीना ने हिम्मत जुटाकर पूछा —
“आर्यन, तुम्हें नहीं लगता कि हम दोनों के बीच कुछ खास है?”

आर्यन कुछ देर चुप रहा, फिर मुस्कुराकर बोला —
“रीना, हर चीज़ को नाम देना ज़रूरी नहीं होता। कभी-कभी बस महसूस करना ही काफी होता है।”

रीना हल्के से मुस्कुराई, पर उसका दिल उलझ गया।
उसे लगा, “मैं महसूस तो कर रही हूँ, पर शायद वो नहीं।”

दिन बीतते गए।
रीना अब भी हर सुबह सजती, बस आर्यन के एक कॉम्प्लिमेंट के लिए।
पर आर्यन के लिए सब कुछ पहले जैसा था — सहज, बिना किसी बंधन के।
रीना अब समझ चुकी थी कि वह एक ऐसे रिश्ते में है जो है भी और नहीं भी।

वह चाहती थी कि आर्यन साफ़ कहे — “हाँ, मैं तुम्हें चाहता हूँ।”
पर जब भी वह इस बारे में बात करती, आर्यन मुस्कुराकर विषय बदल देता।

एक दिन उसने खुद से कहा —
“अगर किसी रिश्ते में सिर्फ एक ही दिल धड़क रहा हो, तो वो रिश्ता नहीं, बस एक उम्मीद रह जाती है।”

कुछ दिनों बाद, रीना ने आर्यन को कैफ़े बुलाया।
उसने कॉफी के कप को धीरे-धीरे घुमाते हुए कहा —
“आर्यन, मैं अब और नहीं रह सकती इस अनकहे रिश्ते में।
मुझे या तो साफ़ जवाब चाहिए या फिर शांति।”

आर्यन ने गहरी साँस ली और कहा —
“रीना, मैं नहीं चाहता तुम्हें खोना, पर मैं किसी रिश्ते का नाम भी नहीं देना चाहता।”

रीना की आँखें भर आईं, पर उसने मुस्कराते हुए कहा —
“कभी-कभी खो देना ही बचा लेना होता है, आर्यन।”

वह उठी, बाहर निकली, और उस रात आसमान में तारों को देखते हुए सोचा —
“शायद अब मुझे खुद से रिश्ता बनाना होगा।”

समय बीत गया।
रीना ने खुद को काम और नई चीज़ों में व्यस्त कर लिया।
धीरे-धीरे वह मुस्कुराने लगी, बिना किसी कारण के।
अब वह समझ चुकी थी कि प्यार तभी खूबसूरत है जब उसमें स्पष्टता हो।

एक दिन ऑफिस की लिफ्ट में उसकी फिर से मुलाकात आर्यन से हुई।
वह पहले जैसा ही था — मुस्कुराता हुआ, आत्मविश्वासी।
पर इस बार रीना के दिल में कोई हलचल नहीं हुई।
उसने बस इतना कहा —
“हाय आर्यन, कैसी चल रही है ज़िंदगी?”

आर्यन ने कुछ कहना चाहा, पर रीना पहले ही आगे बढ़ चुकी थी —
ज़िंदगी में भी और दिल में भी।