मेट्रो का सफर-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Metro ka Safar

Hindi Kahani: मैं और मेरी बेस्ट फ्रेंड हमेशा एक साथ मेट्रो में चढ़ते और सब से कोने वाली सीट पर बैठ जाते पर उस 2 वाली सीट पर हमेशा एक लड़की बैठी मिलती हम दोनों में से एक उसके बगल वाली सीट पर बैठ जाता और बातें करते हुए घर जाते ।
2-3 दिन हमें साथ में आते देख वह लड़की उस सीट से हट जाती और सामने वाली सीट पर बैठ जाती।
हम जब भी मेट्रो में चढ़ते वो हमें देखते ही खड़ी हो जाती और आगे वाली सीट पर जा बैठती और हमें देखती फिर कभी अपनी बुक में देखती तो कभी हमें…..बुक को पढ़ते-पढ़ते वो हमें देख हमारी बात सुन के मुस्कूरा भी देती
तक़रीबन यह 2-3 महीने चला फिर उस लड़की ने आना बंद कर दिया उसे देखे हमे भी एक महीना हो गया हम भी उस के बारे में बात करने लगे कहां गई वो लड़की
पर उसका पता लगने के लिए हमारे पास कुछ नहीं था न उस का नाम, न पता
लगभग 4-5 महीने बाद वो हमें दिखी वही जहां वो हमेशा दिखती थी और हमारे आते ही खड़ी हो कर दूसरी तरफ बैठ जाती थी, लेकिन आज एक बात अलग थी आज हमने उसे उठने नही दिया मेरी दोस्त और मैंने आज पहली बार उससे बात की
उस की खूबसूरत पलकों की तरह उस का नाम भी बहोत खूबसूरत था “आनय”
हमने उस से पूछा की वो हमेशा हमें देख के सीट से उठ क्यों जाती हैं।
तब आनय ने बताया कि उस की भी बेस्ट फ्रेंड उस के साथ ही स्कूल में साथ में जाती थी। एक ही बस में साथ में बैठ के हम दोनों एक – दूसरे का खाना खाया करते थे जो मम्मी हमें लंच में खाने को देती थी देती थी। हम दोनों लंच सुबह इसलिए खा जाते थे ताकि लंच टाइम में आराम से खेल सके।
पर एक दिन मैं स्कूल नहीं गई और स्कूल बस का एक्सिडेंट हो गया और उस में एक्सिडेंट में मेरी दोस्त मर गई।
मैं और वो बचपन से साथ थे और साथ में कॉलज जाने एक कोर्स लेने और हमारे बच्चे भी बेस्टफ्रेंड होंगे जैसी बातें और वादे किया करते थे। पर वो मुझे स्कूल में ही अकेला छोड़ के चली गई।
आज भी उस की बहुत याद आती है हर पल बहुत मिस करती हूं।

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