Mystery Story: उस रात कियारा के लिए ‘नीलगिरी हाइट्स’ कोई आलीशान इमारत नहीं, बल्कि कंक्रीट का एक पिंजरा बन गई थी। 21वीं मंजिल के गलियारे में जब बिजली कड़की, तो पीली रोशनी में कियारा का भीगा हुआ चेहरा और उसकी फटी आँखें साफ़ झलक रही थीं। वह भाग रही थी, उसके पैर नंगे थे और फर्श की ठंडी जलन उसके कलेजे तक पहुँच रही थी।
उसने मिस्टर खन्ना के दरवाजे पर पूरी ताकत से मुक्का मारा। “अंकल! प्लीज दरवाजा खोलिए! कोई मेरा पीछा कर रहा है… वो मुझे मार डालेगा!”
अंदर से कुंडी सरकने की आवाज आई। कियारा की जान में जान आई। लेकिन दरवाजा नहीं खुला। आई-होल (दरवाजे के छेद) से एक आँख उसे देख रही थी। खन्ना साहब की आवाज आई, पर मदद के लिए नहीं— “कियारा, तमाशा बंद करो। शरीफ लोग सो रहे हैं। अपनी गंदी निजी लड़ाइयाँ सड़क पर लड़ा करो, हमारी सोसाइटी का नाम खराब मत करो।”
कियारा सन्न रह गई। “अंकल, मेरी जान खतरे में है!” खन्ना (कठोरता से): “ऐसी लड़कियों की जान खतरे में ही रहती है जो आधी रात को छोटे कपड़े पहनकर घूमती हैं। जाओ यहाँ से!”

कियारा का पीछा कर रहा साया अब उसके बिल्कुल करीब था। वह आर्यन था—सोसाइटी का वो ‘रईस जादा’ जिसे सब सभ्य समझते थे। उसने कियारा के बाल पीछे से झटके से पकड़े और उसे फर्श पर घसीटते हुए लिफ्ट के पास ले आया।
आर्यन (क्रूर हंसी के साथ): “सुना तुमने? कोई तुम्हें यहाँ नहीं बचाएगा। तुम इन लोगों के लिए सिर्फ एक मनोरंजन हो। तुम्हारी चीखें इनके लिए लोरी जैसी हैं।”
कियारा रोते हुए उसके पैरों पर गिर पड़ी। “आर्यन, प्लीज… मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूँ। मुझे जाने दो।”
आर्यन (कियारा के चेहरे पर थूकते हुए): “पैर पड़ने से काम नहीं चलेगा। कल जब तुम मेरे ऑफिस आई थी, तो बड़े ऊँचे सुर में बात कर रही थी न? ‘सच्चाई’ छापोगी मेरे खिलाफ? अब दिखा अपनी हिम्मत। तेरी औकात इस फर्श पर पड़ी धूल से ज्यादा नहीं है।”
उसने कियारा का मुँह अपनी हथेली से भींच दिया। कियारा की आवाज़ घुटकर रह गई। आर्यन उसे सीढ़ियों की तरफ ले गया, जहाँ अंधेरा और गहरा था।
सूरज निकला, जैसे कुछ हुआ ही नहीं। गार्ड रामू काका ने देखा कि कॉरिडोर में कियारा का एक टूटा हुआ सैंडल पड़ा है। उन्होंने उसे कचरे के डिब्बे में डाल दिया। तभी बेसमेंट से एक फोन की घंटी बजी।
रामू काका बेसमेंट के उस हिस्से में पहुँचे जहाँ कचरा जमा होता था। वहां एक पुराना फोन बज रहा था। ‘पापा’ का फोन। रामू काका ने उठाया। “बेटा कियारा? तुम ठीक हो? रात को तुम्हारा फोन कटा तो लगा जैसे तुम चिल्ला रही थी…”
रामू काका का गला सूख गया। उन्होंने पास ही देखा—दीवार पर खून से सना कियारा का हाथ का निशान था, जो नीचे की तरफ जा रहा था।
इंस्पेक्टर राणा जब सोसाइटी पहुँचे, तो उन्होंने आर्यन को जिम में कसरत करते पाया।
राणा: “आर्यन, कल रात कियारा लापता हो गई है। तुम उसके पड़ोसी हो, कुछ सुना?”
आर्यन (तौलिये से पसीना पोंछते हुए): “सुना तो था सर, पर ऐसी लड़कियों का क्या भरोसा? कल किसी और के साथ थी, आज शायद किसी और के साथ भाग गई होगी। कैरेक्टर ही ऐसा था उसका।”
कियारा के पिता, जो वहां पहुँच चुके थे, यह सुनकर दहाड़ मार कर रो पड़े। “मेरी बेटी ऐसी नहीं थी! वो शेरनी थी!”
आर्यन (हिकारत से): “शेरनी? कल रात तो वो गिड़गिड़ा रही थी। बिल में घुसे चूहे की तरह।”
इंस्पेक्टर राणा की आँखें ठिठक गईं। “तुम्हें कैसे पता वो गिड़गिड़ा रही थी, आर्यन? मैंने तो चीखने का जिक्र ही नहीं किया।”
पुलिस जब आर्यन को लेकर बेसमेंट के ड्रेनेज चैंबर की तरफ बढ़ी, तो वहां का मंजर देखकर राणा की रूह काँप गई। कियारा वहां एक लोहे के पाइप से बंधी थी, अधमरी हालत में। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे और उसके बाल काट दिए गए थे—अपमान की आखिरी हद।
जैसे ही कियारा ने अपनी आँखें खोलीं, उसने आर्यन की तरफ देखा। उसकी आवाज़ कमजोर थी पर उसमें ज़हर था।
कियारा: “तुमने… तुमने मुझे नहीं मारा आर्यन, तुमने इन बंद दरवाजों के पीछे बैठे उन ‘सभ्य’ लोगों को मारा है। तुम सिर्फ एक हैवान हो, पर वो लोग कायर हैं।”
आर्यन को पुलिस ले जा रही थी, तब भी वह चिल्ला रहा था, “कोई गवाही नहीं देगा! सबने अपनी आँखों से देखा था, पर कोई बाहर नहीं आया!”
जब कियारा को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला जा रहा था, वही मिस्टर खन्ना और दूसरे पड़ोसी बालकनी से झाँक रहे थे। कियारा ने नफरत भरी नज़रों से उनकी तरफ देखा और थूक दिया। वह अपमान अब उसका नहीं, उस पूरी सोसाइटी का था।
