Hindi Funny Story: बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी और अकसर मेरे पति के दोस्त या रिश्तेदार हमें खाने पर आमंत्रित करते थे। वापसी में वे शगुन भी देते। एक बार इनके बहुत अच्छे मित्र के यहां हम गए। उनसे पहली बार में ही बेहद आत्मीयता हो गई।
डिनर के बाद चाय वाय पीते कब 11 बजने को आए पता ही नहीं चला। मैं चाय के बर्तन समेटते हुए भाभी के साथ किचन में गई तो देखा उन्होंने एक शगुन का लिफ़ाफ़ा निकाला हुआ है। मैं नहीं चाहती थी कि वो किसी औपचारिकता में पड़ें । मैंने भाभी से कहा, ‘मुझे आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा है। मैं चाहती हूँ कि हम दोस्त बन कर रहें।’ आप ये शगुन वगैरह के चक्कर में मत पड़िए। प्लीज़। भाभी मुस्कुराकर बोली कि मैं भी तुमसे एक बात कहूँ कि मैं भी तुम्हे अपनी दोस्त ही बना कर रखना चाहती हूँ सो मैं खुद भी इन औपचारिकताओं में नहीं पड़ना चाहती। ये शगुन तो अभी अभी मकान मालकिन अपने ससुराल से अपने बेबी के साथ पहली बार आई है तो उसे देखने और उनका दूध लेकर रखा है वो देने जा रही हूँ सो खाली हाथ नहीं जाना इसलिए ये शगुन उसके लिए निकाला है।
वो तो मुस्कुराती हुई उन्हें दूध और शगुन देने चली गई लेकिन मैं तो शर्म से लाल होकर बिल्कुल ज़मीन में गड़ ही गई। शुक्र है उस समय हम दोनों किचन में अकेले थे। बाद में जब पतिदेव को बताया तो हैंस हँस कर इनका बुरा हाल हो गया।
ये शगुन का लिफाफा तुम्हारे लिए नहीं था—हाय मैं शर्म से लाल हो गई
