Sad Story in Hindi: मुझे पशु-पक्षी और जानवर बेहद प्रिय हैं उनके लिए दाना-पानी रखना,गली के कुत्तों को दोनों वक्त रोटियाॅं देना मेरी आदत में शुमार है। कुल मिलाकर मुझे जीव प्रेमी कहा जा सकता है। मेरी गली की एक कुतिया तीन दिनों से दिख नहीं रही थी। मैं और मेरा बेटा उसे ढूंढने लगे। आखिर हमारी यह खोज पूरी हुई। कुतिया गर्भ से थी और उसने एक घर के स्लोव के नीचे बच्चों को दिया था। बच्चों की देखभाल की वजह से वह तीन दिन से उस जगह से निकली नहीं थी। वह भूखी थी हम उसे अपने साथ ले आए उसे भरपेट खाना खाने को दिया। तीन दिन से भूखी होने के कारण उसे बहुत तेज भूख लगी थी उसने जल्दी-जल्दी खाना खाया और फिर अपने बच्चों के पास चली गई।
मैं हमेशा सोचती थी इंसान तो क्या जानवर भी अपने बच्चों से बेहद प्यार करते हैं पर हाल में ही सोशल मीडिया पर एक रील देखते हुए मुझे बेहद अफसोस हुआ। जापान के इचिकावा शहर के एक चिड़ियाघर में रहने वाला सात महीने का नन्हा जापानी मकाक बंदर ‘पंच’ इन दिनों लोगों के दिलों में बस गया है। उसकी मासूम आँखों में जो खालीपन है, वह किसी भी संवेदनशील मन को भीतर तक छू जाता है। जुलाई 2025 में जन्मे पंच को जन्म के तुरंत बाद ही उसकी माँ ने छोड़ दिया।
सोचिए किसी के जीवन की शुरुआत ही अकेलेपन से हुई न कोई स्पर्श, न कोई अपनापन। ऐसे में चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने उसके लिए एक सॉफ्ट खिलौना रखा एक ऑरंगुटान का मुलायम पुतला, जिसे उन्होंने प्यार से ‘ओरे-मामा’ नाम दिया। धीरे-धीरे वह खिलौना ही पंच की दुनिया बन गया।वह उसे अपने से कसकर लिपटा रहता है, जैसे उसमें उसे अपनी खोई हुई माँ का स्पर्श मिल गया हो।सोते समय भी, खेलते समय भी हर पल वह उसी में अपनी माँ को ढूंढता। उस निर्जीव खिलौने को कलेजे से लगाकर वह सुरक्षा ढूँढता।
उसका यह दृश्य जब सोशल मीडिया पर सामने आया, तो लोग भावुक हो उठे। एक छोटा-सा जीव, जो शब्दों में अपना दर्द नहीं कह सकता, उसने अपने अकेलेपन का इलाज एक खिलौने में खोज लिया। पर सच तो यह है कि यह कहानी सिर्फ पंच की नहीं है। यह हम सबकी कहानी है।हम भी कभी-कभी अपने ही लोगों के बीच होते हुए भी भीतर से अकेले पड़ जाते हैं। भीड़ होती है, आवाज़ें होती हैं, रिश्ते भी होते हैं पर कहीं न कहीं एक खालीपन रह ही जाता है और तब हम भी अपने-अपने “ओरे-मामा” ढूँढ लेते हैं।कोई याद, कोई चीज़, कोई काम्,कोई व्यक्ति, या कोई छोटा-सा सहारा… जिससे हम चुपचाप लिपटकर अपने मन को समझा सकें साझा कर सकें।
पंच यह नहीं जानता कि उसकी कहानी ने कितने लोगों को प्रभावित किया है शायद उनमें मैं भी हूॅं।पंच का वह खिलौना हमें यह सिखाता है कि सहारे की जरूरत हर इंसान को होती है। वह सहारा चाहे छोटा हो या बड़ा दिल को सुकून दे दे तो उससे बड़ा साथ कुछ नहीं हो सकता। आज हमारे आस-पास न जाने कितने लोग अवसाद ग्रस्त हैं। उन्हें उनके अपनों ने ही ठंडा था, शायद इसी वजह से जीवन से उन्हें कोई मोह नहीं रह गया था। ऐसी स्थिति में पंच ने अपनी मासूम आँखों और उसे निर्जीव खिलौने के माध्यम से उम्मीद की एक लौ जगाई है। जब कोई आपका सहारा ना बने तो आप खुद का सहारा बन जाए। यद्यपि जीवन का एक सरल सच यह भी है हर जीव को प्रेम चाहिए चाहे वह इंसान हो या एक नन्हा सा बंदर पर जब आप के आस-पास ऐसा माहौल न हो तो अपने लिए खुद माहौल बनाना सीखे। क्योंकि जिंदगी किसी के लिए रुकती नहीं इसलिए चलते रहिए।
