Funny Stories for Kids: निक्का का पक्का दोस्त था मिंटू, मगर कुछ रोज से निक्का मिंटू से नाराज था । इस कदर नाराज कि बस कुछ न पूछो । मारे गुस्से के उसका मुँह फूल गया था । असल में मिंटू ने निक्का से पढ़ने के लिए कहानियों की किताब ली थी । वह किताब थी ‘अजब अनोखी परीकथाएँ ।’ पर जब उसने पढ़कर लौटाई तो उसमें जगह-जगह पेंसिल से आड़ी -तिरछी लकीरें बनी हुई थीं । देखकर निक्का को बड़ा दुख हुआ । उसने मन ही मन सोचा, ‘मिंटू खराब लड़का है । अब आगे से मैं इससे कभी बात नहीं करूँगा ।’
उसी शाम को मिंटू से पार्क में उसकी मुलाकात हो गई । मिंटू ने मुसकराते हुए पूछा, “कैसे हो निक्का ?” “ठीक !” निक्का ने अनमने ढंग से कहा, पर कुछ और बात नहीं की । मिंटू किताब में से पढ़ी हुई कहानियों पर बात करना चाहता था, पर निक्का का मडू वाकई खराब था । उसका मुँह अब भी गुब्बारें की तरह फूला हुआ था ।
मिंटू कुछ देर हक्का -बक्का सा चुप खड़ा रहा । फिर चुपचाप घर चला गया । उस रात निक्का पार्क से लौटा तो उसके चेहरे पर बड़ी उदासी थी । मम्मी ने पूछा, “क्यों निक्का , कुछ खास बात है क्या ?”
निक्का ने पूरी बात बताई तो मम्मी बोलीं, “देखो निक्का , अगर तुम्हें मिंटू की कोई बात खराब लगी, तो उसे बता देना चाहिए था । मुँह फुला लेने से क्या होता है ! उसे कैसे पता चलेगा कि तुम्हें क्या बुरा लगा ? वह तो बेचारा बिना बात परेशान रहेगा न ।…क्या यह बात ठीक है ?”
निक्का चुप । उसके पास मम्मी की बात का कोई जवाब नहीं था । “और फिर…!” मम्मी ने आगे कहा, “उसने तुम्हारी किताब खराब कर दी, यह तो वाकई बुरी बात है । मगर क्या तुम यह भी भूल सकते हो कि उसने कितने
मौकों पर तुम्हारी मदद की है । फिर देखो, पढ़ाई में वह कि तना तेज है, लेकिन जरा भी घमंड नहीं है उसके मन में । तुम्हें कोई बात समझ में नहीं आती, तो वह कितने प्यार से समझाता है ! भला कि तने लोग दूसरों की ऐसी मदद करते हैं !” निक्का को अपनी गलती महसूस हुई । बोला, “अपनी कहानियों की
किताब का हाल देख, वाकई मैं बहुत ज़्यादा गुस्से में आ गया था मम्मी । तब मैंने यह सब सोचा ही नहीं ।”
मम्मी बोलीं, “बात तुम्हारी बिल्कुल ठीक है निक्का । किसी से किताब लो तो उसे बिना बिगाड़े, अच्छी हालत में लौटाओ । होना तो यही चाहिए । लेकिन अगर उससे गलती हुई है, तो उसे यह बात समझा देते । तुम्हारा मुँह फुला लेने से बेचारा कितना दुखी हुआ होगा !” अगले दिन पार्क में निक्का को फिर मिंटू नजर आया । मिंटू उसे देखकर अचकचा गया और हटकर दूर जाने लगा । पर निक्का तेजी से उसके पास पहुँचा । बोला, “सॉरी मिंटू, बात असल में यह
सुनते ही मिंटू कुछ सकपका सा गया । उसने सोचा कि निक्का तो कल मुझसे कुछ बोला ही नहीं था, फिर आज…? वह हैरानी से बोला, “तुम मुझसे ही कुछ कह रहे हो निक्का ?”
“हाँ, तुमसे ही…!” निक्का बोला । फिर उसने किताब पर पेंसिल से लकीरें खींचने वाली बात बताई । इस पर मिंटू को बड़ी हैरानी हुई । बोला, “कहाँ हैं लकीरें ? मैंने तो नहीं देखीं ।” इस पर निक्का ने घर आकर मिंटू को किताब दिखाई । किताब देखते ही मिंटू बोला, “ओह, यह तो मेरी छोटी बहन टुलटुल की करामात है निक्का ।
बहुत ही शरारती है वह । पर कुछ भी कहो, काम उसने अच्छा नहीं किया । फिर मुझे भी किताब ऐसी जगह रखनी चाहिए थी, जहाँ से वह उसे न ले पाती ।
किताब लौटाते समय भी मैंने नहीं देखा । यह मेरी और भी बड़ी गलती है ।… सॉरी निक्का , वेरी सॉरी ! ”मिंटू की बात सुनकर निक्का बोला, “अच्छा , तो क्या टुलटुल ने किया है यह कमाल ? कोई बात नहीं निक्का , वह तो बहुत छोटी है । तुम उसे डाँटना मत ।…जरा भी मत डाँटना ।”
निक्का ने उसी शाम ड्राइंग की एक नई काॅपी खरीदी । उस पर प्यारी सी टुलटुल का गोलमुटल्ला चित्र बनाया । फिर उस चित्र के नीचे संदुर-संदुर रंग-बिरंगे अक्षरों में लिखा, ‘नन्ही -मुन्नी शरारती टुलटुल के लिए !’
उसने ड्राइंग की वह काॅपी मिंटू को देते हुए कहा, “मिंटू, मेरी ओर से इसे टुलटुल को दे देना । कहना, निक्का ने गिफ्ट दिया है ।”
देखकर मिंटू ने खुश होकर कहा, “वाह, इतनी अच्छी ड्राइंग की काॅपी ! अब तो टुलटुल के मजे आ जाएँगे । देखना, इस पर वह क्या -क्या बनाती है !” “अच्छा , तो मुझे भी दिखाना जरूर ।” निक्का हँसा घर आकर मिंटू ने टुलटुल को ड्राइंग की काॅपी दी, तो वह खुशी से नाच उठी । बोली, “अरे वाह, निक्का भैया ने मुझे कि तनी अच्छी भेंट दी !” अब निक्का मिंटू से नाराज नहीं था । सोच रहा था, ‘बिना बात मैंने मिंटू से मुँह फुला लिया । पर यह शैतानी तो टुलटुल की थी । और टुलटुल तो इतनी
छोटी है कि उसे कुछ कहें तो क्या ?’
उधर हफ्ते भर में ही टुलटुल ने ड्राइंग की काॅपी में ढेरों चित्र बना लिए । उसने हिरन का चित्र बनाया, मोर का चित्र बनाया, बाघ, हाथी और बारहसिंघे का भी । एक हँसते हुए शरारती गधे का भी उसने बड़ा मजेदार चित्र बनाया ।
कुछ रोज बाद जब निक्का मिंटू के घर गया, तो टुलटुल की ड्राइंग की काॅपी देखकर बोला, “अरे वाह, टुलटुल तो सच्ची -मुच्ची कलाकार हो गई !” मिंटू हँसकर बोला, “हाँ भाई, पर उसकी बड़ी कीमत मुझे चुकानी पड़ी ।
कि ताब में लकीरें खींचने पर तुम्हारा जो गुबारें की तरह फू ला हुआ मुँह उस दिन देखा, उसे मैं वाकई भलू नहीं सकूँगा !”
कहते-कहते मिंटू ने ठीक वैसी ही नकल करके दिखाई, तो निक्का के साथ टुलटुल भी तालि याँ बजाकर जोर-जोर से हँसने लगी ।
ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – Bachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ
