Social Story in Hindi: रोज की तरह ऋचा ने घर के काम निपटाए और घड़ी की तरफ नजर डाली।ग्यारह बजने में पंद्रह मिनट बाकी थे। उसने मन ही मन बुदबुदाया।“जल्दी से नाश्ता कर लेती हूँ, फिर पापा-मम्मी से बात करूँगी।”ऋचा का यह रोज का नियम था। ऋचा बिना नागा रोज़ ठीक ग्यारह बजे पापा-मम्मी से […]
Author Archives: डॉ. रंजना जायसवाल
लौट आओ फिर ना जाने के लिए-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivation Story: अल सुबह ठंडी हवाएं उमड़-उमड़ कर तन से लिपटी जा रही थी।नीला आसमान नीले से धूसर होने की यात्रा में था। उसने अपनी साड़ी को कसकर अपने तन से लपेट लिया।ठंडी हवा के झोंके तन पर सिरहन पैदा कर रहे थे।कल रात से ही मौसम का मिजाज़ कुछ बदला-बदला सा था।सच कहते हैं लोग जीवन और मौसम का कोई भरोसा नहीं […]
बड़ी जिज्जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Social Story in Hindi: मॉल से बाहर निकलते वक्त एक व्यक्ति को देख निधि के पैर ठिठक गए। अतुल जीजा जी!हाँ ये तो अतुल जीजा ही थे पर उन्होंने तो बड़ी जिज्जी के इस दुनिया के जाने के बाद यह शहर छोड़ दिया था।छोड़ दिया था या छोड़ना पड़ा।निधि की अंतरात्मा ने उसे धिक्कारा…उसके परिवार […]
वजूद – 21 श्रेष्ठ युवामन की कहानियां उत्तर प्रदेश
सुधा के एम. ए. करते ही घर में जोर-शोर से शादी की बातें चलने लगीं। पापा अखबारों और पत्रिकाओं में सर डाले बैठे रहते और अपनी लाडो के लिए योग्य वर की तलाश करते रहते। कागजों के छोटे-छोटे टुकड़े पर योग्य वर… सुधा को न जाने क्यों कभी-कभी ऐसा लगता वो लड़कों का बायोडाटा नहीं […]
इश्क का जाल-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: उसे रंग पसन्द नही थे,कोई भी रंग।कोई भी रंग समझते हैं न… रंगों से परहेज तो इतना था कि वो शर्बत भी नींबू का पीते थे… एकदम फीका।ऐसा नहीं था कि किसी डॉक्टर ने मना किया था या फिर कोई एलर्जी पर कुछ तो था। बटुक नाथ होली के नाम पर बिदक जाते […]
यूँ होता तो क्या होता…-गृहलक्ष्मी की कहानी
Hindi Kahani: ग़ालिब ने ठीक ही कहा थाहुई मुद्दत कि ग़ालिब मर गयापर याद आता है,वो हर इक बात पर कहनाकि यू होता तो क्या होता !गर उस दिन मैंने उसे रोक लिया होता तो…गर! आज वह दिन मुझे शिद्दत से याद आ रहा था।घण्टों हो गए थेहमें एक-दूसरे के साथ बैठे हुए।ये दूसरी बार […]
मेरे हिस्से में मां आई-गृहलक्ष्मी की कहानियां
पै-पै…!” Mother Story: “इधर ला …दवाई का नाम भी ठीक से नहीं पढ़ सकता है।”मंजू जी ने विजय को झिड़क कर बोला, आज दस दिन हो गए थे मंजू जी को अस्पताल में भर्ती हुए।एक तो उम्र ऊपर से ये बीमारी…उर्मिला और विजय दोनो जी-जान से मंजू जी की सेवा में लगे थे। मंजू जी […]
सुकून की नींद-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Motivational Story: रात के ग्यारह बजे रहे थे कमल अभी तक ऑफिस से नहीं आया था।शुक्ला जी हर आहट पर बाहर निकल आते।उन्होंने दरवाजे को धीरे से धकेला सड़क पर सन्नाटा पसरा हुआ था। अब तो उनके साथ-साथ उस दरवाजे को भी आदत पड़ गई थी कमल का इंतजार करने की। जैसे-जैसे घड़ी की […]
मेरे हिस्से में माँ आई-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Story of Mother: पै-पै…!” “इधर ला …दवाई का नाम भी ठीक से नहीं पढ़ सकता है।”मंजू जी ने विजय को झिड़क कर बोला, आज दस दिन हो गए थे मंजू जी को अस्पताल में भर्ती हुए।एक तो उम्र ऊपर से ये बीमारी…उर्मिला और विजय दोनो जी-जान से मंजू जी की सेवा में लगे थे। मंजू […]
अथ श्री दामाद कथा-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Story:“अतिथि देवो भव:” अर्थात अतिथि देवता के समान होता है और जहाँ देवी-देवताओं की बात हो वहाँ आदर-सत्कार और भोग-प्रसाद तो लाज़िमी है पर इस देश में अतिथियों के लिए एक कहावत यह भी है पहले दिन पाहुना, दूजे दिन ठेहुना और तीसरे दिन केहुना… अर्थात अतिथियों की सेवा पहले दिन सेवा दामादों की […]
