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जी हां! मैं डॉक्टर हूं: Hindi Vyangya
Ji Haa! Mein Hun Doctor

Hindi Vyangya: जी हां! मैं डॉक्टर हूं, ये वाली नहीं वो वाली, अब पूछिये वो वाली क्या होता है। भई इंसानों वाली नहीं किताबों वाली, तो क्या वो वाले किताबें नहीं पढ़ते हैं? पढ़ते हैं जनाब सच मानिए तो वही पढ़ते हैं, हम तो पढ़ कर भी अनपढ़ हैं। पूछिये क्यों? पूछिये-पूछिये, भई हम हर महीने करारे नोट जो नहीं कमा रहे। कमाते भी कैसे सरकार तो भूल ही गई है कि धरती पर इस नाम की भी एक प्रजाति होती है जिन्होंने पीएच.डी. की डिग्री दिन-रात की नींद बर्बाद करके प्राप्त की है। कसम से कितना हाथ-पैर जोड़कर पिता जी को पीएच.डी. करने के लिए तैयार किए थे। हमारे परम् पूज्य श्रद्धेय आदरणीय पिता जी ने हमारे नाम के आगे प्रोफेसर शब्द लगने के सपने देखने भी शुरू कर दिए थे पर हाय री किस्मत। सरकार ने एक बार भी हमारे बारे में नहीं सोचा। सोचने की फुर्सत उन्हें मिले भी तो कैसे उन्हें मनरेगा, चुनाव और अनाज बांटने से फुर्सत मिले तब न!
कभी-कभी सोचते हैं इससे अच्छा तो बीएड कर लिया होता कम से कम कहीं शिक्षण का काम तो कर रहे होते। इतनी भारी-भरकम डिग्री के साथ किसी छोटे-मोटे स्कूल में पढ़ाना भी शोभा नहीं देता, मन मारकर लेखन का कार्य शुरू कर दिया। पिताजी आज भी इस बात के लिए पानी पी-पीकर हमें कोसते हैं। खैर जिंदगी हमें आज भी चाय की तरह घूंट-घूंट कर के पी रही है। बात शिक्षा तक होती तब भी ठीक था पर अभी बेइज्जती होना बाकी ही थी।
हमारे घर के सामने एक खाली पड़ी जमीन पर किसी मान्यवर ने मकान बनाना शुरू किया। मकान एक गहन प्रक्रिया को पार कर पहले मंजिल तक पहुंचा ही था, उसी दौरान हमने अपने घर के मुख्य द्वार पर स्वर्ण अक्षरों में पति परमेश्वर के नाम के साथ पट्टिका में अपना नाम भी लिखवा दिया। अंग्रेजी में लिखे शब्दों ने लोगों के मन को इतना भ्रमित किया कि लोग उस भ्रम में दूर करने के लिए हमारे दरवाजे तक पूछने आ गये। हुआ कुछ यूं कि हमारे घर के सामने बन रहे मकान में काम कर रहे मजदूरों में एक मजदूर कुछ ज्यादा पढ़ा-लिखा था। ज्यादा मतलब अंगूठा लगाने वालों की जमात में वो अकेला कक्षा आठ तक पढ़ा था। अंग्रेजी का थोड़ा बहुत ज्ञान भी रखता था। ज्यादा नहीं पर जोड़-तोड़ कर शब्दों को बना भी लिया करता था। उसने मेरे अंग्रेजी भाषा में लिखे नाम के आगे डी.आर. शब्द का मतलब डियर से लगाया और अपने साथी मित्रों से इस बात की शर्त भी लगा ली, शर्त थी रु. 400 की। अब शंका का निवारण कौन करे, मेरे पति परमेश्वर के आगमन का इंतजार होने लगा। पति परमेश्वर के चरण रज धरती पर पड़ते ही वे उनकी ओर भागे। भागना भी था आखिर चार सौ रुपये की बात थी। पतिदेव एक पल के लिए सकपका गए और सोचने लगे क्या मोहल्ले वालों को भी इस बात की खबर लग गई कि हमनें कल ही आधा किलो टमाटर खरीदे हैं। बात टमाटर की नहीं बात उनके सौ रुपये होने की है। पतिदेव ने अपनी घबराहट को अपने रुमाल में समेटा और उनके यक्ष प्रश्न का बड़े धैर्य के साथ उत्तर दिया। उनका यह डियर-डियर ना होकर डॉक्टर था। मेरे पतिदेव ने उस वक्त मुझे जिस नजर से देखा, जानते थे अगर उन्होंने कुछ भी प्रतिक्रिया व्यक्त की तो खड़े-खड़े भस्म करने की शक्ति आज भी मुझ में है।
बेइज्जती होनी अभी और बाकी थी, हम जिस कॉलोनी में रहते हैं उस कॉलोनी का नाम लाल बाग है। लालबाग आप समझ ही सकते हैं हम अपने आपको कैसा महसूस करते होंगे। नेम प्लेट तो लगवा ली पर मुसीबतें अभी और भी खड़ी थी। हमारे सामने वाले जमीन पर बन रहे हैं मकान के मालिक सचमुच के डॉक्टर थे, सचमुच वाले इसलिए क्योंकि समाज डॉक्टर उन्हीं को मानता है। सुना था वह पेडियाट्रिक थे यानी बच्चों के डॉक्टर। समय बीतने के साथ कॉलोनी में धीरे-धीरे लोग एक-दूसरे को जानने और समझने लगे थे। एक दिन प्रात:काल भ्रमण के दौरान एक व्यक्ति ने मेरे घर की घंटी बजाई और उन्होंने बड़े ही विनम्र स्वर में मुझसे सुबह का अभिवादन किया। ‘बड़ी खुशी हुई आपसे मिलकर कि आप डॉक्टर हैं, रात-बिरात अगर हमें आपकी जरूरत पड़े तो कम से कम मोहल्ले में एक डॉक्टर तो रहेगा।Ó सुबह-सुबह ही बड़ा मूड खराब हुआ, मैंने उन्हें बड़ी विनम्रता के साथ जवाब दिया मैं वो वाली नहीं वो वाली डॉक्टर हूं, उन्होंने मुझे इस हिकारत की नजरों से देखा मानो मैंने कितना बड़ा अपराध कर दिया हो। अभी मेरे ऊपर आसमान फटना बाकी ही था। ‘मैडम हमने तो सोचा था आप महिलाओं की डॉक्टर हैं और आपके पड़ोसी बच्चों के डॉक्टर हैं, मुहल्ले में ही डॉक्टर उपलब्ध है। हमें दूर जाने की जरूरत नहीं। उनका मुहल्ले शब्द पर इतना जोर था कि मुझे मुफ्त का डॉक्टर सुनाई दिया। वो दिन था और आज का दिन मान्यवर ने कभी पलट कर भी नहीं देखा।
हमारे पतिदेव हंस-हंस कर लोट-पोट हो रहे थे। उन्होंने धीरे से फुसफुसाया, ‘हम सोच रहे हैं, तुम्हारे नाम के साथ डॉक्टर तो लिखा ही है हम अपने नाम के आगे कम्पाउंडर लिखवा लें। इस सीमेंट में जान है, इससे बने हमें अपने घर की नींव हिलती हुई नजर आ रही थी। फिलहाल हम अब दूसरी नेम प्लेट लगवाने का विचार कर रहे हैं।

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