Summary: किशोर के मन की उलझन
13–14 साल की लड़कियाँ भावनात्मक सुरक्षा, समझ और अपनापन पाने के लिए बड़ी उम्र के पुरुषों की ओर आकर्षित हो सकती हैं।
Teenage Girls Attraction to Older Men: 13 से 14 साल की उम्र बच्चों के लिए सिर्फ एक उम्र नहीं बल्कि उनमें शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल बदलावों का समय है। इस उम्र को बच्चों में टीनएज की शुरुआत मानी जाती है। इस उम्र के बच्चों के साथ एक बात बहुत प्रचलित है और वह यह है कि उन्हें अपने से बड़े लोग बहुत पसंद आते हैं। इस उम्र की लड़कियों को अपने से बड़ी उम्र के लड़के अधिक पसंद आते हैं। अगर इसके बारे में उनसे पूछा जाए तो उनका कहना है कि वह हमें समझते हैं। घर पर कोई हमें नहीं समझता पर वह हमें पूरी तरह समझते हैं इसलिए वह हमें बहुत पसंद है।
क्यों बड़ी उम्र के पुरुष टीनएज लड़कियों को पसंद आते हैं

परिवार से भावनात्मक दूरी: अगर टीनएज बच्चों को परिवार से भावनात्मक स्पोर्ट ना मिले या फिर उनके भावनाओं को परिवार के द्वारा ना समझा जाए तो बच्चा खुद को भावनात्मक रूप से आहत महसूस करता है। ऐसे में अगर कोई बड़ा व्यक्ति उनके भावनाओं को समझता है, उनके अंदर होने वाले बदलाव की बात करता है तो बच्चे के समझ में वह दुनिया का वह इंसान बन जाता है जो उसे बहुत ज्यादा प्यार करता है।
पिता के साथ दूरी: बेटियों का अपने पिता से दूरी का यह अर्थ नहीं कि वह अच्छे व्यक्ति नहीं है। बल्कि इसका अर्थ है कि पिता अपने बेटियों को ज्यादा अनुशासित करने का प्रयास करते हैं जो कि उनके बीच दूरी का कारण बनता है।
सुरक्षा का भ्रम: इस उम्र में लड़कियों को अपने उम्र के लड़के इतने समझदार नहीं लगते जो कि उनके भावनाओं और शारीरिक बदलाव को समझे। जबकि बड़ी उम्र के पुरुष यह समझते हैं और शांत भाव से उन्हें गाइड करने के साथ वह सुरक्षा प्रदान करते हैं जो सुरक्षा वह चाहती हैं। पर असल में वह नहीं समझते कि जिसे वह सुरक्षा समझ रही है असल में वह सिर्फ एक भ्रम है।
सोशल मीडिया और वेब सीरीज का असर: वर्तमान समय में सोशल मीडिया, फिल्म, नाटक या वेब सीरीज में ऐज गैप के अधिक होने को काफी कूल समझा जाता है। सोशल मीडिया और वेब सीरीज इस तरह के रिलेशनशिप को अधिक ग्लोरोफाई करके दिखाते हैं। जिसका बुरा असर टीनएज के बच्चों पर पड़ता है।
इस तरह के रिलेशनशिप के खतरे: इस तरह के रिश्ते में बच्चा भावनात्मक सुरक्षा के नाम पर एक ऐसे गलत रिश्ते में फंस जाता है जहां उसका शारीरिक और मानसिक शोषण होता है।
पेरेंट्स क्या करें ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर
समझदारी से काम ले: अगर माता-पिता बेटी की जासूसी करते हैं, शक करते हैं, चिल्लाते हैं या उन पर अधिक प्रतिबंध लगाते हैं तो पेरेंट्स द्वारा उठाए यह कदम उन्हें अधिक बगावती बनाते हैं।
क्या करें: अगर आपको लगता है की बेटी किसी से बात कर रही है तो उससे सीधा सवाल करें। बिना जज किए उसे सुनने की कोशिश करें।
पिता अपना संबंध सही करें: टीनएज के दौरान बच्चों को जितना मां के प्यार की जरूरत है उतना ही पिता के प्यार की भी है।
क्या करें: पिता को चाहिए कि वह हर रोज अपनी बेटी से बात करें। उनके भावनाओं को सुने, समझे। उस पर अनचाहे, अत्यधिक प्रतिबंध लगाने से बचें।
अपने बच्चों को अपनी बाउंड्रीज बनाना सिखाएं। उन्हें बताएं उनके लिए क्या सही है, क्या गलत है। किस तरह की बातें उन्हें सही लगने का भ्रम पैदा करता है। उनके शरीर में हो रहे बदलाव के बारे में उन्हें जागरूक करें। वह किस तरह अपने शारीरिक जरूरतो और भावनाओं को मैनेज करें उन्हें समझाएं उन्हें। सेक्स एजुकेशन भी दे।
