Hindi Motivational Story: उसकी मूर्छा टूटी, चिमचिमाती आँखों से उसने चारों ओर नज़र घुमाकर देखा। उसने ख़ुद को मंदिर की सीढ़ियों के बगल में पड़ा पाया। पास में गायें हरा चारा खा रही थी। थोड़ी दूर पर पंक्तिबद्ध भिखारी बैठे थे। दान पुण्य करने वाले उन्हें प्रसाद, पैसे, वस्त्र भेंट कर रहे थे। उसने उठना चाहा, लेकिन बदन में इतनी ताकत नहीं थी। अधलेटे ही उसने स्मृति पर ज़ोर डाला। यह स्थान कुछ जाना-पहचाना सा लगा। लेकिन उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। प्यास ज़ोरों की लगी थी। हलक सूख रहा था।
वह पूरी ताकत बटोर-कर उठा और लड़खड़ाते कदमों से पास ही नल पर गया, मुँह पर छींटे मारे, पानी पीया…अब थोड़ा चैतन्य हुआ। चारों ओर नज़र डालकर वह याद करने लगा। सहसा उसे कुछ याद आया। अरे, यह तो वही जगह है। वह बुदबुदाया, हाँ बिल्कुल वही जगह। उसके ज़हन में तीस साल पहले का दृश्य कौंध गया। सब कुछ स्पष्ट होते ही वह मायूस हो गया। निढाल होकर वहीं बैठ गया। वह समय का ही फेर था कि तीस साल पहले जिस मंदिर की सीढ़ियों से वह किसी के द्वार छोड़े गए नवजात शिशु को उठा लाया था, आज वही बुढ़ापे में उसे मंदिर की सीढ़ियों पर फेंक गया था।
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