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नवयुग की नारी—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Short Story: नव युग की नारी मैं रखती अब आगे की तैयारी हूँ ।माना पंख नहीं है मेरे,पर ख़ुद के सपने की परी हूँ ।।परिश्रम और लगन से अपनों के सपने पूरे करती हूँ ।नयी नयी कठिनाइयों से रोज़ दो दो हाथ मैं करती हूँ ।।मैं हूँ सुकुमार पर युद्ध भूमि में दुश्मन को […]

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लाल पानी—गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Social Story: सीता की अम्मा..कहाँ हो? कुछ सुनी हो..जो खलिहान वाला ठूठा पेड़ है वो भी डूब गया ।सन् ८३ के बाद ऐसा पहली बार हुआ है,बाढ़ भयंकर रूप ले रही है।हाँ सुन लिये…अब का करे हलक से पानी ना घोटें? इस कर्मनाशा के लाल पानी ने तो सच में हमरा करमें नाश दिया है ।गवना करके आये […]

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पावन प्रेम गंगा घाट सा-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Kahani: आप अकेले होकर भी अकेले नहीं हैं,यही तो बनारस की ख़ूबसूरती है, और यह अस्सी घाट गुंजायमान होते हुये भी यहाँ अलौकिक शांति है।धवला मन ही मन सोचते हुये प्रमुदित हो रही थी कि सहसा हृदय में एक टीस सी उठी, माँ गंगा को निहारते हुये नेत्रों से अश्रुधारा बह निकली।हे माँ …बस […]

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