Naya Sangeet Nayi Pehchan
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Hindi Social Story: सूत्रधार: आज दोपहर में ही अंकिता को लड़के वाले देखकर गए थे, और एक घंटे बाद ही उनका फोन आ गया।
ममता जी: क्या हुआ जी !? किसका फोन था?
घनश्याम जी: लड़के वालों का फोन था। अंकिता के लिए मना कर रहे हैं।
सूत्रधार: पापा की बात सुनकर छोटी बेटी आंचल गुस्से में तिलमिला गई।
आंचल: कुछ नया नहीं है पापा, ये तो रोज की बात है। दीदी के अपाहिज हाथ की वजह से उनसे शादी के लिए कोई हां नहीं कहेगा। मुझे तो ऐसा लगता है मैं भी दीदी की वजह से सारी जिंदगी कुंवारी ही रहने वाली हूं। पता नहीं इनकी कमियों की सजा मुझे क्यों मिल रही है।
ममता जी: आंचल! कोई इस तरह से अपनी बड़ी बहन के लिए बात करता है क्या?! थोड़ा तो सोचा कर!
आंचल: सही बोल रही हूं मम्मी, आपको नहीं पता अर्जुन के मम्मी पापा बार-बार पूछ रहे हैं कि, तुम्हारी बड़ी बहन की शादी कब होगी! अर्जुन की शादी के बाद उन्हें अपनी बेटी की भी शादी करनी है। पर वो ये भी चाहते हैं कि, मेरी बड़ी बहन की शादी पहले हो, ताकि उनके रिश्तेदारों में कोई बातें न बनाए। कल फिर अर्जुन के मम्मी मेरे से पूछेंगे कि लड़के वाले देखने आए थे तो क्या हुआ?! मैं फिर उन्हें वही जवाब दूंगी कि मेरी प्यारी दीदी के अपाहिज हाथ की वजह से एक बार फिर लड़के वालों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया।
सूत्रधार: रसोई में एक हाथ से बर्तन समेटती हुई अंकिता की आंखों से आंसू बह रहे थे। आंचल गुस्से में पैर पटकती हुई घर के बाहर चली गई।
घनश्याम जी: पता नहीं हमारी अंकिता की किस्मत में क्या लिखा है। इसके बेजान हाथ की वजह से इसे कितने दुख झेलने पड़ रहे हैं।
ममता जी: न जाने आंचल को भी क्या होता जा रहा है। इतना गुस्सा उसके अंदर भर गया है की कभी-कभी मुझे तो डर लगता है कि वो गुस्से में अंकिता को ज्यादा ना सुना द
सूत्रधार: आंचल के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था उसने अर्जुन के परिवार वालों से बात की और घर आकर अपना फैसला सुना दिया।
आंचल: मम्मी पापा मेरी अर्जुन के मम्मी पापा से बात हो चुकी है। वो शादी के लिए मान गए हैं। आप बस अंकिता दीदी को बोल दो कि ये कुछ समय के लिए यहां से चली जाएं और फिर जब मेरी शादी हो जाएगी उसके बाद वो यहां लौट सकती हैं। पर मेरी शादी होने तक ये यहां नहीं रहेंगी। मैं बहाना कर दूंगी कि ये अपने जरूरी काम से कुछ महीनों के लिए बाहर हैं।
ममता जी: कैसी बातें कर रही है आंचल!? अंकिता तेरी बड़ी बहन है, और तू उसे ही अपनी शादी में आने के लिए मना कर रही है। अरे, तो ये घर अंकिता का भी है। वो इस घर को छोड़कर कहां जाएगी।
घनश्याम जी: आप सही कह रही हो ममता जी। हमारे लिए हमारी दोनों बेटियां बराबर है। अगर छोटी बेटी शादी करना चाहती है, तो क्या! इसके लिए हम अपनी बड़ी बेटी को घर से निकाल दें। कभी नहीं मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा।
अंकिता: मम्मी पापा आंचल शायद ठीक कह रही है, और फिर कुछ दिनों की ही तो बात है, अगर मेरे यहां से थोड़े दिनों के लिए चले जाने से आंचल की शादी ठीक-ठाक हो जाती है, तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है। मैं कुछ दिनों बाद लौट आऊंगी। आंचल मेरी छोटी बहन है और इसकी खुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं।
सूत्रधार: अंकिता बहुत समझदार थी। उसने कुछ दिनों के लिए चले जाने में ही सबकी भलाई समझी और फिर अपने मम्मी पापा को समझाकर अंकिता कुछ दिनों के लिए अपने घर परिवार से दूर हो गई। अंकिता के मम्मी पापा लगातार उससे फोन पर बात करते रहते थे, और वो उन्हें तसल्ली देती थी कि वो बिल्कुल ठीक है। अंकिता अपनी सहेली कंचन के साथ रह रही थी। एक दिन अंकिता मेट्रो में सफर कर रही थी। उसने देखा मेट्रो में कुछ लड़के लड़कियां ग्रुप बनाकर एक नए ही स्टाइल के रॉकिंग म्यूजिक के साथ गिटार पर भजन गा रहे हैं। उनके साथ मेट्रो में मौजूद सभी यात्री भी गुनगुना रहे थे और डांस कर रहे थे।
अंकिता: यह लोग तो बहुत यूनीक स्टाइल में भजन गा रहे हैं।
कंचन: तुझे नहीं पता आजकल इस तरह का भक्ति संगीत बहुत लोकप्रिय है। खासकर आजकल के युवाओं में इस तरह के भक्ति संगीत को “भजन क्लबिंग” के नाम से जाना जाता है।
सूत्रधार: थोड़ी देर बाद भजन क्लबिंग ग्रुप के मेंबर आपस में बातें करने लगे।
एक लड़का: अरे यार! आज मेरा गला बहुत खराब हो रहा है काफी बैठ गया है पर शाम का शो हम कैसे करेंगे।
एक लड़की: आकाश तुम हमारे भजन क्लबिंग ग्रुप के मुख्य गायक हो। बहुत मुश्किल हो जाएगी। हम सब तो संभाल नहीं पाएंगे, अब कहां से ढूंढे नया सिंगर
कंचन: अंकिता तू भी तो भजन गाती है, तू इनसे बात कर। वैसे भी तो तुझे जॉब की तलाश है। क्या पता! तू इनके साथ जुड़ जाए तो तेरे लिए तरक्की का एक नया रास्ता खुल जाएगा
अंकिता : नहीं नहीं, ये तू क्या कह रही है। ये लोग तो बहुत अच्छा गाते बजाते हैं। मैं तो बहुत साधारण से भजन गाती हूं, और फिर मेरे हाथ की वजह से कहीं इन लोगों ने मुझे गाने के लिए ही मना कर दिया तो मुझे बहुत दुख होगा।
कंचन: पर एक बार बात करने में क्या हर्ज है और फिर यह तो भक्ति संगीत है इसमें तो मन के भाव देखे जाते हैं।
सूत्रधार: अंकिता और कंचन की बातें ग्रुप का एक लड़का रोहित सुन लेता है।
रोहित: आप बिल्कुल सही कह रही हैं। हमारे भजन क्लबिंग ग्रुप में हुनर देखा जाता है। आप भी हमारे ग्रुप में जुड़ सकती हैं। वैसे भी हमें एक सिंगर की जरूरत है अगर आप भजन गाती हैं तो हमारी बहुत हेल्प हो जाएगी।
सूत्रधार: अंकिता थोड़ी झिझक रही थी पर सबके प्रोत्साहित करने पर वो भजन गाने के लिए तैयार हो गई। अंकिता ने इतने सुंदर तरीके से भजन गाए कि सब उसकी वाहवाही करने से नहीं रुके।
अंकिता के सुर में दर्द था, मानो भक्ति गीत के माध्यम से वह भगवान तक अपने दुख को पहुंचाना चाहती थी।
उसकी आवाज़ जैसे ही मेट्रो में गूँजने लगी, यात्रियों की बातें थम गईं।
लोगों ने मोबाइल निकालकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
कुछ की आँखें बंद थीं, कुछ हाथ जोड़कर गुनगुना रहे थे। भजन समाप्त होते ही मेट्रो में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।
ग्रुप के सभी सदस्यों ने अंकिता की बहुत प्रशंसा की।
आकाश: अंकिता तुम बहुत अच्छा गाती हो मैं चाहता हूं हमारे आज शाम होने वाले इवेंट में हमारे साथ परफॉर्म करो।
मेघा: आकाश क्यों ना हम परमानेंट ही अंकिता को अपने ग्रुप में फीमेल सिंगर के लिए ऐड कर ले। मैं तो तुम जानते हो कोरस पर रहती हूं, फीमेल सिंगर की कमी भी पूरी हो जाएगी।
रोहित: हां आइडिया बहुत अच्छा है क्यों आकाश।
आकाश: बिल्कुल सही कहा अब से अंकिता हमारे भजन क्लबिंग ग्रुप की मेंबर है।
अंकिता: थैंक यू कंचन तुमने भी मुझे बहुत हौसला दिया।
कंचन: मैंने तो बस दोस्ती का फर्ज निभाया। बाकी तू बहुत अच्छी हो इसलिए, भगवान ने भी तेरा साथ दिया। चल अब एक नई सफलता की उड़ान भरने का समय आ गया है। नया संगीत तुझे नई पहचान देगा।
सूत्रधार: उस दिन के बाद अंकिता ने अपने अपाहिज हाथ को कमजोरी मानना बंद कर दिया। एक हाथ में माइक पकड़ कर अपनी आवाज के जादू से वो इतने सुंदर और मधुर भजन गाती थी, की सब उसका भजन सुनकर उसकी बहुत प्रशंसा करते थे। अंकिता की बहन की शादी हो चुकी थी, कई बार अंकिता के मम्मी पापा उसे वापस आने के लिए कह चुके थे। आज अंकिता वापस आ रही थी, पर अचानक उसका एक बहुत बड़ा शो बुक हो गया।
आकाश: अंकिता एक लॉन्ज में आज हमें बहुत बड़ा इवेंट करना है। किसी कपल की शादी को वन मंथ हुआ है तो वो सेलिब्रेट करना चाहते हैं। इसलिए तुम कल अपने मम्मी पापा से मिलने चली जाना।
अंकिता: हां हां कोई बात नहीं। ये भी जरूरी है मैं मम्मी पापा को बोल दूंगी।
सूत्रधार: अंकिता नहीं जानती थी कि आज वो जिस लॉन्ज में शो करने के लिए जा रही है, वह पार्टी किसी अनजान की नहीं बल्कि उसकी सगी बहन आंचल और जीजू विनोद ने रखवाई थी। इस पार्टी में आंचल के ससुराल वालों के साथ-साथ उसके मम्मी पापा भी मौजूद थे। घनश्याम जी और ममता जी अपनी बड़ी बेटी का नया रूप देख बहुत खुश होते हैं, और गर्व से उसे ढेर सारा आशीर्वाद देते हैं। सब जान चुके थे कि अंकिता कौन है! पर अंकिता ने बात को संभाल लिया।
अंकिता: मेरा अर्जेंट शो था। मैं चाहती थी कि मैं शादी में मौजूद रहूं पर मेरा जाना जरूरी था।
विनोद: कोई बात नहीं साली साहिबा, अब तो आप इसी शहर में हो। एक काम करते हैं। हम एक ग्रांड पार्टी रखेंगे, जिसमें आपका भजन क्लबिंग ग्रुप खूब बढ़िया तरीके से भजन गाएगा। क्यों आकाश जी।
आकाश: बिल्कुल विनोद जी। अंकिता के रिश्तेदार…मेरे ही रिश्तेदार…?! मेरा मतलब है! हमारा ग्रुप जरूर परफॉर्म करेगा।
सूत्रधार: आकाश अंकिता को पसंद करने लगा था, और वो अंकिता को प्रपोज कर चुका था। अंकिता की सफलता ने उसकी कमी को छुपा दिया था, और अब उसके जीवन को एक नई राह मिल चुकी थी। आंचल को भी अपनी गलती का एहसास हो जाता है और वो भी अपनी बड़ी बहन से माफी मांगती है।