friend squirrel
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Funny Stories for Kids: एक बार की बात, निक्का अपनी नानी के गाँव जादूटोला में गया । नानी का घर बहुत बड़ा था । सामने था खूब बड़ा सा पीपल का पेड़ । उस पर एक गिलहरी दिन भर चढ़ती-उतरती और दौड़ती-भागती रहती ।
निक्का की उस गिलहरी से दोस्ती हो गई । बड़ी पक्की दोस्ती । और इस दोस्ती का राज क्या था । जानना चाहोगे ? हालाँकि तुम्हें यकीन नहीं आएगा ।
इस दोस्ती का राज था, निक्का की मूँगफलियाँ खाने की आदत । वह पीपल के पेड़ के नीचे कि ताब लेकर बैठता । कि ताब पढ़ता रहता । साथ ही साथ मूँगफलियाँ भी खाता जाता ।

पेड़ पर रहने वाली गिल्लू गिलहरी को निक्का की यह आदत भा गई । वह भी जब-तब निक्का के आगे दो पैरों पर बैठकर दाँत किट-किट करके मूँगफली माँग लेती । निक्का मूँगफली फेंकता तो झट उठाकर दौड़ जाती । होते-होते यह दोस्ती इतनी पक्की हो गई कि गि लहरी निक्का के कंधों पर भी उछलने-कूदने लगी ।

फिर निक्का भी उसकी देखा-देखी, पेड़ पर चढ़कर कूदने लगा । इस खेल में उसे बड़ा मजा आता । निक्का को पेड़ पर चढ़ते और कूदते देख, गिल्लू गिलहरी की आँखों में भी चमक आ जाती । मानो वह चुपचाप कह रही हो, ‘निक्का , अब तुम सच्ची -मुच्ची मेरे पक्के दोस्त बन गए हो !’ मगर इसी उछल-कूद में निक्का को एक दिन ऐसी चोट आई कि नानी तो बुरी तरह परेशान हो गई । हुआ यह कि निक्का हमेशा की तरह पेड़ पर चढ़कर कूद रहा था कि अचानक एक डाली में उसका पैर उलझ गया । निक्का सिर के बल गिरा ।

यह तो अच्छा हुआ कि उसने अपने हाथों का सहारा ले लिया, नहीं तो उसका सिर खूनम-खून हो जाता । तो भी निक्का को खासी चोट आई थी ।
उसके हाथ-पैर, कंधे बुरी तरह छिल गए थे । और फिर ऐसा बुखार आया कि उतरने का नाम ही नहीं लेता था ।

कोई सात दिन निक्का चारपाई पर पड़ा रहा । और इन सातों दिन गिलहरी या तो निक्का के सि रहाने बैठी रही, या फिर उसकी चारपाई के इर्द-गिर्द दौड़ती रही, ताकि निक्का का मनोरंजन होता रहे और वह अपना दुख भूल जाए ।

हकीम रामदित्ता मल ने निक्का को मूँगफली खाने की मनाही कर दी थी । निक्का ने चारपाई पर लेटे-लेटे ही नानी को पुकारकर कहा, “नानी-नानी, जरा गिल्लू को तो मूँगफली लाकर दो ।”
नानी मूँगफली ले आईं । गिलहरी के बिल्कुल पास लाकर रख दीं, पर गिल्लू गिलहरी ने मूँगफली को छुआ तक नहीं ।

सात रोज बाद निक्का ठीक हुआ, तो फिर अपनी कहानियों की किताब लेकर उसी पेड़ के नीचे जा बैठा । उसके पास थोड़ी मूँगफलियाँ भी थीं । वह लगा तो झट उछलती-कूदती गिल्लू गिलहरी भी वहाँ आ गई । निक्का के साथ बैठकर मूँगफलियाँ खाने लगी ।
निक्का को बड़ी हैरानी हुई, “अरे वाह ! अब गिल्लू गिलहरी मुझे देखकर भागती नहीं हैं । मेरे साथ ही साथ मूँगफलियाँ खा रही हैं ।” यहाँ तक कि निक्का के कंधों पर ही कूदते हुए वह ऐसा धमाल मचाती कि निक्का का हँसते-हँसते बुरा हाल हो जाता ।

तभी खेल-खेल में निक्का ने गि लहरी पर एक छोटी-सी कवि ता भी बना ली, जिसे वह झूम-झूमकर गाया करता था – आ जा, आ जा चुस्त गिलहरी, नानी बोलीं, “अरे निक्का , तू बिल्कुल चिंता न कर । मैं तेरे जाने के बाद गिल्लू का पूरा ध्यान रखूंगी ।”
और सचमुच ऐसा ही हुआ । निक्का के बाद भी गिल्लू गि लहरी उसी तरह किट-किट करती हुई नानी के आगे आ खड़ी होती । मानो पूछ रही हो, “क्यों नानी, अब निक्का कब आएगा ?”
इस पर नानी प्यार से गिल्लू को गोद में लेकर उसी तरह पुचकारने लगती, मानो वह निक्का को पुचकार रही हो !

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ