The strange spectacle of the chair
The strange spectacle of the chair

Funny Stories for Kids: छोटा-सा निक्का कुछ अजीब ही था । उसके मन में बड़ी अजीब-अजीब बातें आया करती थीं । एक दिन की बात, निक्का अपने कमरे में कुर्सी पर बैठा कहानियों की कि ताब पढ़ रहा था । बड़ी ही अनोखी कहानियों की किताब । उसमें एक घुम्मू चाचा थे । वे अपने खटोले पर बैठे-बैठे उड़ते रहते थे । उड़ते-उड़ते सारी दुनिया की सैर कर आते थे ।

निक्का को घुम्मू चाचा की कहानियाँ इतनी अच्छी लगीं कि वह उनमें पूरी तरह खो गया । कहानियों की कि ताब उसने बंद की और थोड़ी देर आँखें बंद करके कुर्सी पर बैठा-बैठा सुस्ताने लगा ।
तभी अचानक उसके मन में आया, ‘काश, यह कुर्सी भी उड़ने लगे, घुम्मू चाचा के खटोले की तरह ! फिर तो मैं झटपट सारी दुनिया की सैर करके आ सकता हूँ ।’

और सचमुच जैसे ही निक्का ने यह सोचा, उसकी कुर्सी अपनी जगह से हिली और फि र उड़ने लगी । उड़ते-उड़ते वह कमरे से निकली और हवा में उठ गई । उठती चली गई । और फिर बड़ी तेजी से उड़ने लगी । देखकर निक्का भी अचरज में पड़ गया । अरे, यह तो बिल्कुल वही हो गया, जो उसने सोचा था । उसकी कुर्सी अब बड़े मजे में उड़ रही थी, बिल्कुल घुम्मू चाचा की कहानियों वाले खटोले की तरह ।
उसकी चाल लगातार तेज, और तेज होती जा रही थी, और अब वह बिल्कुल हेलीकॉप्टर की तरह सबके घरों के ऊपर से उड़ती हुई जा रही थी ।

देखकर निक्का को बड़ा मजा आ रहा था । पर जो जमीन पर से उसे देख रहे थे, वे सोच-सोचकर चकरा रहे थे, ‘अरे, अरे, यह क्या ? देखो, यह कुर्सी पर बैठा हुआ लड़का उड़ रहा है । भई, यह क्या तमाशा है । कहीं यह लड़का गिर न पड़े !’
निक्का के दोस्त नीचे से जोर-जोर से चीख-चि ल्ला रहे थे, “निक्का , ध्यान से बैठे रहना । मजबूती से कुर्सी के हत्थे पकड़े रहना । कहीं गिर न पड़ो । देखो, ऊपर हवा तेज है, बड़ी तेज । अपना खयाल रखना ।”
होते-होते निक्का के घर के आसपास तो मेला जमा हो गया । हजारों-लाखों लोग इकट्ठे हो गए । सबकी नजर निक्का और उड़ती हुई कुर्सी पर थी । सब सोच रहे थे, ‘अरे-अरे, यह क्या ? हमने तो भई, ऐसा अजूबा पहले कभी देखा नहीं ।’

बात धीरे-धीरे अखबारों के दफ्तरों तक पहुँची, टीवी चैनलों में भी । सारे के सारे कैमरे अब निक्का की कुर्सी की ओर लगे थे और निक्का मजे से हँसता-गाता हुआ हवाओं से बात कर रहा था । चाहें ऊँचाई से ही सही, वह सारी दुनिया की एक झलक देख पा रहा था । लोग उसकी सलामती की दुआएँ कर रहे थे ।

कुछ लोगों ने हवन और यज्ञ भी शुरू कर दिया था । दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक ये अटकलें लगाने में लीन थे कि अरे भई, यह कुर्सी उड़ी तो उड़ी कैसे ?
उधर तेज हवा के झोंकों में निक्का को नींद आ गई । टीवी के कैमरों ने यह देखा कि निक्का कुर्सी पर बैठा-बैठा सो गया है, तो उन्होंने अपने समाचारों में बताया । लोग चिंता कर रहे थे, ‘हाय-हाय, निक्का गिर न जाए ।…अरे भैया, कहीं हमारा निक्का गिर न जाए !’
निक्का के दोस्तों ने फिर से जोर-जोर से चिल्ला कर निक्का को जगाया, ‘जागो निक्का , जागो ! वरना बड़ा खतरा है । तुम गिरे तो भैया, हाथ-पैर सलामत न रहेंगे । इसलिए होशियार रहो कि कहीं कोई चूक न हो जाए ।”
शोर सुनकर निक्का की नींद खुल गई और देखने वालों की जान में जान आई ।

आखि र आधी रात को सारी दुनिया का चक्कर लगाकर कुर्सी वहीं आ गई, जहाँ से उड़ी थी ।
निक्का ने देखा, उसके घर के चारों ओर लोगों का भारी हुजूम था । टीवी वाले अपने-अपने भारी-भरकम कैमरे लि ए खड़े थे । निक्का को अपनी जादुई कुर्सी पर बैठे-बैठे नीचे उतरते देखा, तो सारे टीवी वालों ने उसे घेर लि या, “क्यों निक्का , तुम्हें कैसा लग रहा है ? ऊपर से दुनिया कैसी लगती थी ? कहीं तुम्हें चक्कर तो नहीं आए ?”

निक्का को कुछ समझ में नहीं आ रहा था । बोला, “आप लोग क्या कह रहे हैं, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है । हाँ, मैंने एक सपना तो देखा था कि मैं कुर्सी पर बैठा-बैठा उड़ रहा हूँ । इससे ज़्यादा मुझे कुछ याद नहीं है ।”
टीवी वालों ने यही बात अपनी खबरों में बताई । यही बात अखबारों की बड़ी -बड़ी सुर्खि यों में छपी कि धरती का एक छोटा सा बच्चा , जिसका नाम निक्का है, अपनी कुर्सी पर बैठा-बैठा अंतरिक्ष में हो आया । पर इसका क्या जादू है, कि सी को पता ही नहीं । बड़े-बड़े वैज्ञानिकों की समझ में भी कुछ नहीं आ रहा ।

अगले दिन दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिकों ने निक्का को घेर लि या । वे तरह-तरह के परीक्षण करके यह जानने की कोशि श करने लगे कि निक्का की कुर्सी उड़ी तो उड़ी कैसे ?
और निक्का सब कुछ भूल अपने होमवर्क की तैयारी में जुटा है । सबको यों खामखा सिर खपाते देख, वह धीरे से हँस पड़ता है ।

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ