Mobile Effect on Children Height
Mobile Effect on Children Height

Overview:

साल 2021 में हुए नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में वयस्कों की औसत लंबाई कम हो रही है। देश में आमतौर पर कई लंबाई के लोग हैं। जिसका कारण अलग-अलग जेनेटिक ग्रुप हैं। लेकिन लंबाई घटने के पीछे गलत लाइफस्टाइल और पोषण काफी हद तक जिम्मेदार है।

Mobile Effect on Children Height: बच्चों की हाइट न बढ़ना हर माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। बच्चों की बिगड़ी हुई दिनचर्या, पोषक तत्वों की कमी जैसे कई कारण इसके पीछे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इसका एक कारण मोबाइल का ज्यादा उपयोग करना भी है। जी हां, भले ही इसके तार आपस में सीधे न जुड़ें, लेकिन कहीं न कहीं दोनों का कनेक्शन गहरा है। जिसकी जानकारी होना, हर पेरेंट्स के लिए जरूरी है।

जानिए लंबाई में आई कितनी कमी

भारत में वयस्कों की औसत लंबाई कम हो रही है।
The average height of adults in India is decreasing.

साल 2021 में हुए नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे के अनुसार भारत में वयस्कों की औसत लंबाई कम हो रही है। देश में आमतौर पर कई लंबाई के लोग हैं। जिसका कारण अलग-अलग जेनेटिक ग्रुप हैं। लेकिन लंबाई घटने के पीछे गलत लाइफस्टाइल और पोषण काफी हद तक जिम्मेदार है। भारत में वयस्क पुरुषों की लंबाई में औसतन 1.10 सेंटीमीटर की कमी आई है। वहीं वयस्क महिलाओं में यह आंकड़ा 0.42 सेंटीमीटर का है।

यह कनेक्शन समझना है जरूरी

अब बात करते हैं मोबाइल और लंबाई के बीच कनेक्शन की। दरअसल, लंबाई सीधे तौर पर मोबाइल से नहीं, बल्कि नींद की कमी से प्रभावित हो सकती है। मायो क्लिनिक के एक शोध के अनुसार नींद की कमी से ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन यानी एचजीएच का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है। यह हार्मोन लोगों की लंबाई बढ़ने में मदद करता है। एचजीएच मस्तिष्क में पिट्यूटरी ग्रंथि से बनता है। एचजीएच हार्मोन रात में नींद के दौरान स्रावित होता है। इस दौरान यह हार्मोन हड्डियों, ऊतकों और मांसपेशियों का विकास करता है। लेकिन जो बच्चे पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं, उनमें इस हार्मोन का स्तर भी कम होने लगता है। जिससे बच्चों का विकास और लंबाई प्रभावित होती है।

पांच मिनट से घंटों की स्क्रॉलिंग

यह बात सच है कि लंबाई पर सबसे ज्यादा असर आनुवंशिकी का पड़ता है।
It is true that genetics has the greatest impact on height.

यह बात सच है कि लंबाई पर सबसे ज्यादा असर आनुवंशिकी का पड़ता है। जीन वेरिएंट बच्चों के विकास के साथ ही उनकी लंबाई को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। लेकिन ग्रोथ हार्मोन के कम स्तर से लंबाई रुकने की आशंका बढ़ सकती है। इन दिनों बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया पर बिजी रहते हैं। पांच मिनट से कब एक से डेढ़ घंटा हो जाता है, इस बात का उन्हें अंदाजा ही नहीं लगता। ऐसे में वे देर रात तक नहीं सोते हैं। जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है और ग्रोथ हार्मोन कम बनता है।

मेलाटोनिन को रोकती है रोशनी

स्मार्टफोन, लैपटॉप, कंप्यूटर सहित अन्य डिजिटल उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन को कम करती है। यही कारण है कि देर रात तक मोबाइल देखने से नींद बाधित होने लगती है। इससे नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है। इतना ही नहीं मेलाटोनिन की कमी से टाइप 2 डायबिटीज, हार्ट डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

नींद की कमी से दूसरे असर भी

नींद की कमी सिर्फ बच्चों की हाइट को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि बच्चों की मानसिक सेहत पर भी असर करती है। नींद की कमी से बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है। वे ठीक से सामंजस्य नहीं बैठा पाते। उनकी क्रिएटिविटी कम होने लगती है। किसी भी बात पर फोकस करने में परेशानी आने लगती है। उन्हें नई बातें सीखने में परेशानी होने लगती है। नींद की कमी से बच्चों के स्वभाव पर भी नकारात्मक असर होता है। वे चिड़चिड़े रहने लगते हैं। साथ ही मूड स्विंग की समस्याएं होने लगती हैं।

मैं अंकिता शर्मा। मुझे मीडिया के तीनों माध्यम प्रिंट, डिजिटल और टीवी का करीब 18 साल का लंबा अनुभव है। मैंने राजस्थान के प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थानों के साथ काम किया है। इसी के साथ मैं कई प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों की एडिटर भी...