Prem Beej
Prem Beej

Hindi Social Story: नीरा का सिर दर्द से फटा जा रहा था। सुबह से पच्चीसों कॉल कर चुकी थीं उसकी मम्मी। हर बार सिर्फ एक ही बात… “शादी के लिए हांँ कर दो। तुम्हें कोई पसंद है तो बता दो।”

वो थक गई थी अब मांँ की उन्हीं बातों से।

“अब तू अठाईस की हो गई है। पढ़ाई भी पूरी कर ली और शहर में नौकरी भी करती है। तू जो चाहती थी सब तो कर लिया है बिटिया अब तो शादी के लिए हांँ कर दे।”

“मांँ  प्लीज़ अभी मैं शादी के रिश्ते में नहीं बंधना चाहती।”

“अभी रिश्ते आ रहें हैं और अच्छा लड़का घर परिवार भी मिल जाएगा। कुछ सालों बाद अच्छा रिश्ता मिलना मुश्किल हो जाएगा। समझती क्यों नहीं है ? हर चीज की उम्र होती है। शादी समय पर ही हो जानी चाहिए।”

झल्ला कर बोल उठी थी नीरा 

“मुझे अभी शादी नहीं करनी है तो नहीं करनी है। आप समझती क्यों नहीं हैं। यहांँ काम की टेंशन अलग है और आप बार-बार ये शादी की टेंशन देकर मुझे और परेशान कर रही है।”

गुस्से में नीरा ने फोन काट तो दिया था पर उसे पता था उसके इस व्यवहार से उसकी मांँ बहुत दुखी हो जाती हैं और घंटों रोती रहती हैं पर वो भी क्या करे उसके भी सपने हैं शादी के पर उसे समझने वाला उस जैसा कोई मिले तब ही वो शादी करने कै तैयार होगी लेकिन पहले करियर बनाना है। उसे अपना घर और गाड़ी लेनी है शादी से पहले।

 पुराने जमाने की औरतों की तरह अपने पति पर निर्भर नहीं रहना चाहती वो। आज की पढ़ी लिखी लड़की है जो रोटी भले ना बना सकती है पर रोटी कमाने के काबिल तो है। उसे पहले अपनी मांँ का ऑपरेशन भी करवाना है जो पैसों के अभाव से लंबे समय से टाल रखा है।

 वो किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती। शादी वो ऐसे लड़के से ही करेगी जो उसकी मांँ की जिम्मेदारी भी उठाने दे उसे। ऐसा नहीं कि शादी के बाद नौकरी तो करने दे पर उसके पैसों पर अपना अधिकार जमाए।

इधर बॉस के बेटे की फटकार अलग सुनने को मिली थी आज सुबह ऑफिस आते ही।

“यह तुम्हारे आने का समय है? आज भी आधा घंटा लेट हो गई। रोज रोज ऐसा नहीं चलेगा। तुमसे काम नहीं हो रहा है और तुम समय पर ऑफिस नहीं आ पा रही हो तो रिजाइन कर दो। मैं पापा से बात कर लूंगा तुम इस नौकरी के काबिल नहीं हो।”

वो मुट्ठी भींच कर रह गई थी। गुस्सा आ रहा था खुद पर  क्यों रोज देर कर देती है ऑफिस आने में और उससे भी ज्यादा इस खडूस बॉस पर आ रहा था जो उम्र में उससे ज्यादा बड़ा तो नहीं था पर अकड़ देखो इसकी। प्यार से भी तो बोल सकता है। लड़कियों से भला कोई ऐसे बात करता है। नौकरी कैसे रिजाइन कर दूंँ इसके बाप ने मुझे नौकरी दी है मेरी योग्यता देखकर। वो कंपनी के काम से बाहर क्या गए हैं ये रौब जमा रहा है सब पर और खासकर मुझ पर।

मकान मालिक भी सुबह से किच किच कर रखा था।

 “इतनी तेज गाने बजाने की आवाज से हमारी नींद खराब कर देती हो। तुम हमारा घर खाली कर दो और कोई दूसरी जगह चली जाओ। हमको ऐसा किराएदार हमारे घर में नहीं चाहिए जो हमें ही ना सोने दे।”

वो क्या करे उसकी तो सुबह  शास्त्रिय संगीत और अनूप जलोटा के भजनों को सुने बिना होती ही नहीं थी।

बचपन से उसने अपने घर में वही माहौल देखा था सुबह चार बजे बिस्तर से उठते ही उसके पिता टेपरिकॉर्डर ऑन कर देते थे और  घर भक्तिमय हो जाता था।

 मांँ के साथ मंदिर, कीर्तन और जागरण में जाना उसकी दिनचर्या में शामिल था पर यहांँ बंबई जैसे बड़े शहर में सुबह की हबड़ तबड़ और व्यस्त जीवन शैली में किसी को इन सब की फुर्सत ही कहांँ थी। यहांँ के लोग वैसे भी जो रात को देर से सोते थे वो सुबह देर से ही उठते थे। 

वो आज की वो युवा थी जो आधुनिकता के साथ साथ अपने संस्कारों को भी जीवित रखे हुए थी। कितनी भी ठंड हो वो सुबह नहा-धोकर पूजा करने के बाद ही स्कूल कॉलेज जाया करती थी और अब  ऑफिस भी वो पूजा करने के बाद ही जाया करती चाहे थोड़ी देर ही हो जाए।

वो इतनी जल्दी हार मान कर अपने शहर पटना वापस नहीं जाएगी जहांँ से आंँखों में सपने लिए वो मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने आई है।

रीना को परेशान देखकर अंशिका उसके सिर पर हाथ फेरते हुए बोली…

“रीना क्या हुआ यार बॉस के बेटे की बातों से परेशान मत हुआ कर वो तो ऐसे ही सब पर चीखता चिल्लाता हैं। वैसे दिल का इतना बुरा भी नहीं हैं। वैसे बड़ा ही हैंडसम है । ऑफिस की सारी लड़कियां इस पर मरती हैं पर यह किसी को भाव ही नहीं देता।”

“तो मैं क्या करूं? मरती हैं तो मरने दो। मेरी जगह कोई सुंदर स्मार्ट लड़की रखने की सोच रहा होगा। तभी मुझे रिजाइन करने का बोल रहा है‌‌।”

“छोड़ यार ऐसे ही गुस्से में बोल रहा होगा। चल कॉफी पी कर आते हैं और मूड फ्रेश करने को आज शाम को चलना मेरे साथ एक ऐसी जगह जहांँ जाकर तेरी सारी टेंशन छू मंतर हो जाएगी ‌।”

रीना को लगा बाकी शहर की लड़कियों की तरह वो किसी क्लब या बार में जाने की बात कर रही है जहांँ लड़कियांँ और लड़के नशे का सहारा लेकर थोड़ी देर के लिए मस्त हो झूमते हैं और सारी हदें पार कर देते हैं। 

 उसने मुंबई शहर आते वक्त खुद से वादा किया था कि वह कभी इन सब चक्कर में नहीं फंसेगी। वो जानती थी एक बार अगर नशे की आदत लग जाए तो पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है। 

“नहीं यार मैं नहीं जाऊंगी और हांँ तू भी इन क्लब और नशे से दूर ही रहा कर। मैं तो घर जाकर थोड़ी देर भजन सुन लूंगी तो रिलैक्स हो जाऊंगी।”

“भजन!! हांँ मैं भी तो वही कह रहीं हूं जिसे सुनने से बड़ा ही रिलैक्स होता है। मैं उसी भजन क्लबिंग चलने को ही तो कह रही हूंँ।”

कॉफी पीते हुए वो अंशिका की बात सुनकर बड़ा ही हैरान हो रही थी। क्लब और भजन दोनों का क्या संबंध। उसने अपने मन मस्तिष्क में क्लब शब्द का जो चित्रण कर रखा था वो तो वैसा ही था जैसा फिल्मों में और टी वी सीरियल में दिखाया जाता है। लड़कियांँ छोटे कपड़े पहनकर और शराब पीकर लड़कों के साथ नाचती हैं। लड़के जिसका गलत फायदा उठाते हैं।

“चल अभी फटाफट काम पूरा करते हैं वरना ये अजित सर फिर से डांँट लगाएंगे और तेरा सिर दर्द बढ़ जाएगा।”

शाम को नीरा अंशिका के साथ ऐसी जगह पर थी जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। शहर के बड़े से मॉल के टॉप फ्लोर पर बहुत सारे उसी की उम्र के लोग जमा थे। कुछ पल तो वो ठिठक गई। ये कहांँ आ गई मैं?

अंशिका ने उसे अंदर आने का इशारा किया। 

माहौल बहुत ही अच्छा लग रहा था। बड़ा सा हॉल था जहांँ कुर्सियों पर बैठे कुछ लड़के लड़कियांँ हाथ में गिटार लिए भजन को पॉप म्यूजिक की तरह गा रहे थे। 

 हरे रामा हरे कृष्णा 

उन्हीं के पीछे वहांँ जमा सभी लोग गा रहे थे। उनके एक हाथ में मोबाइल था जिस पर वो विडियो बना रहे थे फोटो खींच रहे थे और  फेसबुक  इंस्टाग्राम पर पोस्ट भी कर रहे थे। हरे रामा हरे कृष्णा करते हुए मस्ती में झूम रहे थे।

 भगवान का नाम उनका जाप इस तरह भी किया जा सकता है ये उसने कभी सोचा भी नहीं था।

पहले तो उसे थोड़ा अजीब लगा यह सब और वो वापस जाने को हुई तो अंशिका ने उसका हाथ पकड़ लिया।

” अरे! बैठ देख  सबसे आगे कौन बैठा है?”

नीरा ने अपना चश्मा सही करते हुए बड़े गौर से देखा।

“अरे!ये तो अजीत सर हैं। ये यहां भी। चल वापस चलते हैं।”

“हर फ्राइडे ये यहांँ आते हैं। यह इन्हीं का आइडिया है। पिछले साल ही अमरीका से आए हैं।”

“यहां भजन कीर्तन करके भी इतना गुस्सा करते हैं।”

“अभी जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है। सारा काम इन्हें ही देखना पड़ रहा है। चल छोड़ यह सब बात और इन्जॉय कर।”

नीरा के मन में अभी भी डर था कि कहीं ये लोग नशा करके तो नहीं बैठे हैं और उसे भी कहीं जबरदस्ती नशे की आदत डाल देंगे।”

“क्या सोच रही है निकाल अपना फोन और यहांँ की फोटो विडियो डाल कर अपने सोशल मीडिया पर अपलोड कर और हांँ मुझे हैसटैग जरूर करना। देखना कितनी जल्दी तेरी फैन फॉलोइंग बढ़ेगी।”

नीरा भी थोड़ी ही देर में वहांँ के माहौल में रम गई।

घर आकर जब वो सारी फोटो और वीडियो देख रही थी तब कुछ फोटो में अजीत भी दिख रहा था । उसे जूम कर वो काफी देर तक उसे ही देखती रही।

अब हर हफ्ते वो अंशिका के साथ उसी मॉल में जाया करती जहांँ आज के युवा नए अंदाज में भक्ति में लीन रहते। भले मोबाइल लैपटॉप के साथ अपने सोशल साइट्स पर पोस्ट डालते पर नशे से दूर।

अजीत भी जब उसे उस क्लब में देखता तो मुस्कुरा देता। उसे भी उससे प्यार हो गया था। जिस तरह नीरा उसकी फोटो देखा करती और उससे अपने मन की बात किया करती जो कभी उससे कह नहीं पाती थी। उसी तरह अजीत भी उसके हर पोस्ट को लाइक तो करता ही और उसकी फोटो को देख घंटों उसे निहारता। कुछ तो खास था उस सांवली सी नीरा में जो बाकि सब लड़कियों से अलग था। 

ऑफिस का खडूस बॉस उसका दोस्त बन गया था और एक दिन मॉल से निकलते ही उसने नीरा को शादी के लिए प्रपोज कर दिया।

वो मना ना कर पाई । भजन क्लबिंग के दौरान ही उनके बीच प्रेम का बीज अंकुरित हुआ था। राधा कृष्णा के भजनों के साथ वो एक दूसरे के ख्यालों में ही खोए रहते ।

“क्या तुम शादी के बाद मेरी मम्मी के लिए मुझे वो सब करने दोगे जो मैं करती आ रहीं हूंँ। मेरे सिवाय मेरी मांँ का और कोई सहारा नहीं है।”

“अरे! कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाना है तो करवा लो। वैसे तुमसे शादी करके मुझे भी मांँ मिल जाएंगी।”

अगले ही दिन दोनों मुंबई से पटना के लिए फ्लाइट में बैठ 

गए थे। मांँ को मुबंई लाने के लिए।