Hindi Poem: तुम दुर्गा हो, तुम शक्ति हो ।
तुम अनुपम रुप भवानी हो।
तुम ही जीवन की गाथा है।
भारत का उज्ज्वल माथा हो।
हर एक जीव में प्राण तुम्हीं ।
रक्षा हेतु कृपाण तुम्हीं ।
तुम ही से रोज सवेरा है।
उजली किरणों का डेरा है।
संबंधों का संसार तुम्हीं ।
वेदों ग्रंथों का सार तुम्हीं ।
तुम ही से उपवन महका है।
चिड़ियों का झुरमुट चहका है।
सावन के झूले तुम से है।
तरुवर फल फूले तुम से है।
दीपोत्सव झालर-माल तुम्हीं ।
होली का रंग – गुलाल तुम्हीं ।
शिवरात्री महा बनी तुम से ।
ममता में कौन धनी तुम से।
गिरधर की मैया तुम ही हो ।
मझधार खेवैया तुम ही हो।
सावित्रि पतिवृता तुम ही ।
व्यभिचारों की हंता तुम ही।
जौहर का अर्थ तुम्हीं से है।
हुए राम समर्थ तुम्हीं से है।
हाड़ी रानी का त्याग तुम्हीं ।
झांसी का हो बलिदान तुम्हीं ।
पन्ना की शक्ति तुम ही हो।
मीरा की भक्ति तुम ही हो।
धरती की तनुजा तुम ही हो।
योद्धा की अनुजा तुम ही हो।
आकाश में तोरे तुम से ही।
व्यवधान है हारे तुम से ही ।
तुम आँगन की फुलवारी हो ।
महकी सी कोई क्यारी हो ।
हिय के भावों का सार तुम्हीं ।
सुरभित पुष्पों का हार तुम्हीं।
सब मंगल गीत तुम्हीं से है।
उत्सव की रीत तुम्हीं से है।
बाबुल का साफा तुम से है।
घर की मर्यादा तुम से है।
शत-शील गुणों की खान तुम्हीं ।
हो धैर्य की पहचान तुम्हीं ।
है कर्म क्षेत्र शोभित तुम से ।
निश्चित भारत का हित तुम से।
तुम ही आशा – अभिलाषा हो।
नव – चेतन की जिज्ञासा हो।
रचना में श्लोक तुम्हीं से है।
जग में आलोक तुम्ही से है।

