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जान से ज्यादा आन की परवाह-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Kahani: “छोटी ! तुम आओगी या नहीं रूपा बुआ के काज में…? पता तो चल ही गया होगा कि बुआ नहीं रहीं अभी बात करने और पुरानी बातों पर विवाद बनाने का समय नहीं है । तुम तो अभी ससुराल में ही हो ना ? मुझे लगता है तुम्हारे घर से बुआ का घर […]

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कैसा कन्यापूजन- गृहलक्ष्मी कहानियां

कल रात से ही तैयारी जोरों-शोरों से चल रही थी। सामग्री लिस्ट बनाना, समान लाना किसी मेहमान या आगन्तुक के आने की सूचना नहीं थी, बल्कि कल के कन्या पूजन की तैयारी थी। सुबह हल्की सी शीतलता महसूस हुई,सूर्य देव ने आँखें खोलीं और भोर होने का एहसास करा दिया। गली में चारों—तरफ चेतन ने […]

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