Finland Education System
Finland Education System Credit: shutterstock

Summary: भविष्य की शिक्षा की दिशा

फिनलैंड का एजुकेशन सिस्टम दबाव मुक्त, समझ आधारित और बच्चों के मानसिक-भावनात्मक विकास पर केंद्रित है।

Finland Education System: शिक्षित नागरिक किसी भी देश की प्रगति और विकास के लिए जरूरी है। ऐसे में किसी भी देश का यह सुनिश्चित करना कि वहां के बच्चों को जिनके हाथों में आने वाले भविष्य में देश की भागदौड़ होगी उन्हें बेहतरीन शिक्षा प्राप्त हो। इसी कड़ी में आज हम समझेंगे फिनलैंड के एजुकेशन सिस्टम को। यहां के एजुकेशन सिस्टम का मुख्य आधार खेल, स्वतंत्रता, समानता और विश्वास है। फिनलैंड की एजुकेशन सिस्टम की यह विशेषता है उसे दुनिया का सबसे सफल एजुकेशन सिस्टम बनती है। क्या भारत में बच्चों के भविष्य के लिए भी इस तरह का एजुकेशन सिस्टम होना चाहिए। आइए जानते हैं इस लेख में।

Finland Education System
Finland Education System Speciality

शुरुआती शिक्षा, किताबों से ज्यादा व्यवहारिक ज्ञान: फिनलैंड में बच्चों को 7 साल की उम्र तक औपचारिक शिक्षा की शुरुआत नहीं होती है। यहां स्कूल जाने की शुरुआती उम्र 7 साल की है। इससे पहले बच्चा खेल, बातचीत और अपने आसपास से व्यावहारिक ज्ञान सिखाता है।

बचपन सीखने से ज्यादा खुश रहने के लिए: फिनलैंड में शुरुआती वर्षों में बच्चों पर अधिक होमवर्क, लंबी क्लासेस, स्टैंडर्डाइज्ड एग्जाम का प्रेशर नहीं होता। क्योंकि यहां बच्चों के नंबर से ज्यादा उसके सीखने पर फोकस किया जाता है। साथ में सुनिश्चित किया जाता है बच्चा अपना बचपन खुशी से जिए ना की पढ़ाई के दबाव में।

शिक्षक को सर्वोच्च सम्मान देना: यहां टीचर्स को उतना ही सम्मान मिलता है जितना की एक डॉक्टर या इंजीनियर को। यहां शिक्षक बनने के लिए मास्टर डिग्री का होना आवश्यक है। यहां का सिस्टम शिक्षक पर जितना भरोसा करता हैं, उतनी ही स्वतंत्रता भी देता हैं।

समान शिक्षा देना: फिनलैंड में स्कूल निशुल्क और उच्च गुणवत्ता वाले हैं। यहां हर बच्चे को शिक्षा का समान अधिकार मिलता है। चाहे उसके सामाजिक, आर्थिक या मानसिक स्थिति जो भी हो।

यहां मार्क्स पर फोकस ना होने की वजह से बच्चा फेल होने के डर में नहीं जीता। उसका सीखना सिर्फ मार्क्स तक सीमित नहीं होता बल्कि उसकी खुशी से जुड़ता है।

तुलनात्मक व्यवहार ना होने की वजह से बच्चा सवाल पूछने या अपनी राय देने से नहीं डरता। उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।

किसी तरह के एग्जाम का प्रेशर ना होने की वजह से बच्चा याद रखने की दवाब की बजाय समझाने पर अधिक ध्यान देता है।

बच्चों की सीखने में इस तरह की स्वतंत्रता उनके अंदर रचनात्मक विकास को बढ़ाती है जो कि भविष्य में उनके जीवन को बेहतरीन दिशा प्रदान करता है।

स्कूल की शुरुआत: फिनलैंड में बच्चा 7 साल में स्कूल जाता है, जबकि भारत में यह उम्र तीन से चार साल की है।

परीक्षा का दबाव: फिनलैंड में एग्जाम बहुत कम होता है, जबकि भारत में परीक्षा शुरुआती कक्षा से ही जरूरी मान ली जाती है।

होमवर्क: फिनलैंड बच्चों को बहुत कम होमवर्क दिया जाता है, जबकि भारत में बच्चा होमवर्क का दवाब बहुत ज्यादा महसूस करता है।

टीचर की भूमिका: फिनलैंड में टीचर को गाइड समझ जाता है, जबकि भारत में टीचर को सिलेबस पूरा कराने वाला व्यक्ति।

फोकस: फिनलैंड में बच्चे के समझ को ऊपर रखा जाता है, जबकि भारत में अधिक से अधिक नंबर लाने के लिए बच्चों पर दबाव डाला जाता है।

नंबर से ज्यादा बच्चे के सीखने पर फोकस किया जाए।

बच्चों की प्रगति को तुलनात्मक बनाने की बजाय व्यक्तिगत स्तर पर देखा जाए।

स्किल बेस्ड शिक्षा पर फोकस किया जाए।

टीचर्स को ज्यादा स्वतंत्रता, बेहतरीन ट्रेनिंग और कम प्रशासनिक दबाव दिया जाए।

स्कूल में बच्चों के भावनात्मक शिक्षा पर ध्यान दिया जाए।

बच्चों में मार्क्स फोबिया को कम किया जाए और फेलियर को नॉर्मल किया जाए।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...