Hindi Poem: एक आम यात्री की कहानी, जो हमेशा ध्यान देता रहता है… “यात्रीगण कृपया ध्यान दें!” यह वाक्य सुनते ही दिमाग में तुरंत स्टेशन की तस्वीर उभर आती है — प्लेटफॉर्म पर भागते लोग, चाय की केतली की सीटी, ट्रेन के इंजन की गुर्राहट, और ऊपर से लाउडस्पीकर पर किसी मीठी मगर भावहीन आवाज़ […]
Author Archives: प्रज्ञा पांडे मनु
मैडम जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Social Story: ऑफिस का दरवाज़ा खुलते ही सबकी आवाज़ें धीमी हो जाती थीं।“मैडम जी आ गईं,” किसी ने धीरे से कहा। हर फ़ाइल करीने से सजी रहती, हर कर्मचारी सीधा बैठा होता। वजह थी – मानिनि।वरिष्ठ अफ़सर, तेज़ दिमाग़, सख़्त मिज़ाज। कम बोलतीं, पर उनके शब्द आदेश जैसे होते। लोग उन्हें पीछे से “मैडम […]
कन्फर्म टिकट-गृहलक्ष्मी कहानियां
Hindi Kahani: सुभी को इस बार दीपावली का बेहद बेसब्री से इंतज़ार था। इस बार उसे कई सालों बाद अपने घर छठ पूजा दीपावली और भाई दूज मनाने जाना था। वह कई महीने पहले से ही दीवाली पर गांव जाने की तैयारी में जुट गई थी। अपने पति राकेश को उसने टिकट करवाने के लिए […]
दोबारा-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Story: स्टोरेंट में बैठी हुई सिया मानव का इंतजार कर रही थी ।मानव जिसे सिया से आज 27 साल बाद मिलना है। मानव का इंतजार करते-करते सिया अपने अतीत में डूब गई 27 साल पहले की हर घटना उसकी आंखों के सामने घूमने लगी उसका मानव से मिलना ।मानव का भी उसके प्रति आकर्षित […]
रिटायरमेंट-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Short Story: पूरे ऑफिस में आज जश्न का महौल था। आज राम प्रसाद वर्मा जी के ऑफिस से रिटायर होने के उपलक्ष में एक पार्टी रखी गई थी। वर्मा जी को ईस ऑफिस में काम करते ३२ साल होगेए थे। वह एक मामूली हेल्पर से पदोन्नति पाते हुए डिस्पैच में क्लर्क बन गए थे। […]
