what a beautiful bouquet
what a beautiful bouquet

Funny Stories for Kids: निक्का के कमरे में काँच का एक चॉकलेटी रंग का गुलदस्ता था । बड़ा ही संदुर । उसमें प्लास्टिक के पीले फूल सजे हुए थे । पिछले साल उसके पापा चेन्नई गए थे । वहाँ से लेकर आए थे । पापा ने वह गुलदस्ता निक्का को दे दिया और निक्का ने अपनी किताबों वाली अलमारी के ऊपर सजा लिया ।
गुलदस्ते के फूल मैले हो जाते तो निक्का अच्छी तरह धो देता । वे फिर से चमकने लगते । फिर भी निक्का को लगता, अब फूल इतने संदुर नहीं रहें जितने शुरू में लगते थे । उनकी चमक खत्म होती जा रही है ।

पापा से कहकर मैं दसूरे फूल मगँवाऊँगा । तब गलुदस्ता कितना संदुर लगेगा !’ निक्का ने मन ही मन कहा । ‘पर कैसे फूल होने चाहिए ? क्या पीले रंग के ही ? या हलके गुलाबी ज़्यादा अच्छे लगेंगे !…वैसे कई रंगों के फूल भी तो हो सकते हैं ।’ निक्का के मन में कई दिनों से यही बात चल रही थी । फिर एक दिन की बात । निक्का शाम के समय अपनी फूलों की क्यारी में सफाई करके गया तो उसका जी प्रसन्न था । क्यारी में अब कई तरह के संदुर- संदुर रंग-बिरंगे फूल खिल गए थे । इसलिए पूरी क्यारी रंग-बिरंगी लगने लगी थी । उसकी साफ-सफाई करने में भी उसे आनंद आ रहा था । वहाँ से आकर निक्का पढ़ने बैठ गया । तभी अचानक उसका ध्यान फिर से गुलदस्ते की ओर गया । वह सोचने लगा, ‘अरे वाह ! मैं चाहूँ तो इसे सतरंगा बना सकता हूँ ।’

कहते हुए निक्का की क्यारी में खिले रंग-बिरंगे फूलों की झाँकी उसकी आँखों के आगे तैर गई । उसमें गेंदा, गुलाब, कनेर, लिली, गुड़हल, केली समेत कितने ही फूल थे । एक से एक संदुर और रंग-बिरंगे फूल ।
अगले दिन सुबह उठकर निक्का ने रंग-रंग के फूल तोड़कर उन्हें गुलदस्ते में खबू अच्छी तरह सजाया । बीच-बीच में पेड़-पौधों की संदुर पत्तियाँ भी सजा दीं । इनमें कनेर, आम, अमरूद, जामुन और केली के हरे-हरे पत्ते भी थे । गुलदस्ता इतना अच्छा लग रहा था कि देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई । वह दौड़ा -दौड़ा मम्मी के पास गया । बोला, “देखो-देखो मम्मी , मेरा सतरंगा गुलदस्ता !”

“ओह, कैसे बना सतरंगा !…क्या कि या तुमने ?” मम्मी उस समय रसोई में बेसन का हलवा बनाने में लीन थीं । गुलदस्ते पर एक नजर डाल, उन्होंने हैरानी से पूछा, “क्या तुमने इन फूलों में भी अपने कैमल वाले रंग भर दिए ?” “न…न, मम्मी , जादू से !” निक्का हँसा ।
“जादू…! भला कैसा जादू ?” मम्मी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था । इस पर निक्का ने बताई असल बात तो मम्मी ने चौंककर कहा, “अरे, बात तो ठीक है । ये तो सच्ची , असली वाले फूल हैं । पर तूने घास और पत्तों के साथ ऐसे सजा दिए, कि मैं तो चकरा ही गई ।”
निक्का मम्मी से बातें कर रहा था, तभी मीनू दीदी दौड़ी -दौड़ी आई । नंदू भैया भी आए । जो भी देखता, गुलदस्ते के सात रंग के फूल देखकर खुशी से हँस पड़ता । “देखो-देखो मम्मी , यह गुलदस्ता मुझे धन्यवाद दे रहा है । कह रहा है, तुमने मुझे कि तना संदुर बना दिया कि इतने सारे लोग मुझे एक साथ देख रहे हैं “चल, इसी खुशी में मैं तुझे बेसन का बढ़िया हलवा खिलाती हूँ । तू भी क्या याद करेगा ! बस, अभी-अभी तैयार हुआ है । और सच्ची -मुच्ची , क्या ही शानदार बना है । समझ ले, तेरे सात रंग के गुलदस्ते की ही टक्कर का है !” कहते-कहते मम्मी हँस पड़ीं ।

बेसन के हलवे की सुगंध अब तक निक्का के साथ-साथ, पापा, नंदू भैया और मीनू दीदी की नाक में भी पहुँच चुकी थी । “अहा-हा, नाक में कैसी मीठी गुदगुदी कर रही है मम्मी के बनाए बेसन के हलवे की खुशबू !” नंदू भैया ने खाली प्लेट में चम्मच नाचते हुए कहा । सुनकर निक्का के साथ-साथ मीनू दीदी और पापा भी हँसने लगे । इतने में मम्मी ने सबको बेसन के हलवे की प्लेटें थमा दीं । फिर निक्का से बोलीं, “चल निक्का , इनाम के रूप में तुझे एक चम्मच हलवा मैं खुद खिलाती
हूँ ।”
मम्मी ने निक्का को हलवा खिलाया तो सबने एक साथ तालियाँ बजा दीं । खुश होकर सबके साथ-साथ खुद निक्का भी तालियाँ बजा रहा था ।

ये कहानी ‘बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ki 51 Natkhat Kahaniyan बच्चों की 51 नटखट कहानियाँ