sukhee rahane ka raaj
sukhee rahane ka raaj

Heart Touching Story: किसी गांव में एक विद्वान संत थे। उनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी। एक दिन उनके पास गरीब व्यक्ति आया और बोला कि गुरुजी मैं बहुत परेशान हूं, कृप्या मुझे अपना शिष्य बना लें। गुरु ने कहा कि ठीक है आज से तुम मेरे शिष्य बन जाओ। संत ने उसे अपनी गाय सौंप दी और कहा कि अब से तुम इस गाय की सेवा करो और इसके दूध का सेवन करो। संत ने नए शिष्य को गायत्री मंत्र लिख कर दिया और कहा कि इसका जाप करो। शिष्य यह सुनकर खुश हो गया। वह रोज गाय की देखभाल और दूध का सेवन करने लगा। सुबह-शाम मंत्र जाप भी करता। उसे जीवन में बहुत ही आनंद मिल रहा था। उसने संत से कहा कि गुरुजी आपकी कृपा से मेरे जीवन में आनंद है। संत ने कहा तब तो अच्छा है।

कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन उसकी गाय कहीं गुम हो गई। गाय नहीं रही तो शिष्य को दूध नहीं मिल रहा था। उसका मन मंत्र जाप में भी नहीं लग रहा था। उसने ये बात गुरुजी को बताई तो संत ने कहा ये भी अच्छा है। कुछ दिन बाद शिष्य को गांव में वह गाय मिल गई। अब फिर से उसके जीवन में आनंद आ गया। दूध मिलने लगा। उसका मन मंत्र जाप में भी लगने लगा। शिष्य ने यह बात गुरुजी को बताई। संत ने कहा कि अच्छा है। ये सुनकर शिष्य ने हैरान होते हुए पूछा कि गुरुजी जब हमारे पास गाय थी, तब भी आपने यही कहा था। जब गाय गुम हो गई तब भी आपने यही कहा था कि अच्छा है। अब हमारी गाय वापस मिल गई है, तब भी आप अच्छा ही बोल रहे हें, ऐसा क्यों?

शिक्षा : संत ने जवाब दिया कि यही सुख और सफल जीवन का सबसे अच्छा सूत्र है। सुख हो या दुख, हमें हर हाल में प्रसन्न रहना चाहिए। हर परिस्थिति को अच्छा समझना चाहिए। इस बात का ध्यान रखेंगे तो जीवन में कभी भी दुख का अनुभव नहीं होगा।

ये कहानी ‘दिल को छू लेने वाली कहानियाँ’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानी पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंDil Ko Chhoo Lene Wali Kahaniyan (दिल को छू लेने वाली कहानियाँ)