Understand sexual wellness or you may become frustrated.
Understand sexual wellness or you may become frustrated.

Importance of Sexual Wellness: सेक्स और महिलाओं का स्वास्थ्य आज भी ऐसे विषय हैं जिन पर बात करना समाज में असहज माना जाता है, इसी असहजता को दूर करने के लिए गृहलक्ष्मी हेल्थ पॉडकास्ट में डॉ. शैलेंद्र गोयल से विजया मिश्रा की बातचीत, लेख के रूप में प्रस्तुत है-

आज भी हमारे समाज में सेक्स और महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर बात करना आसान नहीं है। खासकर महिलाओं को यह सिखाया जाता है कि सेक्स के बारे में सोचना, सवाल पूछना या अपनी जरूरतें बताना ‘गलत‘ या ‘शर्मनाक’ है। डॉ. शैलेंद्र गोयल के अनुसार, यह चुप्पी महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। जब सवाल दबा दिए जाते हैं, तो समस्याएं बढ़ती जाती हैं- चाहे वो दर्द हो, डर हो या गिल्ट।

सेक्सुअल वेलनेस का मतलब केवल शारीरिक संबंध नहीं होता। डॉ. गोयल बताते हैं कि इसमें चार अहम पहलू शामिल हैं-

  1. इच्छा
  2. संतुष्टि
  3. सुरक्षा
  4. मानसिक सुकून

जब ये सभी पहलू संतुलन में होते हैं, तभी व्यक्ति खुद को संपूर्ण रूप से स्वस्थ महसूस करता है। केवल ‘रिश्ता निभाने’ के लिए किया गया सेक्स, सेक्सुअल वेलनेस नहीं कहलाता।

संतुलित और सुरक्षित सेक्स महिलाओं के ओवरऑल हेल्थ पर सकारात्मक असर
डालता है।
1. यह तनाव कम करता है
2. हार्मोनल बैलेंस को बेहतर बनाता है
3. नींद की गुणवत्ता सुधारता है
4. और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है
सेक्स को पूरी तरह नजरअंदाज करना, शरीर के एक जरूरी सिस्टम को अनदेखा करने
जैसा है।

Why sex is important for women
Why sex is important for women

अक्सर यह मान लिया जाता है कि सेक्स
पुरुषों की जरूरत है और महिलाओं के लिए
‘ऑप्शनल।’ डॉ. गोयल के अनुसार,
महिलाओं के लिए सेक्स-
1.आत्मसम्मान से जुड़ा होता है
2. भावनात्मक सुरक्षा देता है
3. हार्मोनल हेल्थ को प्रभावित करता है

जब महिलाएं लगातार अपनी इच्छाओं को दबाती हैं, तो इसका असर धीरे-धीरे मानसिक थकान, चिड़चिड़ापन, एंजाइटी और रिश्तों में दूरी के रूप में सामने आता है।

लिबिडो यानी सेक्स की इच्छा। लिबिडो कम होना कोई बीमारी या शर्म की बात नहीं है।
इसके कई कारण हो सकते हैं-
1. हार्मोनल बदलाव
2. तनाव और चिंता
3. नींद की कमी
4. रिश्तों में तनाव
कम लिबिडो दरअसल एक संकेत है कि शरीर या मन कुछ कहने की कोशिश कर रहा
है।

महिलाओं की आम सेक्सुअल समस्याएं महिलाओं में सेक्स से जुड़ी कई समस्याएं आम हैं, जैसे-

1. सेक्स के दौरान दर्द
2. वैजिनल ड्रायनेस
3. इच्छा की कमी
4. गिल्ट या डर
सबसे बड़ी समस्या यह है कि महिलाएं इन पर बात नहीं करतीं। डॉ. मानते हैं कि सही
समय पर सलाह लेने से इनका इलाज और समाधान संभव है।

यह धारणा कि पहली बार सेक्स में ब्लीडिंग जरूरी होती है, पूरी तरह गलत है। यह शरीर की बनावट पर निर्भर करता है और इसका किसी महिला के चरित्र या पवित्रता से कोई संबंध नहीं है।

यूटीआई सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है, पुरुषों को भी हो सकता है। इसके अलावाद्य
पॉलिप
1. पीसीओडी
2. एंडोमेट्रियोसिस
3. पेल्विक पेन
ये सभी समस्याएं सेक्सुअल और रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जुड़ी हो सकती हैं और इन्हें
नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉ. गोयल बताते हैं कि सामान्य प्रेग्नेंसी में सेक्स करना सुरक्षित होता है। लेकिन अगर
कोई जटिलता हो, तो डॉ. की सलाह जरूरी है। हर महिला का शरीर अलग होता है और
उसकी जरूरतें भी अलग होती हैं।

40-50 की उम्र में सेक्स लाइफ उम्र बढ़ने के साथ सेक्स खत्म नहीं होता, बल्कि उसका स्वरूप बदलता है। इस उम्र
में-
1. खुला संवाद
2. सही जीवनशैली
3. और गिल्ट से दूरी
बहुत जरूरी है। स्वस्थ सेक्स लाइफ किसी भी उम्र में संभव है।

डॉ. शैलेंद्र गोयल के अनुसार, सेक्स टॉयज को लेकर समाज में बहुत ज्यादा भ्रम, डर और शर्म जुड़ी हुई है। अक्सर इन्हें गलत नजर से देखा जाता है, जबकि सही जानकारी के साथ देखा जाए तो ये सेल्फ एक्सप्लोरेशन और शरीर को समझने का एक सुरक्षित माध्यम हो सकते हैं। सेक्स
टॉयज का उपयोग तभी स्वस्थ माना जाता है जब-

1.वे मेडिकल-ग्रेड, सुरक्षित सामग्री से बने हों
2. इस्तेमाल से पहले और बाद में उनकी सफाई (हाइजीन) का पूरा ध्यान रखा जाए
3. और उनका प्रयोग स्वेच्छा, समझदारी और बिना अपराधबोध के किया जाए।

डॉक्टर बताते हैं कि कई महिलाएं अपने शरीर की प्रतिक्रियाओं, इच्छाओं और सीमाओं को ठीक से नहीं समझ पातीं, क्योंकि उन्हें कभी यह सिखाया ही नहीं गया कि अपने शरीर को जानना भी सामान्य है। ऐसे में, सही मार्गदर्शन के साथ सेल्फ एक्सप्लोरेशन महिलाओं को अपने कम्फर्ट, प्लेज़र और बाउंडरीज समझने में मदद कर सकता है। डॉ. गोयल साफ कहते हैं कि सेक्स टॉयज
को न तो जरूरत से ज्यादा महिमामंडित करना चाहिए और न ही शर्म से जोड़ना चाहिए। यह एक व्यक्तिगत चुनाव है, जिसे जानकारी और सुरक्षा के साथ देखा जाना चाहिए।

How many times a week should you have sex?
How many times a week should you have sex?

यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है, लेकिन इसका कोई एक सही या तय जवाब नहीं है। डॉ. गोयल के अनुसार, सेक्स की आवृत्ति किसी संख्या से तय नहीं होती। सेक्स ‘कितनी बार’ से ज्यादा जरूरी है-

1.सहमति
2. सहजता
3. संतुष्टि

आभार: (डॉ. शैलेंद्र गोयल, मूत्र रोग विशेषज्ञ और स्वास्थ्य सलाहकार हैं- (फोर्टिस हास्पिटल, नोएडा)