Summary:आईटीसी मौर्य सैलून केस में SC का बड़ा फैसला, महिला को मिलेंगे 25 लाख रुपए
गलत हेयरकट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेवा में कमी तो मानी, लेकिन 2 करोड़ रुपये का मुआवज़ा अत्यधिक बताते हुए घटा दिया।
अदालत ने कहा कि बड़े नुकसान के दावे के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत जरूरी होते हैं, इसलिए राशि 25 लाख कर दी गई।
Wrong Haircut Case Controversy: दिल्ली की एक मॉडल के लिए लग्जरी होटल के सैलून की एक सामान्य-सी विज़िट लंबी कानूनी लड़ाई में बदल गई। उनका दावा था कि एक गलत हेयरकट ने न केवल उनकी शक्ल-सूरत खराब कर दी, बल्कि आत्मविश्वास और करियर के अवसरों पर भी गहरा असर डाला। यह मामला आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा और लगभग सात साल बाद अंतिम फैसला आया।
क्या था मामला?
12 अप्रैल 2018 को, दिल्ली स्थित आईटीसी मौर्य होटल के सैलून में मॉडल आशना रॉय सैलून एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू से पहले हेयरकट कराने पहुंचीं। उन्होंने हेयर स्टाइलिस्ट से लंबे फ्लिक्स या लेयर्ड हेयर की मांग की थी। लेकिन आरोप है कि स्टाइलिस्ट ने उनकी अपेक्षा से कहीं अधिक बाल काट दिए, जिससे बाल काफी छोटे हो गए। इसके बाद किए गए ट्रीटमेंट से सिर की त्वचा में जलन भी हुई। मॉडल का कहना था कि इस घटना के बाद उनका आत्मविश्वास बुरी तरह प्रभावित हुआ। उन्होंने दावा किया कि उनकी प्रोफेशनल इमेज खराब हुई और कई मॉडलिंग असाइनमेंट्स तथा करियर के अवसर हाथ से निकल गए। इसी आधार पर उन्होंने सैलून के खिलाफ सेवा में कमी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई।

उपभोक्ता आयोग ने दिया था 2 करोड़ का मुआवज़ा
सितंबर 2021 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने मॉडल के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि सैलून ने ग्राहक के निर्देशों का पालन नहीं किया और इससे मानसिक आघात व पेशेवर नुकसान हुआ। आयोग ने होटल को 2 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। दिलचस्प बात यह रही कि शिकायतकर्ता ने इससे भी अधिक रकम की मांग की थी। पहले करीब 3 करोड़ और बाद में 5.20 करोड़ रुपये, जिसमें भविष्य की आय के नुकसान का हवाला दिया गया था।
होटल ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा

आईटीसी होटल ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। होटल की ओर से कहा गया कि मुआवज़ा अत्यधिक और असंगत है। साथ ही, प्रस्तुत सबूत यह साबित नहीं करते कि केवल हेयरकट की वजह से मॉडल को इतना बड़ा पेशेवर नुकसान हुआ।
सुप्रीम कोर्ट ने मुआवज़ा घटाया
7 फरवरी 2026 को जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने अंतिम निर्णय सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सेवा में कमी जरूर थी, लेकिन 2 करोड़ रुपये का मुआवज़ा उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता ठोस और स्वीकार्य साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं, जिससे यह साबित हो कि करियर में भारी नुकसान सीधे हेयरकट की वजह से हुआ। कोर्ट ने यह भी कहा कि आशना रॉय ने नुकसान साबित करने के लिए केवल दस्तावेजों की फोटोकॉपी प्रस्तुत की थीं, और ऐसे में 2 करोड़ रुपये जैसा बड़ा हर्जाना उचित नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि बड़े मुआवज़े का निर्धारण “कल्पनाओं या भावनात्मक दावों” पर नहीं, बल्कि विश्वसनीय प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। अंततः अदालत ने मुआवज़ा घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया, जो पहले के आदेशों के तहत पहले ही अदा किया जा चुका था।
